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मात्सुरानोमिया की कथा (Matsuranomiya Monogatari)

जापान की उत्कृष्ट कलाकृतियों की कहानी

प्रसारण तिथि 8 दिसम्बर 2016 उपलब्ध होगा 31 मार्च 2029

मात्सुरानोमिया की कथा 12वीं सदी के अंत में कुलीन और साहित्यिक विद्वान फ़ुजिवारा-नो-तेइका द्वारा लिखी गई है। यह कहानी कुलीन परिवार में जन्मे एक जापानी लड़के की है जो चीन जाता है और वहाँ असाधारण अनुभवों से गुज़रता है। कहानी में पूर्व साहित्यिक रचनाओं के तत्वों को शामिल किया गया है तथा युद्ध का भी उल्लेख है जो तेइका के निजी अनुभवों और जापान में योद्धा वर्ग के उत्थान को दर्शाता है। कार्यक्रम में जिस पाण्डुलिपि की बात हो रही है उसे तेइका की रचना के करीब 100 साल बाद बनाया गया था। इस दौरान जापान का इतिहास एक अहम मोड़ पर पहुँच गया था। ऐसा लगता है कि यह पाण्डुलिपि अतीत की अभिजात्य संस्कृति को व्यक्त करने के उद्देश्य से बनाई गई थी। पाण्डुलिपि में इस्तेमाल सुंदर, सजावटी कागज़ का उत्पादन अंततः समाप्त हो गया। दूसरी ओर, पाण्डुलिपि को विशिष्ट लिपि में शायद नए पाठकों को ध्यान में रखकर लिखा गया ताकि योद्धा और अन्य लोग भी कहानी का आनंद ले सकें।

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कार्यक्रम की रूपरेखा