कोरोनावायरस प्रश्नोत्तरी

एनएचके के विशेषज्ञ नये कोरोनावायरस के संबंध में श्रोताओं से मिले प्रश्नों के उत्तर देंगे।

प्रश्न.201. टीके कितने प्रभावकारी हैं? – भाग 1

उत्तर.201. कोरोनावायरस टीके का विकास करने वाली कई कंपनियों ने अपने उत्पाद की प्रभावकारिता दर्शाने के लिए नैदानिक परीक्षणों के परिणामों का खुलासा किया है।

किसी टीके की प्रभावकारिता का आकलन टीकाकृत लोगों के समूह और आभासी दवा प्राप्त करने वाले लोगों के समूह की तुलना करके किया जाता है। यदि आभासी दवा प्राप्त करने वाले लोगों के समूह की तुलना में टीकाकृत समूह में कोरोनावायरस लक्षण विकसित करने वाले लोगों का अनुपात कम रहता है, तो टीके को बीमारी रोकने में प्रभावी माना जाता है।

हज़ारों लोगों पर किये गए नैदानिक परीक्षणों में अमरीका की दवा निर्माता दिग्गज फ़ाइज़र और उसकी जर्मन सहयोगी बियोन्टेक द्वारा संयुक्त रूप से विकसित टीके और एक अन्य अमरीकी दवा निर्माता मॉडर्ना द्वारा विकसित टीके की प्रभावकारिता दर 90 प्रतिशत से अधिक पायी गई। जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इन्हीं दो कंपनियों के साथ टीका समझौता किया है।

90 प्रतिशत से अधिक की प्रभावकारिता दर का अर्थ क्या है? उदाहरण के तौर पर, एक निश्चित समय के बाद आभासी दवा प्राप्त करने वाले 100 लोगों में वायरस के लक्षण विकसित होते हैं, परंतु समान अवधि के बाद 10 से कम टीकाकृत लोगों में लक्षण विकसित होते हैं। इन दोनों आँकड़ों की तुलना के बाद निर्धारित किया जा सकता है कि उक्त टीका 90 प्रतिशत से अधिक लोगों में कोविड-19 संक्रमण को रोकने में प्रभावी है।

परंतु हमें ध्यान देना चाहिए कि टीकाकृत लोग भी वायरस से संक्रमित हो सकते हैं। इसलिए, टीकाकरण कार्यक्रम के आरंभ के बाद भी चेहरे के मास्क पहनने तथा बंद स्थानों, भीड़-भाड़ वाली जगहों और निकट-सम्पर्क वाली जगहों से बचने जैसे वायरस-रोधी उपाय जारी रखने की आवश्यकता है।

उपरोक्त जानकारी 26 मार्च तक की है।

प्रश्न.200. जापान में कोरोनावायरस के नये प्रकारों से संबंधित संक्रमणों की क्या स्थिति है?

उत्तर.200. कोरोनावायरस प्रकारों से संबंधित संक्रमणों की वर्तमान स्थिति पर जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं कल्याण विश्वविद्यालय के प्राध्यापक वादा कोजि का कहना है कि जापान में संक्रमण मामलों के बारे में हमें अभी तक बहुत सी बातें ज्ञात नहीं हैं। परंतु विदेश में स्थिति को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता कि वायरस प्रकारों के प्रसार पर नियंत्रण कठिन है, और ये जापान में भी संक्रमण का मुख्य कारण बनेंगे।

वादा का कहना है कि मुख्यतः कोरोनावायरस प्रकारों से फैले संक्रमणों के कारण संक्रमण प्रसार गति और मामलों की संख्या बढ़ सकती है।

वादा के अनुसार कोरोनावायरस नये प्रकारों से निपटने के लिए भी लोगों को वही उपाय अपनाने चाहिए जो वायरस के मूल प्रकार के विरुद्ध अपनाये जाते हैं। परंतु उनका यह भी कहना है कि नये वित्त वर्ष के आरंभ में कई संगठनों में संक्रमण-रोधी उपायों के प्रभारी अधिकारियों का तबादला हो सकता है, जिससे कुछ मामलों में सुसंगत और निरंतर उपाय जारी रखना मुश्किल हो सकता है।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी कई मामलों में समान स्थिति पैदा हुई थी। बुज़ुर्गों के देखभाल प्रतिष्ठानों, चिकित्सा संस्थानों और नगरपालिका सरकारों जैसे विशेष स्थानों पर वायरस-रोधी उपायों को और त्वरित रूप से लागू करने का वह आह्वान कर रहे हैं।

वादा के अनुसार वायरस प्रकारों के प्रसार की निगरानी बढ़ाना भी महत्त्वपूर्ण है। उनका कहना है कि सरकार को ऐसे नियम बनाने चाहिए जिससे निजी संस्थानों द्वारा जाँचे गये नमूनों से वायरस प्रकार का पता लगाना संभव हो।

उपरोक्त जानकारी 25 मार्च तक की है।

प्रश्न.199. कोरोनावायरस के अपेक्षाकृत नये प्रकारों पर एक नज़र।

उत्तर.199. जापान में 25 फ़रवरी को फ़िलीपीन्स से आये एक व्यक्ति में कोरोनावायरस के एक ऐसे प्रकार की पुष्टि हुई जो ब्रिटेन, दक्षिण अफ़्रीका और ब्राज़ील में फैले प्रकारों से भिन्न था। इस प्रकार में एन501वाई उत्परिवर्ती समेत ई484के नामक स्पाइक उत्परिवर्तित प्रोटीम भी मौजूद है, जिसके कारण वायरस को प्रतिरक्षी प्रोटीन के हमलों से बचने में मदद मिलती है।

जापान के राष्ट्रीय संक्रामक रोग संस्थान का कहना है कि सबसे पहले फ़िलीपीन्स में देखा गया यह प्रकार, मूल प्रकार से भी कहीं अधिक संक्रामक हो सकता है और विश्वभर में फैले कोरोनावायरस के अन्य प्रकारों के बराबर ही ख़तरनाक हो सकता है।

जापान ने 3 मार्च तक ई484के उत्परिवर्तन वाले एक अन्य प्रकार के लगभग 400 मामलों का पता लगाया है। इस प्रकार में एन501वाई उत्परिवर्तन नहीं है जिसका अर्थ यह है कि इसके मूल वायरस से भी अधिक संक्रामक होने की सम्भावना कम है। लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि इस वायरस के कुछ उत्परिवर्तित प्रकार जापान में ही जन्में हैं।

राष्ट्रीय संक्रामक रोग संस्थान ने इस प्रकार को “ध्यान देने वाले प्रकार” की संज्ञा दी है। अनुसंधानकर्ता जीन विश्लेषण और अन्य तरीक़ों से इस प्रकार का अध्ययन कर रहे हैं।

उपरोक्त जानकारी 24 मार्च तक की है।

प्रश्न.198. सबसे पहले ब्राज़ील में मिले कोरोनावायरस के नये उत्परिवर्तित प्रकार के बारे में जानकारी।

उत्तर.198. जापान में इस साल 6 जनवरी को ब्राज़ील से आये एक यात्री में इस नये प्रकार का कोरोनावायरस संक्रमण होने की ख़बर मिली।

माना जाता है कि 4 दिसम्बर 2020 को उत्तरी ब्राज़ील के मनाउस में यह नया प्रकार सबसे पहले सामने आया। कहा जाता है कि मनाउस में जनवरी तक संक्रमण के 91 प्रतिशत मामलों में कोरोनावायरस के इस नये प्रकार का संक्रमण देखा गया।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यह प्रकार “पहले से व्याप्त अन्य प्रकारों से भी अधिक संक्रामक है” और 9 मार्च तक 32 देशों और क्षेत्रों में नये प्रकार से संक्रमण फैलने के समाचार मिले। संगठन के अनुसार इस नये प्रकार का “सीमित दुष्प्रभाव” है।

संगठन का कहना है कि इस प्रकार के कोरोनावायरस से पुनर्संक्रमण के मामले देखे गये हैं क्योंकि इस नये प्रकार और साथ ही दक्षिण अफ़्रीका के नये प्रकार, दोनों में ई484के नामक उत्परिवर्तित स्पाइक प्रोटीन हैं, जो रोग-प्रतिरोधी प्रोटीन के हमलों से बच सकते हैं।

संगठन का कहना है कि टीकों पर इसके सम्भावित प्रभावों की जाँच जारी है।

उपरोक्त जानकारी 23 मार्च तक की है।

प्रश्न.197. दक्षिण अफ़्रीका में सबसे पहले मिले कोरोनावायरस के नये प्रकार के बारे में अब तक क्या जानकारी उपलब्ध है?

