साहित्‍य सरिता - ''मुखौटे में श्रद्धांजलि'' (भाग-4)
समाज ने कोरोना वायरस के विभिन्न रूपों से लगातार जारी कोविड महामारी के संग जीना सीख लिया है। कहानी का नायक 20 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद अपने पुश्तैनी कस्बे में लौटा है। खर्च चलाने के लिए वह एक श्रद्धांजलि सभा में परोक्ष प्रतिनिधि की अस्थायी नौकरी ले लेता है। श्रद्धांजलि सभा स्थल पर पहुँच कर उसे पता लगता है कि मृतक वही व्यक्ति है जिसके सताने और दादगिरी के कारण वह वर्षों पहले घर छोड़कर गया था। उसके मन में अतीत की सारी स्मृतियों और आक्रोश का ज्वार उमड़ पड़ा। श्रद्धांजलि सभा में बहुत सारे स्थानीय लोगों को देखकर उसे बदला लेने की एक चाल सूझी-

कहानी के लेखक हायाशि जोजि का जन्म 1962 में हुआ था। वह मूलतः विज्ञान कथा लेखक हैं और 2018 से 2020 तक साइंस फिक्शन एंड फेंटेसी राइटर्स ऑफ जापान संस्था के अध्यक्ष रहे। उन्होंने यह कहानी तब लिखी जब समाज में कोविड-19 महामारी फैल रही थी।