साहित्‍य सरिता - ''मुखौटे में श्रद्धांजलि'' (भाग-2)
निकट भविष्य में कोविड महामारी का प्रकोप लगातार जारी है। कहानी का नायक 20 वर्ष के लम्बे अंतराल के बाद अपने पुश्तैनी कस्बे में लौटा है। उसे अपने पुश्तैनी मकान को बेचकर उसका बकाया कर चुकाना है। वायरल रोग से बचाव का टीका लगवा कर इम्यूनिटि पासपोर्ट बनवाने के लिए भी उसे धन चाहिए। अपना ख़र्च निकालने के लिए वह एक श्रद्धांजलि सभा में परोक्ष प्रतिनिधि की अस्थायी नौकरी ले लेता है। श्रद्धांजलि सभा स्थल के रास्ते में उसे अपनी तरह ही परोक्ष प्रतिनिधि का मुखौटा पहने लोगों की भीड़ दिखाई दी। महामारी के कारण श्रद्धांजलि सभाओं में असली परिजन के परोक्ष प्रतिनिधि की उपस्थिति का चलन आम हो गया है।

कहानी के लेखक हायाशि जोजि का जन्म 1962 में हुआ था। वह मूलतः विज्ञान कथा लेखक हैं और 2018 से 2020 तक साइंस फ़िक्शन एंड फ़ेंटेसी राइटर्स ऑफ़ जापान संस्था के अध्यक्ष रहे हैं।