उत्तर.197. दक्षिण अफ़्रीका में पिछले साल अगस्त के आरम्भ में कोरोनावायरस का नया प्रकार पाया गया था। नवम्बर के मध्य में दक्षिण अफ़्रीकी स्वास्थ्य कर्मियों ने वायरस-जीन के अनुक्रमण में पाया कि कोरोनावायरस से संक्रमित अधिकांश लोग इस नये प्रकार से संक्रमित थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि दक्षिण अफ़्रीका का नया प्रकार पहले से व्याप्त नये प्रकारों के मुक़ाबले 50 प्रतिशत अधिक संक्रामक है और 9 मार्च तक 58 देशों और क्षेत्रों में यह प्रकार पाया गया है। हालाँकि संगठन के अनुसार ऐसे कोई प्रमाण नहीं मिले हैं जो इंगित करें कि कोरोनावायरस के नये प्रकार से संक्रमित लोग अतिगम्भीर रूप से बीमार पड़ते हैं।

दक्षिण अफ़्रीकी प्रकार में ई484के नाम का उत्परिवर्तन होता है जो वायरस को हमारे शरीर में बनने वाली रोग-प्रतिरोधक प्रोटीन के हमले से बचाता है और पुनःसंक्रमण के अधिक ख़तरे की आशंका की ओर इशारा करता है।

अध्ययनों से पता चला है कि टीके के माध्यम से हमारे शरीर में डाला गया निष्प्रभावी प्रतिरक्षा प्रोटीन कोरोनावायरस के दक्षिण अफ़्रीकी प्रकार के विरुद्ध कम प्रभावी है। टीक निर्माताओं का कहना है कि उनके उत्पाद कोरोनावायरस के नये प्रकार के विरुद्ध भी पर्याप्त रूप से कारगर हैं, परंतु फिर भी इसकी प्रभावकारिका पर उनके अध्ययन जारी हैं।

उपरोक्त जानकारी 22 मार्च तक की है।

प्रश्न.196. सबसे पहले ब्रिटेन में पुष्ट वायरस के प्रकार के संबंध में क्या जानकारी उपलब्ध है?

उत्तर.196. वायरस के उक्त प्रकार का मामला सबसे पहले पिछले साल दिसंबर के आरंभ में ब्रिटेन में सामने आया था। परंतु वायरस की पूर्ववर्ती जाँच से पता चला है कि 20 सितंबर तक उत्परिवर्तित प्रकार का प्रसार आरंभ हो गया था।

यूरोपीय रोग निरोध एवं नियंत्रण केंद्र के अनुसार कई अध्ययनों से पता चला है कि कोरोनावायरस के पिछले प्रकारों की तुलना में यह प्रकार 36 से 75 प्रतिशत अधिक संक्रामक है।

दिसंबर की शुरुआत में ब्रिटेन में प्रतिदिन 10,000 से 20,000 नये मामले सामने आ रहे थे। परंतु दिसंबर के अंत तक यह आँकड़ा बढ़कर 50,000 तक पहुँच गया था। जनवरी में कुछ दिन दैनिक मामलों की संख्या ने 60,000 का आँकड़ा भी पार किया। शोधकर्ताओं का मानना है कि संक्रमण मामलों की संख्या में उछाल उत्परिवर्तित प्रकार के प्रसार के कारण आया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि डब्ल्यूएचओ का कहना है कि 9 मार्च तक दुनिया भर के 111 देशों और क्षेत्रों में इस प्रकार की पुष्टि हुई है।

ब्रिटेन सरकार को संदेह है कि पारंपरिक कोरोनावायरस की तुलना में यह प्रकार अस्पताल में भर्ती होने की दर में वृद्धि और मृत्यु के जोख़िम के लिए अधिक ज़िम्मेदार हो सकता है। इस तथ्य को सत्यापित करने के लिए शोधकर्ता अध्ययन कर रहे हैं। अच्छी ख़बर यह है कि माना जाता है कि यह प्रकार टीकाकरण से प्राप्त रोग-प्रतिरोधक क्षमता को गंभीर रूप से निष्प्रभावी नहीं करता है।

उपरोक्त जानकारी 19 मार्च तक की है।

प्रश्न.195. हमें कोरोनावायरस के कौन से प्रकारों के प्रति अधिक सतर्क रहना चाहिए?

उत्तर.195. दुनिया भर के 100 से अधिक देशों और क्षेत्रों में कोरोनावायरस के नये प्रकारों की पुष्टि हुई है। नये कोरोनावायरस की आनुवंशिक जानकारी में एक महीने में लगभग दो स्थानों में उत्परिवर्तन होता है। सामान्यतः इन परिवर्तनों का वायरस की संक्रामकता और रोगजनकता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

परंतु ये उत्परिवर्तन वायरस के कुछ प्रकारों को अधिक संक्रामक या शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता की प्रतिक्रिया के विरुद्ध शक्तिशाली बन सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन और दुनिया भर की सरकारों ने इन्हें "सर्वाधिक चिंताजनक प्रकार" घोषित कर इनकी निगरानी बढ़ा दी है।

वायरस के तीन प्रकार हैं जिनके प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है। पहले प्रकार की पुष्टि सबसे पहले ब्रिटेन में हुई थी। दूसरे प्रकार की पुष्टि सबसे पहले दक्षिण अफ़्रीका में हुई थी और तीसरे प्रकार का प्रसार वर्तमान में ब्राज़ील में जारी है। इन तीनों प्रकारों में एन501वाई नामक एक उत्परिवर्तन पाया जाता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इसके कारण वायरस की सतह पर एक उभरे हुए भाग में परिवर्तन हुआ है, जो उन्हें मानव कोशिकाओं में प्रवेश करने में मदद करता है। इस वजह से ये प्रकार एक व्यक्ति से दूसरे में अधिक आसानी से फैल सकते हैं।

उपरोक्त जानकारी 18 मार्च तक की है।

प्रश्न.194. सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता का अर्थ क्या है?

उत्तर.194. जब जनसंख्या के एक निश्चित भाग से अधिक लोग वायरस या रोगाणु के प्रति रोग-प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं, तो किसी एक व्यक्ति के संक्रमित होने पर भी अन्य लोगों में संक्रमण नहीं फैलता, और इसे "सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता" की संज्ञा दी जाती है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि संक्रामक रोग के प्रकार के आधार पर यह तय होता है कि सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता प्राप्त करने के लिए कितने लोगों का टीकाकरण आवश्यक है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि ऐसे मामले भी हैं जहाँ टीका किसी व्यक्ति को गंभीर रूप से बीमार पड़ने से रोकने में तो मददग़ार रहा, परंतु वायरस का प्रसार रोकने में प्रभावी नहीं रहा। इसका अर्थ है कि कई लोगों के टीकाकरण के बावजूद सामूहिक रोग-प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं हुई। उनका कहना है कि अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि कोरोनावायरस के मामले में टीकाकरण के माध्यम से सामूहिक रोग-प्रतिरोधक क्षमता प्राप्त की जा सकती है या नहीं।

उपरोक्त जानकारी 17 मार्च तक की है।

प्रश्न.193. टीकाकरण संबंधी धोखाधड़ी और घोटालों से कैसे बचा जा सकता है?

उत्तर 193. जापान की उपभोक्ता मामला एजेंसी का कहना है कि कोविड-19 टीकाकरण के बारे में संदिग्ध फ़ोन कॉल या ई-मेल प्राप्त करने वाले लोगों ने उससे सम्पर्क किया। एक मामले में एक व्यक्ति को किसी ने एक स्थानीय सरकारी अधिकारी बन कर फ़ोन किया, और उस व्यक्ति से टीकाकरण के लिए तुरंत 1,00,000 येन एक बैंक खाते में जमा करने के लिए कहा। फ़ोन करने वाले व्यक्ति ने कथित तौर पर कहा था कि उक्त रकम बाद में लौटा दी जाएगी।

राष्ट्रीय उपभोक्ता केंद्र द्वारा उद्धृत एक अन्य मामले में एक व्यक्ति को एक राज्य मंत्री के नाम पर एक मोबाइल संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें प्राथमिकता से टीकाकरण प्राप्त करने के लिए एक विशेष वेबसाइट पर जाने का निर्देश दिया गया था।

एजेंसी अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय सरकारें कोविड-19 टीकाकरण के लिए फ़ोन कॉल या ई-मेल के माध्यम से भुगतान या व्यक्तिगत जानकारी की माँग नहीं करेंगी। एजेंसी द्वारा किये गए एक सर्वेक्षण से पता चला कि कोरोनावायरस संबंधी धोखाधड़ी के पीड़ितों या उसका समना करने वाले 80 प्रतिशत लोगों को लगा कि वे इसका शिकार नहीं होंगे क्योंकि उन्होंने धोखाधड़ी के खिलाफ़ पर्याप्त सावधानी बरती थी।

जिन लोगों को टीकाकरण अभियान के लिए धन की माँग करने संबंधी संदिग्ध फ़ोन कॉल या ई-मेल आये हों, उनके लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता केंद्र निःशुल्क दूरभाष परामर्श सेवा उपलब्ध करवाता है। यह सेवा केवल जापानी भाषा में उपलब्ध है।

उपरोक्त जानकारी 16 मार्च तक की है।

प्रश्न.192. क्या व्यक्ति टीकाकरण के बाद भी संक्रमित हो सकता है?

