साहित्य सरिता - "प्रस्‍थान" भाग-3
"प्रस्थान" कहानी है एक ऐसे पिता की जो इस मानसिकता में जकड़ा हुआ है कि बड़ी कंपनी में काम करना एक सुरक्षित पक्की नौकरी का परिचायक है। जबकि नये ज़माने के साथ चलने वाला उसका पुत्र कुछ और ही मानता है। पिता और पुत्र के बीच इस पीढ़ी अंतराल को कम करने के लिए पिता प्रयास भी करता है...
एक दिन सुबह-सुबह कोइचि देखता है कि एक व्यक्ति उसके दरवाज़े पर बेहोश हुआ है। वह कोई और नहीं बल्कि उसका इकलौता बेटा रियोजि था। वही बेटा जिसके बारे में पिछले 5 सालों से उसे कोई ख़बर नहीं मिली थी...
कोइचि को कंपनी की आपातकालीन बैठक में तलब किया गया था। उसकी कंपनी अपने कर्मियों को समयपूर्व सेवानिवृत्ति या अनुषंगी कंपनी में स्थानांतरण में से एक को चुनने के लिए मजबूर कर रही थी। पिता भी एक अलग दुविधा में फँसा था और समझ नहीं पा रहा था कि अपने बेटे का सामना कैसे करे!
सुनें 4 कड़ियों में कहानी "प्रस्थान" की तीसरी कड़ी।
(18 दिसम्बर 2021 को प्रसारित अंक का पुनर्प्रसारण)