2 अक्तूबर का अंक
कार्यक्रम में श्रोताओं के पत्रोत्तर के साथ होगी तोयो विश्विद्यालय के सेवानिवृत्त प्राध्यापक मियामोतो हिसायोशि से भेंटवार्ता जापान में पूर्वजों के स्वागत के पर्व 'ओबोन' और भारत के पितृ-पक्ष के बीच समानता पर।
तोयो वि.वि. के सेवानिवृत्त प्राध्यापक मियामोतो हिसायोशि। 1970-80 के दशक में भारत में प्रवास रहा। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में 1978-84 तक पीएचडी की। इस दौरान भारत भ्रमण भी किया।
काशी के घाट पर आकाशदीप। बाँस के बड़े-बड़े खंभों के ऊपर लगी टोकरियाँ जिन्हें संध्या के समय प्रज्ज्वलित किया जाता है।
जापान में चॉपस्टिक्स को चावल के कटोरे में खड़ा डाल कर मृतात्मा को अंतिम भोजन दिया जाता है। इसलिए आमतौर पर खाने में खड़ी चॉपस्टिक्स डालना अशुभ माना जाता है। चित्र में चावल के कटोरे में खड़ी डाली गयीं चॉपस्टिक्स। (बाएँ) क्योतो के पहाड़ पर पूर्वजों को विदा करने के लिए प्रज्ज्वलित विशाल अग्नि। माना जाता है कि पितृात्माओं को ओबोन के बाद यह अग्नि प्रज्जवलित कर विदा करते हैं। (दाएँ)