उत्तर.192. जापान में "जीन वैक्सीन" यानि "वंशाणु टीके" का उपयोग किया जा रहा है, और इस टीके को लगवाने वाले व्यक्ति का कोरोनावायरस से संक्रमित होना असंभव है।

इस टीके में "एमआरएनए" नामक आनुवंशिकी सामग्री पायी जाती है, जिसमें वायरस की सतह पर स्थित "स्पाइक प्रोटीन" की आनुवंशिकी जानकारी शामिल होती है। इस "एमआरएनए" में मौजूद जानकारी की मदद से मानव कोशिका के अंदर स्पाइक प्रोटीन का उत्पादन होता है।

एमआरएनए को अत्यधिक सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें स्थिरता का अभाव होता है, और टीके के रूप में लगाये जाने पर यह जल्द ही घुल जाता है और शरीर में नहीं रहता। इसके सुरक्षित माने जाने का एक कारण यह भी है कि यह कोशिका के मूल में प्रवेश नहीं करता, जिसमें मानव वंशाणु होता है।

ऐसे दुर्लभ मामले सामने आये हैं जब टीकाकरण के कारण व्यक्ति बीमार होता है। ऐसा तब होता है जब पोलियो जैसी बीमारी में एक जीवित तनु टीका लगाया जाता है, जिसमें एक निष्प्रभावी जीवित वायरस का उपयोग किया जाता है।

वर्तमान में उपयोग किये जाने वाले सभी कोरोनावायरस टीके सुरक्षित हैं, क्योंकि उनमें जीवित विषाणु का प्रयोग नहीं किया गया है।

उपरोक्त जानकारी 15 मार्च तक की है।

प्रश्न.191. कोरोनावायरस टीका माँसपेशियों में लगाया जाता है। क्या यह पीड़ादायक होता है?

उत्तर.191. कोरोनावायरस के अधिकांश टीके माँसपेशियों में लगाये जाते हैं। लेकिन विशेषज्ञों ने संकेत दिये हैं कि चूँकि टीके माँसपेशियों में लगाये जाते हैं, इसका मतलब यह नहीं कि ये अधिक पीड़ादायक हैं। माँसपेशियों में लगाये जाने वाले टीके, त्वचा के वसा के नीचे स्थित माँशपेशियों में लगाये जाते हैं। इंजेक्शन की सूई बाँह के ऊपरी हिस्से में 90 डिग्री के कोण से डाली जाती है।

त्वचा और माँसपेशी के बीच की परत में लगने वाले इंजेक्शन, जापान में फ़्लू सहित अन्य प्रकार के टीकों में अधिक प्रयोग में लगाये जाते हैं। लेकिन माना जाता है कि माँसपेशियों में लगने वाले इंजेक्शन, टीके को शरीर में जल्दी सोखने में मदद करते हैं।

फ़ुकुओका नर्सिंग कॉलेज के प्राध्यापक और जापान टीकाकरण सोसाइटी के अध्यक्ष ओकादा केंजि का कहना है कि जापान के बाहर, साधारण टीकाकरण में भी माँसपेशियों वाले इंजेक्शन लगाये जाते हैं। उनके अनुसार माँसपेशियों वाले सभी इंजेक्शन, त्वचा के वसा के नीचे लगने वाले इंजेक्शन से अधिक पाड़ीदायक नहीं होते। वे कहते हैं कि यह टीके के पदार्थ पर निर्भर करता है। उनका यह भी कहना है कि अलग अलग लोगों में दर्द का अहसास अलग अलग होता है। मगर प्राध्यापक ओकादा यह भी कहते हैं कि अन्य देशों से आयी रिपोर्टों के अनुसार कोरोनावायरस का टीका, इंजेक्शन लगने वाली जगह पर दूसरे टीकों की अपेक्षा अधिक दर्द उत्पन्न करता है। उनके अनुसार लोगों को इंजेक्शन के लिए तैयार करने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को विस्तार से जानकारी देनी चाहिए और साथ ही टीका लगवा रहे लोगों को इंजेक्शन की सूई से ध्यान हटाकर, कहीं और लगाने की कोशिश करने की सलाह दी जानी चाहिए।

यह जानकारी 12 मार्च तक की है।

प्रश्न.190. मैं इस दुविधा में हूँ कि कोरोनावायरस टीका लगवाऊँ या नहीं। मुझे क्या करना चाहिए?

उत्तर.190. ओकाबे नोबुहिको कावासाकि शहर जन-स्वास्थ्य संस्थान के महानिदेशक हैं। वह जापान सरकार की कोरोनावायरस उपायों के लिए सलाहकार समिति के सदस्य भी हैं। उनका कहना है कि कम से कम नैदानिक परीक्षणों और जिन देशों में टीकाकरण जारी है, वहाँ से आयी जानकारी को देखते हुए फ़िलहाल ऐसा नहीं लगता कि टीकों के गम्भीर चिंताजनक दुष्प्रभाव हैं।

उनका कहना है कि इंफ़्लुएंज़ा और अन्य टीकों के मुक़ाबले, कोरोनावायरस टीका लगवाने पर अधिक दर्द हो सकता है और टीका वाली जगह पर लंबे समय तक सूजन आ सकती है। वह कहते हैं कि अब तक के डाटा से पता चलता है कि अधिकांश मामलों में ऐसे लक्षण कुछ समय बाद चले जाते हैं।
हालाँकि, ओकाबे कहते हैं कि एक ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जहाँ किसी बात को लेकर चिंतित लोग, पेशेवर परामर्श या चिकित्सा सेवा प्राप्त कर सकें।

ओकाबे के अनुसार, अगर उनसे पूछा जाये कि क्या वे टीका लगवाएँगे, तो उनका जवाब हाँ रहेगा। वह कहते हैं कि वायरस से संक्रमित हो जाने पर, हो सकता है कि बहुत ही हल्के लक्षण सामने आयें, और यह भी हो सकता है कि आप गम्भीर रूप से बीमार पड़ जायें। कोरोनावायरस से गम्भीर रूप से बीमार पड़ने के ख़तरे और टीकों से गम्भीर दुष्प्रभावों के ख़तरों की तुलना की जाये, तो उनका मानना है कि कोरोनावायरस के लक्षणों की रोकथाम में टीकों के लाभ, उनके दुष्प्रभावों के ख़तरों से कहीं अधिक हैं।

लेकिन वह कहते हैं कि कुछ लोग अपनी पूर्वावस्था के कारण चाहकर भी, टीके नहीं लगवा सकते और कुछ लोग ऐसे भी हैं जो चाहे कुछ भी हो जाये, नहीं लगवाना चाहते। उनका कहना है कि प्रत्येक व्यक्ति के निर्णय का सम्मान किया जाना चाहिए।

यह जानकारी 8 मार्च तक की है।

प्रश्न.189. मैं दुविधा में हूँ कि कोरोनावायरस टीका लगवाऊँ या न लगवाऊँ? मुझे क्या करना चाहिए?

उत्तर.189. कोरोनावायरस टीकाकरण पर बड़ी मात्रा में जानकारी उपलब्ध है, जिससे लोग सोच में पड़ गये हैं कि उन्हें टीका लगवाना चाहिए या नहीं। तोक्यो विश्वविद्यालय में चिकित्सा विज्ञान संस्थान के प्राध्यापक इशि केन टीकाकरण के अग्रणी अनुसंधानकर्ताओं में से एक हैं और उन्हें अमरीका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन संस्थान में कार्य करते समय, टीकों के नैदानिक परीक्षणों की जाँच का अनुभव भी है। जापान में उपयोग किये जा रहे टीकों के बारे में उनकी राय है कि समस्त टीकों की प्रभावशीलता और सुरक्षा को पारदर्शी डाटा प्रमाणित करता है। वह कहते हैं कि इसे लेकर उन्हें कोई समस्या नज़र नहीं आती। उन्होंने कहा कि वह टीकों के तेज़ी से किये गए विकास पर पहले चिंतित थे। लेकिन नैदानिक परीक्षणों में प्रतिभागियों की संख्या और परीक्षणों की सटीकता को देखते हुए उनका निष्कर्ष है कि किसी प्रकार की समस्या नहीं है। हालाँकि उनके अनुसार दीर्घावधि में टीकों के दुष्प्रभावों की सम्भावना से पूरी तरह इंकार नहीं किया जा सकता है, और कई वर्षों बाद टीकाकरण का कोई प्रतिकूल असर देखने को मिलेगा या नहीं, यह भी अभी अस्पष्ट है। वह कहते हैं कि इन भावी खतरों की आशंकाओं को छोड़कर, बाकी सब स्पष्ट है। वह कहते हैं कि टीके के लाभ, वायरस से संक्रमण और गंभीर लक्षणों के ख़तरों से कहीं बढ़कर हैं।

इशि कहते हैं कि अब जब टीके उपलब्ध हैं तो लोगों और समाज के समक्ष यह प्रश्न है कि टीके लगवायें या नहीं। वह कहते हैं कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो अधिक ख़तरे वाले लोगों को, खासतौर पर 65 वर्ष या इससे अधिक उम्र के लोगों को टीका लगवा लेना चाहिए। वह यह भी सलाह देते हैं कि बुज़ुर्गों या स्वास्थ्य संबंधी समस्या से ग्रसित लोगों को सुरक्षित रखने के लिए, उनके साथ रहने वाले परिजनों को भी टीका लगवा लेना चाहिए।

वह कहते हैं कि अगर लोग टीका नहीं लगवाते हैं तो संक्रमण का ख़तरा सदैव बना रहेगा। वे कहते हैं कि टीका लगवाना है या नहीं, यह आप पर निर्भर करता है लेकिन यह निर्णय परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर और आसपास के लोगों को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए।

यह जानकारी 5 मार्च तक की है।

प्रश्न.188. क्या टीकाकरण के बाद भी वायरस-रोधी उपायों का पालन करना ज़रूरी है?

