साहित्य सरिता - "प्रस्‍थान" भाग-1
"प्रस्थान" कहानी है एक ऐसे पिता की जो इस मानसिकता में जकड़ा हुआ है कि बड़ी कंपनी में काम करना एक सुरक्षित पक्की नौकरी का परिचायक है। जबकि नये ज़माने के साथ चलने वाला उसका पुत्र कुछ और ही मानता है। पिता और पुत्र के बीच इस पीढ़ी अंतराल को कम करने के लिए पिता प्रयास भी करता है... एक दिन सुबह-सुबह कोइचि देखता है कि एक व्यक्ति उसके दरवाज़े पर बेहोश पड़ा हुआ है। वह कोई और नहीं बल्कि उसका इकलौता बेटा रियोजि था। वही बेटा जिसके बारे में पिछले 5 सालों से उसे कोई ख़बर नहीं मिली थी... सुनें 4 कड़ियों में कहानी "प्रस्थान" की पहली कड़ी।