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कान्जो-बान (बौद्ध समारोह के लिए पताका) (Kanjo-ban)

जापान की उत्कृष्ट कलाकृतियों की कहानी

प्रसारण तिथि 15 सितम्बर 2016 उपलब्ध होगा 31 मार्च 2029

बान लंबी, पतली पताका होती है जिसे बौद्ध समारोहों में प्रयोग किया जाता है। इस तरह की पताकाएँ, मृतकों की आत्मा की शांति या देश की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करते समय मंदिरों में सजाई जाती थीं। हालाँकि इन्हें आमतौर पर रेशम से बनाया जाता है, लेकिन कान्जो-बान, जिसकी चर्चा हम इस बार कर रहे हैं, उसे सोने की परत चढ़े तांबे की बेहद पतली पट्टी से बनाया गया है। इसके जैसी कोई और पताका नहीं है। 7वीं सदी के उत्तरार्ध में बनी यह पताका, जापान के सबसे पुराने मंदिरों में से एक होरियूजि में पीढ़ी दर पीढ़ी सौंपी गई। पताका की लंबाई 5 मीटर से अधिक है और इसके ऊपर महात्मा बुद्ध के संसार और आकाश में स्वच्छंदता से नृत्य करते स्वर्गीय दूतों की बारीक नक्काशी की गई है। इस अद्भुत और शानदार पताका को शायद शोतोकु ताइशि की बेटी के आदेश पर बनाया गया। राजकुमार शोतोकु ताइशि, जापान में बौद्ध धर्म की नींव रखने वाले व्यक्ति माने जाते हैं। तोक्यो राष्ट्रीय संग्रहालय के क्यूरेटर काकुयुकि मिता संकेत देते हैं कि राजकुमार की बेटी ने अपने बड़े भाई की स्मृति में इसे बनवाया होगा। उसके भाई ने राजगद्दी के उत्तराधिकार के संघर्ष में उलझ जाने के बाद आत्महत्या कर ली थी।

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कार्यक्रम की रूपरेखा