उत्तर.188. इस मुद्दे पर विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक समुदाय में टीकाकरण की प्रभावकारिता की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक लोगों को इस तरह के उपाय जारी रखने की आवश्यकता है।

जापान में उपयोग किया जाने वाला टीका, नैदानिक परीक्षणों के दौरान वायरस लक्षणों को रोकने में 95 प्रतिशत प्रभावी साबित हुआ है। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि टीका पूरी तरह से रोग के लक्षण रोक सकता है।

अभी यह अस्पष्ट है कि टीका लोगों को वायरस से संक्रमित होने से रोक सकता है या नहीं। यह संभव है कि टीका लगवाने के बावजूद आप संक्रमित हो जाएँ, परंतु रोग के लक्षण विकसित न हों। इसीलिए, वायरस-रोधी उपायों का पालन न करने की स्थिति में आपके द्वारा वायरस फैलाये जाने का ख़तरा बना रहेगा।

विश्व भर में टीकाकरण कुछ समय पहले ही आरंभ हुआ है। अमरीकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र यानि सीडीसी का कहना है कि टीके का प्रभाव लंबे समय तक बरकरार रहेगा या नहीं, यह सुनिश्चित करने के लिए अधिक डाटा की आवश्यकता होगी।

सीडीसी और अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि टीका लगने के बाद भी लोगों को चेहरे के मास्क पहनना, रोगाणुनाशकों का उपयोग करना, बंद और भीड़ वाली जगहों से बचना और अन्य वायरस-रोधी उपाय जारी रखने चाहिए।

उपरोक्त जानकारी 4 मार्च तक की है।

प्रश्न.187. क्या टीकाकरण के बाद बुखार या दर्द की दवा ले सकते हैं?

उत्तर.187. कोरोनावायरस टीका लगवाने के बाद कुछ लोगों को बुखार या दर्द की शिकायत हो सकती है। टीकाकरण के एक या दो दिन बाद कई मामलों में ऐसा होता है। ये लक्षण आमतौर पर केवल कुछ दिनों तक रहते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट का कहना है कि यदि लोगों में ऐसे लक्षण विकसित होते हैं तो उन्हें "बुखार या दर्द की उचित दवा लेकर कुछ दिनों तक स्थिति पर नज़र रखनी चाहिए।"

परंतु, यदि दो दिनों से अधिक बुखार रहता है, तो किसी चिकित्सा संस्थान जायें या डॉक्टर से परामर्श करें। कोई अन्य गंभीर या असूचित लक्षण विकसित होने की स्थिति में भी समान क़दम उठाना चाहिए।

कितासातो विश्वविद्यालय में विशेष रूप से नियुक्त प्राध्यापक और टीका विशेषज्ञ नाकायामा तेत्सुओ का कहना है कि प्रतिरक्षा तंत्र के सक्रिय होने पर बुखार और दर्द जैसे लक्षण सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि बुखार या दर्द की दवा लेने से रोग प्रतिरोधक क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता।

नाकायामा ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को 38.5 डिग्री से अधिक बुखार है या तेज़ दर्द है, तो पीड़ा को दूर करने के लिए बुखार या दर्द की दवा लेना संभवतः बेहतर है।

परंतु, अमरीका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र का कहना है कि टीकाकरण पूर्व किसी भी दर्द निवारक दवा को लेने से पहले सावधानी बरती जानी चाहिए। उसका कहना है कि वह ऐसा करने की "सलाह नहीं देता" क्योंकि टीके पर इसके प्रभाव अस्पष्ट हैं।

उपरोक्त जानकारी 3 मार्च तक की है।

प्रश्न.186. क्या गर्भवती महिलाओं के लिए टीका लगवाना बेहतर है?

उत्तर.186. जापान प्रसूता एवं स्त्रीरोग संस्था ने जनवरी 2021 में एक वक्तव्य जारी किया था, जिसमें बताया गया है कि गर्भवती महिलाओं पर कोरोनावायरस टीके के क्या संभावित प्रभाव हो सकते हैं।

वक्तव्य में कहा गया है कि नैदानिक परीक्षणों के दौरान किसी गंभीर प्रतिकूल घटना की ख़बर सामने नहीं आयी। परंतु प्रत्येक देश की टीकाकरण नीति दूसरे देश से भिन्न है। अमरीका का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को टीका नहीं लगवाना चाहिए, ब्रिटेन पर्याप्त डाटा की कमी का हवाला देते हुए गर्भवती महिलाओं को टीका न लगवाने की सलाह देता है।

जापान की दोनों चिकित्सा संस्थाओं का निष्कर्ष है कि गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण, टीकों की सुरक्षा, मध्यम से दीर्घकालिक दुष्प्रभावों और भ्रूण तथा नवजात शिशु पर दुष्प्रभावों की संभावना के संबंध में कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आये हैं। उनका कहना है कि वे गर्भवती महिलाओं को टीका लगवाने से मना नहीं करते, परंतु टीका लगाते समय चिकित्सा विशेषज्ञों को महिलाओं को पर्याप्त जानकारी देनी चाहिए और टीकाकरण से पहले भ्रूण की स्थिति की जाँच भी करनी चाहिए।

संस्थाओं की सलाह है कि गर्भाधान की इच्छुक महिलाओं को यदि संभव हो तो गर्भवती होने से पहले टीका लगवा लेना चाहिए। संस्थाओं का कहना है कि ऐसी महिलाओं को अपने प्रसूता और स्त्रीरोग विशेषज्ञ से पहले से परामर्श ले लेना चाहिए।

उपरोक्त जानकारी 2 मार्च तक की है।

प्रश्न.185. अगर कोविड-19 से संक्रमित हो चुके हैं, क्या तब भी टीकाकरण आवश्यक है?

उत्तर.185. हमने पहले बताया था कि विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि डब्ल्यूएचओ ने ऐसे मामलों में भी टीकाकरण की सिफ़ारिश की है। अमरीका का रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केन्द्र यानि सीडीसी भी कोरोना से स्वस्थ हो चुके लोगों से टीकाकरण की अपील कर रहा है।

अपनी वेबसाइट पर सीडीसी ने अमरीका में इस्तेमाल किए जा रहे फ़ाइज़र और मॉडर्ना द्वारा विकसित एमआरएनए टीकों के बारे में जानकारी दी है। उसने विस्तार से समझाया है कि नैदानिक परीक्षणों से मिले डाटा बताते हैं कि अतीत में कोविड-19 से संक्रमित हो चुके लोगों के लिए भी टीके सुरक्षित हैं।

उसका कहना है, “अतीत में कोविड-19 होने पर भी टीका लगवाना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि विशेषज्ञों को अभी यह नहीं मालूम कि कोविड-19 से स्वस्थ होने के बाद दुबारा बीमार पड़ने तक कितने समय के लिए आप वायरस से सुरक्षित हैं।” उसके अनुसार कितनी प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता हासिल हो सकी है, यह अलग अलग व्यक्ति पर निर्भर करता है।

सीडीसी का साथ ही कहना है, “अगर कोविड-19 होने पर आपका मोनोक्लोनल यानि एकल-प्रतिरूपण प्रतिरक्षी प्रोटीन या कॉन्वेलेसेंट प्लाज़्मा से इलाज किया गया है तो आपको कोविड-19 का टीका लगवाने से पहले 90 दिनों तक इंतज़ार करना चाहिए।” उसका कहना है कि इस बारे में अपने चिकित्सक से परामर्श लें।

उपरोक्त जानकारी 1 मार्च तक की है।

प्रश्न.184. क्या टीकाकरण से घातक एलर्जी प्रतिक्रिया, एनाफ़िलैक्सिस हो सकती है?

उत्तर.184. अमरीका और दूसरी जगहों में, जहाँ टीकाकरण कार्यक्रम पहले आरम्भ हो चुका है, वहाँ टीकाकरण के बाद एनाफ़िलैक्सिस की ख़बरें मिली हैं।
अमरीका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केन्द्र यानि सीडीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, 14 से 23 दिसम्बर के बीच लगे फ़ाइज़र-बियोंटेक के टीकों की लगभग 19 लाख प्रारम्भिक खुराकों के बाद एनाफ़िलैक्सिस के 21 मामले सामने आये।

सीडीसी ने यह भी बताया कि 21 दिसम्बर से 10 जनवरी के बीच मॉडर्ना टीके की 40 लाख से अधिक पहली खुराकों के बाद एनाफ़िलैक्सिस के 10 मामले सामने आये।

सीडीसी ने बताया कि जिन लोगों में एनाफ़िलैक्सिस के लक्षण देखे गये, उनमें से अधिकांश का एलर्जी का इतिहास रहा था और एलर्जी सामने आने के बाद जिन लोगों के बारे में अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध थी, वे सभी पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके थे।

सीडीसी का कहना है कि टीकाकरण के बाद एनाफ़िलैक्सिस प्रतिक्रिया बहुत कम देखी जाती है लेकिन यह घातक हो सकती है, इसलिए तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है।

सीडीसी का कहना है कि टीकाकरण स्थलों पर उपयुक्त उपकरण और कर्मचारी होने चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एनाफ़िलैक्सिस एलर्जी का संदेह होने पर व्यक्ति को तुरंत, उदाहरण के लिए एपिनेफ़्रिन का इंजेक्शन देकर, उपचार किया जा सके। सीडीसी का कहना है कि टीका लगवाने वाले सभी लोगों को निर्देश दिये जाने चाहिए कि टीकाकरण स्थल से चले जाने के बाद अगर उनमें एलर्जी प्रतिक्रिया के संकेत या लक्षण सामने आते हैं तो तुरंत उपचार करवाएँ।

एनाफ़िलैक्सिस अतिगम्भीर एलर्जी प्रतिक्रिया है। परंतु चिकित्सकों का कहना है कि अगर तुरंत इलाज किया जाये, जैसे एपिनेफ़्रिन का इंजेक्शन लगाकर, तो बहुत कम मामलों में यह घातक परिणत होती है।

जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर स्पष्ट लिखा है कि टीकाकरण स्थलों और चिकित्सा संस्थानों में सभी आवश्यक दवाएँ और अन्य सामान उपलब्ध हैं, इसलिए टीकाकरण के बाद वे एनाफ़िलैक्सिस एलर्जी से तुरंत निपटने के लिए तैयार हैं।

उपरोक्त जानकारी 26 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न.183. क्या टीकाकरण से होने वाले दुष्प्रभावों के लिए राहत उपाय हैं?

