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राचीन एवं आधुनिक जापानी कविताओं के संग्रह का कोया खंड, कुण्डलित पत्रिका 19 (Kokin Wakashu "Koyagire")

जापान की उत्कृष्ट कलाकृतियों की कहानी

प्रसारण तिथि 21 जनवरी 2016 उपलब्ध होगा 31 मार्च 2029

10वीं और 11वीं सदी में जापान ने चीनी प्रभाव के तहत अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक शैलियाँ विकसित की। जापान की काव्य शैली वाका में लिखा गया कोकिन वाका शू यानि प्राचीन और आधुनिक वाका कविताओं का संग्रह उस काल की प्रतिनिधि कृति है। वाका को लिखने की सबसे उचित लिपि हिरागाना थी जिसे चीनी अक्षरों को सरल करके बनाया गया था। इस बार हम जिस कृति की बात कर रहे हैं वो कोकिन वाका शू की एक प्रति है जिसे 11वीं सदी में बनाया गया था। इस काव्य संग्रह को हिरागाना कैलीग्राफ़ी का सर्वोत्कृष्ट नमूना माना जाता है। अभ्रक के कणों से चमकते कागज़ पर पतले ब्रश से लिखा गया है। ऊपर से लेकर नीचे तक कई पंक्तियों में सहज अबाध तरीके से वाक्य लिखे गए हैं। समझा जाता है कि इन्हें लिखने वाला व्यक्ति कुलीन वर्ग का था और ये लिपि आज जापान में इस्तेमाल होने वाली हिरागाना वर्णमाला की रूपरेखा है। कार्यक्रम में हम उस इतिहास पर नज़र डाल रहे हैं जब इन कुण्डलित पत्रिकाओं को सराहने के उद्देश्य से उन्हें छोटे छोटे टुकड़ों में काट दिया गया। कार्यक्रम में जापानी शैली की कैलीग्राफ़ी की सुंदरता पर भी ग़ौर कर रहे हैं।

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कार्यक्रम की रूपरेखा