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कामिशिबाइ यानी चित्र-नाट्य से शान्तिपूर्ण सम्बन्ध बढ़ाने के प्रयास
जापान दर्पण
11 मिनट 57 सेकंड

प्रसारण तिथि 31 जनवरी 2019
उपलब्ध होगा 31 जनवरी 2020

दो महिलाओं ने अणुबमों से होने वाली त्रासदी और शान्ति के महत्त्व के बारे में कामिशिबाइ यानी चित्र-नाट्य के ज़रिये बताना शुरू किया है। इनमें से एक अमरीकी हैं जिनके दादा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान के युद्ध बंदी थे और दूसरी जापानी हैं जिनके दादा को इसलिए बंदी बना लिया गया था क्योंकि उन्होंने जापान की हार का पूर्वानुमान लगाया था और चेतावनी दी थी।

photo शान्ति के महत्त्व पर ज़ोर देने के लिए जापानी एइको मात्सुइ की कामिशिबाइ रचना "निदो तो" यानी "फिर कभी नहीं" photo एइको मात्सुइ (बाएँ), सिडनी सोलिस (दाएँ) को कामिशिबाइ दिखाने का तरीका सिखाती हुईं photo जापानी दर्शकों के सामने "निदो तो" का अंग्रेज़ी संस्करण प्रस्तुत करतीं सिडनी