उत्तर.183. जापान सरकार ने एक व्यवस्था स्थापित की है जिसके तहत दुष्प्रभाव के लक्षण सामने आने वाले लोगों को राहत सहायता दी जायेगी।

जापान के टीकाकरण क़ानून के दायरे में कोरोनावायरस का टीका लगवाने वाले लोग आते हैं इसलिए अगर किसी व्यक्ति में दुष्प्रभाव सामने आते हैं तो उसके लिए सरकार चिकित्सा खर्च या अक्षमता पेंशन उपलब्ध करायेगी।

उपरोक्त जानकारी 25 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न.182. क्या टीकाकरण के बाद कोई दुष्प्रभाव सामने आते हैं? क्या किसी की मृत्यु हुई है?

उत्तर.182. किसी भी टीके के दुष्प्रभाव हो सकते हैं और कोरोनावायरस टीकों के दुष्प्रभावों की भी ख़बरें मिली हैं। अमरीका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केन्द्र के अनुसार, अमरीकी औषधि कंपनी फ़ाइज़र और जर्मन सहयोगी बियोंटेक तथा अमरीकी कंपनी मॉडर्ना द्वारा विकसित टीकों के सबसे आम दुष्प्रभाव थे दर्द और सूजन, जगह का लाल होना, कंपकपी, हरारत और सिरदर्द। इस प्रकार के दुष्प्रभाव टीकाकरण के एक-दो दिन के भीतर नज़र आते हैं और कुछ दिनों में चले जाते हैं। हालाँकि ऐसे मामले कम हैं, लेकिन फिर भी कुछ ऐसे गम्भीर से अतिगम्भीर दुष्प्रभावों की ख़बरें भी मिली हैं जो दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकते हैं।

फ़ाइज़र-बियोंटेक टीके पर एक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी की प्रेस-विज्ञप्ति और नैदानिक परीक्षणों के आधार पर, गम्भीर लक्षणों में 3.8 प्रतिशत थकान और 2 प्रतिशत सिरदर्द शामिल हैं। नैदानिक परीक्षणों में हिस्सा लेने वाले 40,000 लोगों में से टीका लगवाने वाले 2 लोगों की मौत हो गयी। लेकिन 4 अन्य लोग जिन्हें टीके-जैसी नकली दवा का इंजेक्शन लगाया गया था, उनकी भी मौत हो गयी। इसलिए रिपोर्ट के अनुसार इनकी मौत का संबंध टीके से न होने की सम्भावना है।

उपरोक्त जानकारी 24 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न.181. फ़ाइज़र और बियोंटेक द्वारा विकसित टीके के क्या दुष्प्रभाव हैं?

उत्तर.181. प्रतिरक्षण पर एक अमरीकी सलाहकार समिति ने फ़ाइज़र और बियोंटेक द्वारा विकसित टीके के दुष्प्रभावों पर प्राप्त जानकारी का डाटा संकलित किया है। टीका लगवाने वाले लगभग 997,000 लोगों के अध्ययन से पता चलता है कि पहली खुराक के बाद 67.7 प्रतिशत लोगों ने इंजेक्शन लगने वाली जगह पर दर्द की शिकायत की, 28.6 प्रतिशत ने थकान की, 25.6 प्रतिशत ने सिरदर्द, 17.2 प्रतिशत ने मांसपेशियों में दर्द, 7.4 प्रतिशत ने बुखार, 7.1 प्रतिशत ने जोड़ों के दर्द, 7.0 प्रतिशत ने कंपकपी, 7.0 प्रतिशत ने मतली और 6.8 प्रतिशत ने सूजन की शिकायत की। टीकाकरण के बाद गम्भीर एलर्जी प्रतिक्रियाओं की भी ख़बर मिली है।

18 जनवरी तक लगी फ़ाइज़र-बियोंटेक टीके की 99,43,247 खुराकों के अध्ययन से पता चला है कि एनाफ़िलैक्सिस के 50 मामले सामने आये, जो घातक एलर्जी प्रतिक्रिया है। इसका अर्थ हुआ कि हर 2,00,000 खुराकों में एनाफ़िलैक्सिस मामलों की दर 1.0057 है। एनाफ़िलैक्सिस प्रतिक्रिया 26 से 63 वर्ष के लोगों में सामने आयी और इसकी माध्यिक आयु 38.5 है।

94 प्रतिशत मामले महिलाओं में देखे गये। 74 प्रतिशत मामलों में टीका लगने के 15 मिनट के भीतर और 90 प्रतिशत मामलों में 30 मिनट के भीतर एनाफ़िलैक्सिस के लक्षण देखे गये।

इनमें 80 प्रतिशत मामलों में उन लोगों में एलर्जी देखी गयी जिनका पहले किसी दवाई या खाद्य पदार्थ से एलर्जी प्रतिक्रिया का इतिहास रहा है।

यह जानकारी 22 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न.180. कोरोनावायरस टीकाकरण से पहले और बाद में हमें किन स्वास्थ्य संबंधी अवस्थाओं पर ध्यान देने की ज़रूरत है?

उत्तर.180. ऐसा हो सकता है कि अस्वस्थ महसूस करने वाले व्यक्ति को टीका न लगवाने की सलाह दी जाये। स्वास्थ्य मंत्रालय ने 37.5 डिग्री सेल्सियस या इससे अधिक का बुखार या तबियत ठीक न होने की स्थिति में टीका न लगवाने का आग्रह किया है। पहले से बीमार लोगों या किसी बीमारी का इलाज करवा रहे लोगों के संदर्भ में मंत्रालय ने टीकाकरण से पूर्व जाँच में चिकित्सक से सलाह लेने की हिदायत दी है। मंत्रालय ने टीका लगवाने वाले सभी लोगों से टीके के बाद कम से कम 15 मिनट टीकाकरण स्थल पर ही रहने का आह्वान किया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनमें किसी प्रकार की एलर्जी प्रतिक्रिया तो नहीं उभर रही है। मंत्रालय का कहना है कि अगर उन्हें कोई असामान्य बात नज़र आती है तो चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। टीकाकारण के बाद स्नान करने में कोई परेशानी नहीं, लेकिन स्नान करते समय ध्यान रखें कि जिस जगह टीका लगा है उसे न रगड़ें। टीकाकरण वाले दिन बहुत अधिक व्यायाम से परहेज़ करें।
टीकों के विशेषज्ञ कितासातो विश्वविद्यालय के प्राध्यापक नाकायामा तेत्सुओ का कहना है कि टीके के बाद स्नान या कम मात्रा में मदिरापान भी किया जा सकता है (हालाँकि ऐहतियात के तौर पर बहुत ज़्यादा मदिरापान न किया जाये)।

परंतु हमें यह भी ध्यान रखने की ज़रूरत है कि टीके के डर से चक्कर आ सकते हैं या अतिवातायनता से ग्रसित हो सकते हैं। अगर सामूहिक टीकाकरण स्थल पर ऐसा होता है तो इससे बाक़ी प्राप्तकर्ता बेचैन हो सकते हैं। कावासाकि शहर जन-स्वास्थ्य संस्थान के महानिदेशक और सरकारी कोरोनावायरस समिति के सदस्य ओकाबे नोबुहिको के अनुसार एक ऐसी व्यवस्था स्थापित करने की आवश्यकता है जो टीकाकरण को लेकर चिंतित लोगों को परामर्श सेवा प्रदान कर सके।

उपरोक्त जानकारी 19 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न.179. क्या टीकाकरण वायरस से रक्षा प्रदान करने के लिए है या वायरस से संक्रमित हो चुके लोगों को गंभीर रूप से बीमार पड़ने से बचाने के लिए है?

