15 मिनट 54 सेकंड

लकड़ी को तराश कर बनाया गया कोनरोन का गिगाकु मुखौटा (Gigaku Men Konron)

जापान की उत्कृष्ट कलाकृतियों की कहानी

प्रसारण तिथि 21 मई 2015 उपलब्ध होगा 31 मार्च 2029

जापान की सबसे पुरानी मंचन कला गिगाकु, जिसके रिकॉर्ड मौजूद हैं, समझा जाता है कि 7वीं सदी में दक्षिणपूर्वी चीन से जापान आई। प्रस्तुतियों में लकड़ी के गिगाकु मुखौटों का इस्तेमाल किया जाता था। विभिन्न किरदारों के मुखौटों में से, हम परिचय करवा रहे हैं कोनरोन नाम के एक मुखौटे से। तोक्यो राष्ट्रीय संग्रहालय के संग्रह में मौजूद कोनरोन का ये मुखौटा, देखने में डरावने दैत्य की तरह लगता है जिसकी बड़ी बड़ी खुली आँखे हैं और मुँह के किनारों में नोकदार दाँत हैं। लेकिन नाटक में इस मुखौटे वाले किरदार को हास्यास्पद ढंग से निभाया जाता था ताकि लोगों को हँसाया जा सके। दुनियाभर की संस्कृतियों में मुखौटे का इस्तेमाल देखा जा सकता है और ख़ास तौर से एशिया में ये आम हैं। लेकिन बहुत कम पुराने मुखौटे बचे हैं। आग लगने के बाद 7वीं सदी में होर्यूजि मंदिर के पुनःनिर्माण की समाप्ति पर की गई विधियों में इन गिगाकु मुखौटों का इस्तेमाल किया गया था और समझा जाता है कि ये दुनिया के सबसे पुराने लकड़ी के मुखौटे हैं, जो आज भी मौजूद हैं। गिगाकु की शुरुआत आज भी एक पहेली है, लेकिन यह समुद्र पार दूर के देशों के साथ रिश्तों का आभास करवाती है।

photo

कार्यक्रम की रूपरेखा