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रंग बिरंगा जालीदार दोमारु किस्म का कवच (कंधों पर लाल धागे) (Domaru)

जापान की उत्कृष्ट कलाकृतियों की कहानी

प्रसारण तिथि 16 मार्च 2017 उपलब्ध होगा 31 मार्च 2029

दोमारु, जापानी कवचों की प्रतिनिधि शैलियों में से एक है। शुरू में यह निचले वर्ग के पैदल सैनिकों का कवच हुआ करता था लेकिन धीरे-धीरे प्रथम वर्ग के सामुराइ योद्धाओं द्वारा इस्तेमाल किया जाने लगा। इस कार्यक्रम में जिस दोमारु कवच से परिचय करवाया जा रहा है वह जापान के उत्तरी क्षेत्र के एक सामंत के लिए 15वीं सदी में बनाया गया था। धातु और चमड़े के टुकड़ों को एक डोरी से जोड़कर जापानी कवच बनाया जाता था और जहाँ डोरी कवच की सतह पर नज़र आती थी वहाँ एक विशिष्ट डिज़ाइन पैदा हो जाती थी। इस दोमारु कवच के अधिकतर हिस्सों में गहरे नीले और लाल रंग की मिलीजुली डोरी का प्रयोग किया गया है लेकिन कंधों, छाती और कुछ अन्य स्थानों पर केवल लाल रंग की डोरी के इस्तेमाल से विशेष तथा आकर्षक प्रभाव पैदा हुआ है। धातु की सुनहरी सजावट में सर्वश्रेष्ठ कारीगरी देखी जा सकती है और बेहद सुंदर है। जापानी कवच एक संयुक्त कलाकृति थी जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के कारीगरों का काम देखा जा सकता है।

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कार्यक्रम की रूपरेखा