उत्तर.179. समझा जाता है कि नये कोरोनावायरस के टीके वायरस से हमारी रक्षा करने की बजाय, रोगियों में कोरोनावायरस के लक्षण पैदा होने या गम्भीर रूप से बीमार पड़ने से रोकने में मदद करते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि आमतौर पर टीकाकरण का उद्देश्य संक्रमण की रोकथाम, रोगियों में लक्षण पैदा होने या गम्भीर रूप से बीमार पड़ने से रोकने, और तथाकथित सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता प्राप्त करने में मदद करना होता है।

इस बात की पुष्टि करना मुश्किल है कि कोई टीका संक्रमण रोकथाम में प्रभावी है या नहीं। ऐसा इसलिए क्योंकि बहुत से संक्रमित लोगों में कोई लक्षण सामने नहीं आते हैं। साथ ही, मानव शरीर में वायरस के प्रवेश का पता लगाने के लिए कोशिकाओं की विस्तृत जाँच करने की भी आवश्यकता होती है। औषधि एवं चिकित्सीय उपकरण एजेंसी यानि पीएमडीए जापान में दवाओं का मूल्यांकन करती है। एजेन्सी का कहना है कि जब नये कोरोनावायरस के टीकों के मूल्यांकन की बात आती है तो सैद्धांतिक तौर पर, वायरस से संक्रमित लोगों में लक्षण उभरने से रोकने में टीकों की प्रभावकारिता जाँचने के लिए नैदानिक परीक्षणों की ज़रूरत होती है। अमरीका और यूरोप में किये गए नैदानिक परीक्षणों से संकेत मिलते हैं कि टीके न केवल रोगियों में लक्षणों की रोकथाम करने, बल्कि गंभीर लक्षणों की रोकथाम में भी कारगर हैं। पीएमडीए कोरोनावायरस टीकों के मूल्यांकन की शर्तों में मरीज़ों को गम्भीर रूप से बीमार होने में रोकथाम की प्रभावशीलता को भी शामिल करती है।

सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कोरोनावायरस टीकाकरण के अपेक्षित प्रभावों में से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि वैश्विक सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता प्राप्त करने के लिए 70 प्रतिशत से अधिक आबादी का टीकाकरण आवश्यक है। संगठन का कहना है कि इस साल के अंत तक ऐसा हो पाना मुश्किल प्रतीत हो रहा है।

उपरोक्त जानकारी 18 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न.178. कोरोनावायरस का “एमआरएनए” टीका क्या होता है?

उत्तर.178. नये कोरोनावायरस से प्राप्त आनुवांशिक पदार्थ शृंखला के “वंशाणु टीका” बाज़ार में उतारा गया है। 17 फ़रवरी को जापान में कोविड-19 का टीकाकरण कार्यक्रम आरम्भ हुआ जिसमें अमरीकी कंपनी फ़ाइज़र और जर्मनी की बियोंटेक कंपनी द्वारा संयुक्त रूप से विकसित टीके का उपयोग हो रहा है। यह टीका और अमरीकी कंपनी मॉडर्ना द्वारा विकसित एक अन्य टीका, दोनों ही “एमआरएनए टीके” हैं जिनमें वायरस का आनुवांशिक पदार्थ शामिल है।

यह टीका मानव शरीर में “एमआरएनए” डालकर काम करता है, जिसमें वायरस की सतह पर मौजूद “स्पाइक प्रोटीन” से प्राप्त आनुवांशिक जानकारी होती है। “एमआरएनए” मानव कोशिकाओं के भीतर स्पाइक प्रोटीन उत्पन्न करने के लिए एक ब्लूप्रिंट की तरह काम करता है।

शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र इन स्पाइक प्रोटीनों के खिलाफ़ बड़ी मात्रा में प्रतिरक्षी प्रोटीन पैदा करने लगता है। जब शरीर में असल वायरस प्रवेश करता है तब प्रतिरक्षी प्रोटीन तुरंत उस पर हमला बोल देता है।

हालाँकि, एमआरएनए में स्थिरता की कमी होती है और टीके के तौर पर इंजेक्शन लगाने पर तुरंत घुल जाता है और शरीर में नहीं रहता।

इसके अलावा, एमआरएनए टीके को अत्यंत सुरक्षित माना गया है क्योंकि यह मानव वंशाणु वाली कोशिकाओं के भीतरी हिस्से तक प्रवेश नहीं करता।

यह जानकारी 17 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न.177. जापान के कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम में पहले से रोगग्रस्त लोगों में किन्हें प्राथमिकता दी जाएगी?

उत्तर.177. जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की एक सूची तैयार की है। इस सूची में हृदय और गुर्दे के पुराने रोग, श्वास संबंधी विकार, प्रतिरक्षा को नुकसान पहुँचाने वाले रोग जैसे कैंसर और नींद अश्वसन शामिल हैं। अस्पताल में भर्ती लोग या पहले से रोगग्रस्त लोग जो नियमित रूप से चिकित्सक के पास जाते हैं, उन्हें वरीयता दी जाएगी।

रोगियों को अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए प्रमाण पत्र देने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। उन्हें केवल एक प्रश्नावली को भरना होगा।

30 या इससे अधिक का बॉडी-मास इंडेक्स यानि बीएमआइ वाले लोगों को भी टीकाकरण में प्राथमिकता मिलेगी। अनुमान है कि जापान में मोटापे के इस वर्ग में आने वाले या पहले से रोगग्रस्त वयस्कों की संख्या लगभग 82 लाख है।

उपरोक्त जानकारी 16 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न.176. जापान में कोविड-19 के टीके सबसे पहले किसे लगेंगे?

उत्तर.176. जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार वरीयता के आधार पर टीकाकरण किया जाएगा और सबसे पहले स्वास्थ्य कर्मियों को टीका लगाया जाएगा। उसके बाद 65 वर्ष या इससे अधिक उम्र के लोगों को और फिर बारी आएगी वयोवृद्ध देखभाल केन्द्र के कर्मचारियों तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से ग्रस्त लोगों की।

बुज़ुर्गों की देखभाल सुविधाओं में काम करने वाले कर्मचारियों के सशर्त टीकाकरण की मंत्रालय की योजना है। उदाहरण के लिए जब चिकित्सक टीके लगाने के लिए केन्द्र जाएँ, उस समय वृद्धों सहित कर्मचारियों के टीकाकरण की अनुमति दे दी जाए। मंत्रलाय का कहना है कि देखभाल केन्द्रों में सामूहिक संक्रमण की रोकथाम के लिए ऐसा किया जाएगा। दैनिक रूप से प्रतिष्ठान में बुज़ुर्गों के स्वास्थ्य की देखभाल करने वाले चिकित्सक की मौजूदगी इसकी एक शर्त है। ऐसा यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया है कि टीका लगवाने वाले प्रतिष्ठान में कर्मचारियों के अतिरिक्त बुज़ुर्गों की अवस्था पर नज़र रखने वाला कोई और उपस्थित है।

टीकाकरण उन्हीं का होगा जो इसके इच्छुक होंगे। कुछ बुज़ुर्गों में पुष्टि करना मुश्किल होगा कि उनकी इच्छा क्या है। ऐसे मामलों में मंत्रालय का कहना है कि परिजनों और चिकित्सकों की मदद से यह निर्णय लिया जा सकता है।

उपरोक्त जानकारी 15 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न.175. जापान में निवासरत लगभग 30 लाख विदेशियों के निर्बाध टीकाकरण के लिए केन्द्रों में टीका लगवाने की प्रक्रिया क्या है?

उत्तर 175. सामूहिक टीकाकरण के लिए हर व्यक्ति को सबसे पहले टीकाकरण केन्द्र में नगरपालिका द्वारा घर पर भेजा गया कूपन देना होगा और वाहन लाइसेंस, बीमा कार्ड, आदि से अपनी पहचान की पुष्टि करवाना होगी।

टीका लगवाने वाले व्यक्ति को अपनी स्वास्थ्य अवस्था, चिकित्सीय इतिहास के बारे में एक प्रश्नावली भरना होगी और फिर चिकित्सक से जाँच करवाना होगी ताकि यह तय किया जा सके कि टीका लगाया जा सकता है या नहीं।

अगर इस चरण तक कोई समस्या नहीं होती है तो टीकाकरण हो जाएगा। प्रत्येक व्यक्ति को टीका लगाने में क़रीब 2 मिनट तक का समय लगने की उम्मीद है।

टीकाकरण के बाद व्यक्ति को एक प्रमाणपत्र मिलेगा जिसमें टीकाकरण तिथि और टीके का नाम लिखा होगा। टीके की दूसरी खुराक़ के समय यह प्रमाणपत्र आवश्यक है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि टीकाकरण के तुरंत बाद ही घर नहीं जा सकते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने टीका लगवाने वालों से आग्रह किया है कि टीके के बाद वे 15 मिनट से अधिक समय के लिए टीकाकरण केन्द्र में ही निर्धारित जगह पर रहें ताकि उनकी अवस्था पर नज़र रखी जा सके।

विदेशों में किये गए नैदानिक परीक्षणों के अनुसार, जापान को दिये गए टीके को लगवाने वाले कुछ लोगों में टीके के बाद सिरदर्द या थकान जैसे लक्षण सामने आये। अमरीका और दुनिया के अन्य हिस्सों में गिने-चुने मामलों में एनाफ़िलैक्टिक नामक अतिगम्भीर एलर्जी प्रतिक्रिया की भी ख़बर मिली है।

टीकाकरण स्थल पर सहायता केन्द्र भी स्थापित किये जाएँगे ताकि टीकाकरण उपरांत सेहत बिगड़ने पर तुरंत उपचार किया जा सके।

यह जानकारी 12 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न.174. जापान में कोविड-19 का टीकाकरण कैसे और कहाँ होगा?

उत्तर 174. नगरपालिकाओं को केन्द्र सरकार की अगुवाई में टीकाकरण करना है। टीके के इच्छुक लोगों को निवासी के तौर पर पंजीकृत अपनी नगरपालिका में उसे लगवाना चाहिए। जो लोग काम या अस्पताल में भर्ती होने के कारण अपने घरों से दूर रह रहे हैं उन्हें किसी अन्य नगरपालिका में टीका लगवाने की अनुमति है। नगरपालिकाएँ टीकाकरण के लिए आवश्यक कूपन डाक के ज़रिये लोगों के पते पर भेजेंगी। इस कूपन को टीकाकरण केन्द्र में लेकर जाने से टीका निःशुल्क लगवाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए आपको पहले से दूरभाष या किसी अन्य माध्यम से आरक्षण करवाना होगा। टीकाकरण केन्द्र चिकित्सा संस्थान, सामुदायिक सभागार और व्यायाम शाला होंगे। अगली कड़ी में आपको टीकाकरण की विशिष्ट प्रक्रिया के बारे में जानकारी देंगे।

उपरोक्त जानकारी 4 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न.173. टीके कितने समय तक प्रतिरक्षा प्रदान करते हैं?

उत्तर.173. जापान और विदेशों में कोविड-19 के कई टीके विकसित हो चुके हैं या किये जा रहे हैं। लेकिन हमें अभी यह ज्ञात नहीं है कि ये कितने समय तक प्रभावी रहते हैं क्योंकि विदेशों में नैदानिक परीक्षण और असल टीकाकरण आरम्भ ही हुए हैं।

जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि टीके नये कोरोनावायरस के उत्परिवर्तित प्रकारों के ख़िलाफ़ भी प्रभावी हो सकते हैं। मंत्रालय अधिकारियों के अनुसार वायरस आमतौर पर भी निरंतर उत्परिवर्तित होते रहते हैं और मामूली उत्परिवर्तन से टीकों की प्रभावशीलता समाप्त हो जाये, ऐसा नहीं है।

परीक्षण के नतीजों से पता चला है कि जिन लोगों को फ़ाइज़र टीके और अन्य मौजूदा टीके लगाये गए, उनमें प्रतिरक्षी प्रोटीन पैदा हुआ जो कोरोनावायरस के नये प्रकारों के प्रति भी असरदार रहा। अधिकारियों का कहना है कि वे जापान में जारी परीक्षणों के दौरान उत्परिवर्तित किस्मों पर कारगरता समेत टीकों की प्रभावशीलता और सुरक्षा की भी पुष्टि करेंगे।

उपरोक्त जानकारी 3 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न 172. टीकाकरण क्यों आवश्यक है?

उत्तर 172. टीकाकरण का उद्देश्य लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता या उनके प्रतिरक्षा तंत्र को मज़बूत करना है। आशा की जा रही है कि टीकों से लोगों में कोरोनावायरस के लक्षण पैदा होने या गंभीर रूप से बीमार पड़ने से रोका जा सकेगा। साथ ही इससे समुदायों में संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित किया जा सकेगा।

जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि विदेशों में नैदानिक परीक्षणों के परिणामों से ज्ञात हुआ है कि नये कोरोनावायरस टीके गम्भीर रूप से बीमार पड़ने और बुखार जैसे लक्षणों की रोकथाम में कारगर हैं।


अगर कई लोगों के टीकाकरण से गम्भीर रूप से बीमार रोगियों और इस बीमारी से मरने वालों की संख्या कम करने में मदद मिलती है तो चिकित्सा तंत्र पर बोझ कम हो जाएगा।

यह जानकारी 2 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न.171. विदेशी नागरिकों का टीकाकरण

उत्तर 171. जापान में रहने वाले विदेशी नागरिक उन नगरपालिकाओं में कोरोनावायरस टीका लगवा सकते हैं जहाँ वे निवासी के तौर पर पंजीकृत हैं।

जापान में स्वास्थ्य मंत्रालय की अनुमति मिलने पर फ़रवरी-मध्य में टीकाकरण कार्यक्रम आरम्भ हुआ। शुरुआत स्वास्थ्य कर्मियों के टीकाकरण से हुई, जिसके बाद वयोवृद्धों का टीकाकरण होगा। इसके बाद उनको टीका लगाया जाएगा जो किसी स्वास्थ्य समस्या, आदि से ग्रस्त हैं। वयोवृद्धों का टीकाकरण अप्रैल में शुरू होने की उम्मीद है।

सैद्धांतिक रूप से टीकाकरण केन्द्र नगरपालिका में स्थापित किये जाएँगे जहाँ निवासी के तौर पर लोग पंजीकृत हैं।

टीका लगवाने के लिए आवश्यक कूपन लोगों के घरों में भेजने की सरकार की योजना है। यह टीके निःशुल्क लगाये जाएँगे।

उपरोक्त जानकारी 19 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न.168. क्या 15 साल या उससे कम उम्र के बच्चे फ़ाइज़र का टीका लगवा सकते हैं?

उत्तर.168. विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि डब्ल्यूएचओ की प्रतिरक्षण, टीकाकरण और जैविक विभाग की निदेशक डॉक्टर केट ओ'ब्रायन ने 7 जनवरी को एक ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सामान्य तौर पर समिति 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों को टीका लगवाने की सलाह नहीं देती क्योंकि डब्ल्यूएचओ के पास इससे संबंधित डाटा नहीं है।

उन्होंने कहा कि नैदानिक परीक्षणों में 16 साल से कम उम्र के लोगों को अब तक शामिल नहीं किया गया है, लेकिन 12 से 16 वर्ष की आयु के बच्चों पर टीके की प्रभावकारिता पर शोध चल रहा है, इसलिए भविष्य में और अधिक जानकारी उपलब्ध होने की संभावना है।

लेकिन ओ'ब्रायन ने यह भी कहा कि टीकाकरण अधिकारी अभिभावकों से परामर्श के बाद ऐसे बच्चों को टीका लगा सकते हैं जो पहले से गंभीर रूप से बीमार चल रहे हैं या जिन पर कोरोनावायरस संक्रमण से बहुत गंभीर और नकारात्मक प्रभाव पड़ने का ख़तरा है। परंतु उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि डब्ल्यूएचओ 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को टीका लगाने की सलाह नहीं देता है।

उपरोक्त जानकारी 27 जनवरी तक की है।

प्रश्न 167. टीके से उत्पन्न प्रतिरोधक क्षमता कब तक बनी रहेगी?

उत्तर.167. विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रतिरक्षण, टीकाकरण और जैविक विभाग की निदेशक डॉक्टर केट ओ'ब्रायन ने 7 जनवरी को आयोजित एक ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा कि नैदानिक परीक्षण वसंत में आरंभ हुए थे और हम अब भी इन टीकों के उपयोग के शुरुआती चरण में हैं, इसलिए डब्ल्यूएचओ को अब तक इसका जवाब नहीं पता है। उन्होंने कहा कि नैदानिक परीक्षणों के प्रतिभागियों की अनुवर्ती जाँच जारी रखने से पता चल सकता है कि प्रतिरोधक क्षमता कब तक बनी रह सकती है। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ को आशा और अपेक्षा है कि प्रतिरोधक क्षमता लंबे समय तक बनी रहेगी।

ओ'ब्रायन ने कहा कि डब्ल्यूएचओ उन लोगों की भी जाँच कर रहा है जो प्राकृतिक रूप से कोविड-19 से संक्रमित हुए थे। उन्होंने बताया कि ऐसा करने से शायद इस बात का संकेत मिल सकेगा कि प्राकृतिक रूप से अर्जित संक्रमण प्रतिरोधक क्षमता कितने समय तक शरीर में बनी रहती है, और शायद यह टीके से प्राप्त प्रतिरोधक क्षमता पर भी लागू होगा। उन्होंने दुहराया कि इस समय यह बताना संभव वहीं है कि प्रतिरोधक क्षमता कब तक बनी रहेगी।

उपरोक्त जानकारी 26 जनवरी तक की है।

प्रश्न.166. क्या टीकाकरण के पहले और दूसरे चरण में अलग-अलग कंपनियों का टीका लगवाया जा सकता है?

उत्तर.166. विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि डब्ल्यूएचओ की प्रतिरक्षण, टीकाकरण और जैविक विभाग की निदेशक डॉक्टर केट ओ'ब्रायन ने 7 जनवरी को हुए एक ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कुछ देशों में पहले से ही एकाधिक टीकों का उपयोग हो रहा है। उन्होंने स्वीकारा कि डब्ल्यूएचओ के पास एक व्यक्ति को विभिन्न कंपनियों के टीके लगाने का कोई डाटा उपलब्ध नहीं है। परंतु उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पहली ख़ुराक फ़ाइज़र टीके की लेता है तो उसे दूसरी ख़ुराक भी उसी टीके की लेनी चाहिए।

ओ'ब्रायन ने कहा कि डब्ल्यूएचओ इस बात से अवगत है कि कुछ देशों में पहली और दूसरी ख़ुराक के लिए विभिन्न टीकों का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा अनुसंधान का एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है और डब्ल्यूएचओ कुछ कहने की स्थिति में पहुँचने से पहले इस पर अनुसंधान को प्राथमिकता देगा।

उपरोक्त जानकारी 25 जनवरी तक की है।

प्रश्न.164. क्या उन लोगों को टीका लगवाना चाहिए जो कोरोनावायरस संक्रमण के बाद स्वस्थ हो चुके हों?

उत्तर.164. विश्व स्वास्थ्य संगठन के टीकाकरण विशेषज्ञों के रणनैतिक सलाहकार समूह अध्यक्ष आलिआंद्रो क्राविओतो ने 7 जनवरी को आयोजित ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा कि डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को टीका लगवाने की सलाह देता है। उन्होंने कहा कि संगठन का मानना है कि कोविड से उबर चुके लोग जिनमें संक्रमण की पुष्टि पीसीआर या रोगाणु जाँच द्वारा हुई थी उन्हें टीका अवश्य लगवाना चाहिए। क्राविओतो ने कहा कि अभी यह ज्ञात नहीं है कि एक बार संक्रमित हो चुका व्यक्ति प्राकृतिक प्रभाव से कितने समय तक सुरक्षित रह सकता है। उन्होंने कहा कि 6 जनवरी को जारी एक लेख में कहा गया था कि पहले संक्रमित हुए लोग 8 महीनों तक सुरक्षित रह सकते हैं, परंतु इसे सत्यापित करने के लिए पर्याप्त डाटा उपबल्ध नहीं है।

उन्होंने कहा कि संक्रमण से उबरे लोग उन लोगों के बाद टीकाकरण करवा सकते हैं, जिन्हें संक्रमण का अधिक ख़तरा है। परंतु, यह प्रत्येक व्यक्ति का निजी निर्णय होगा।

डब्ल्यूएचओ की प्रतिरक्षण, टीकाकरण और जैविक विभाग की निदेशक डॉक्टर केट ओ'ब्रायन ने उसी सम्मेलन में कहा कि दुनिया भर में टीकाकरण आरंभ हो रहा है और हर देश प्राथमिकता प्राप्त समूहों को टीका लगाने के प्रयासों में रत है। एक बार संक्रमित हो चुके व्यक्ति की 6 महीनों के भीतर दुबारा संक्रमित होने की संभावना काफ़ी कम है। परंतु ओ'ब्रायन ने स्पष्ट किया डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को टीकाकारण कार्यक्रम से बाहर रखने या उन्हें विलंब से टीका लगाए जाने की अनुशंसा नहीं कर रहा है।

उपरोक्त जानकारी 21 जनवरी तक की है।

प्रश्न 163. क्या पहले से बीमार लोगों को टीका लगवाना चाहिए?

उत्तर 163. विश्व स्वास्थ्य संगठन के टीकाकरण विशेषज्ञों के रणनैतिक सलाहकार समूह अध्यक्ष आलिआंद्रो क्राविओतो ने 7 जनवरी को आयोजित ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह उनके रोग के प्रकार पर निर्भर है। यह स्पष्ट है कि जिसे भी किसी टीके से गंभीर प्रत्यूर्जता यानि एलर्जी की शिकायत है, उसे टीका नहीं लगवाना चाहिए। परंतु अगर किसी को भोजन या अन्य उत्पादों से एलर्जी है, तो टीका लगवाने में कोई समस्या नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि वह ऐसी जगह पर टीका लगवाने की सलाह देंगे जहाँ एलर्जी की गंभीर प्रतिक्रिया का प्रभावी ढंग से त्वरित उपचार किया जा सके।

डब्ल्यूएचओ की प्रतिरक्षण, टीकाकरण और जैविक विभाग की निदेशक डॉक्टर केट ओ'ब्रायन ने उसी सम्मेलन में कहा कि जो व्यक्ति हृदय या फेफड़े के रोगों, मधुमेह या मोटापे जैसी बीमारियों से पहले से पीड़ित हैं, उन्हें कोविड संक्रमण का अधिक ख़तरा है। उन्होंने कहा कि संगठन चाहता है कि पहले से रोगग्रस्त लोगों का टीकाकरण किया जाए।

डब्ल्यूएचओ निदेशक ने कहा कि उनके पास अब तक इस बात का कोई डाटा नहीं है कि टीकाकरण से गर्भवती महिलाओं को किसी प्रकार का ख़तरा है या नहीं। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि यह मानने का कोई भी कारण नहीं है कि गर्भवती महिला या गर्भस्थ शिशु के लिए टीका हानिकारक होगा। ओ'ब्रायन ने सुझाव दिया कि प्राथमिकता समूह वाली गर्भवती महिलाएँ, विशेषकर स्वास्थ्य कर्मियों को टीकाकरण दल से चर्चा कर जानना चाहिए कि उन्हें कोविड से संक्रमित होने का ख़तरा किस हद तक है। यदि संक्रमण का ख़तरा अधिक हो तो उन्हें टीका लगवा लेना चाहिए।

ओ'ब्रायन ने कहा कि एचआईवी से संक्रमित सभी लोगों को टीका लगवाना चाहिए और जिसे भी कोई ऐसा रोग हो जिसमें कोविड-19 के कारण स्थिति और बिगड़ सकती है, उसे टीकाकरण करवाना चाहिए।

उपरोक्त जानकारी 20 जनवरी तक की है।

प्रश्न.162. क्या वायरस के नये प्रकारों के प्रति टीके कारगर हैं?

उत्तर.162. समूचे विश्व में कोरोनावायरस के नये प्रकारों का तीव्र प्रसार हो रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रतिरक्षण, टीकाकरण और जैविक विभाग की निदेशक डॉक्टर केट ओ'ब्रायन ने 7 जनवरी को आयोजित एक ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जब टीकों का विकास और परीक्षण किया जाता है, तो वायरस के विभिन्न प्रकारों के विरुद्ध उनकी प्रभावकारिता की जाँच होती है।

उन्होंने कहा कि वायरस हर समय उत्परिवर्तित होते हैं और यह आम बात है। उन्होंने कहा कि प्रश्न यह है कि वायरस में हुए उत्परिवर्तन से रोग, उपचार या फिर टीकों की प्रभावकारिता पर असर पड़ता है या नहीं।

संगठन की निदेशक ने कहा कि दुनिया भर में सामने आ रहे कुछ प्रकारों की हमें जानकारी मिली है, जिनका प्रसार काफ़ी चिंताजनक है। मौजूदा टीकों पर इसका असर पड़ेगा या नहीं इसकी जाँच जारी है।

ओ'ब्रायन ने कहा कि वह पूरे विश्वास के साथ कह सकती हैं कि हमें टीकाकरण अभियान जल्द से जल्द आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वायरस के प्रकारों में जिस तरह के उत्परिवर्तन सामने आये हैं, उनसे टीकों की प्रभावकारिता में बदलाव की संभावना नहीं है।

उपरोक्त जानकारी 19 जनवरी तक की है।

प्रश्न 161 - विश्व में टीकों की स्थिति क्या है?

उत्तर.161. विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रतिरक्षण, टीकाकरण और जैविक विभाग की निदेशक डॉक्टर केट ओ'ब्रायन ने 7 जनवरी को एक ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा, "परिस्थितियाँ हर रोज़ बदल रही है। वर्तमान स्थिति यह है कि अब प्रमाणित हो चुका है कि बहुत से टीके वास्तव में कारगर हैं"।

उन्होंने कहा, "उनमें से कुछ टीकों को विभिन्न देशों में स्वीकृति भी मिल चुकी है। विशेष रूप से उच्च आय वाले देशों में टीकाकरण आरंभ हो गया है और उम्मीद है कि यह निम्न या मध्यम आय वाले देशों में जल्द ही आरंभ हो जाएगा”।

ओ'ब्रायन ने कहा कि कम से कम तीन ऐसे टीके उपलब्ध हैं जिनका मूल्यांकन ऐसे नियामकों द्वारा किया गया है जो टीकों की डाटा समीक्षा में सर्वोच्च मानकों का पालन करते हैं। उन्होंने कहा कि ये नियामक सुरक्षा, प्रभावकारिता और निर्माण की गुणवत्ता के आँकड़े परखते हैं। उन्होंने बताया कि एस्ट्राज़ेनेका, मॉडर्ना और फ़ाइज़र द्वारा विकसित तीन टीकों को कम से कम एक उच्च कोटि नियामक से स्वीकृति प्राप्त है।

ओ'ब्रायन ने कहा कि ऐसे टीके भी हैं जिनकी प्रभावकारिता के परिणाम सार्वजनिक किये गए हैं, और संगठन उनके डाटा की समीक्षा कर रहा है। उन्होंने चीन द्वारा विकसित सिनोफ़ार्म और सिनोवैक टीकों तथा रूस के गामालेया अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित टीके का उदाहरण दिया।

ओ'ब्रायन ने कहा कि सबसे महत्त्वपूर्ण बात उनके अनुसार यह है कि "कई टीकों का मनुष्यों पर भी नैदानिक परीक्षण हो चुका है, और आने वाले समय में बाज़ार में बहुत से टीके उपलब्ध हो जाएँगे"। उन्होंने कहा कि नियामक "उपलब्ध डाटा की जाँच से तय करेंगे कि उन टीकों को जन उपयोग हेतु स्वीकृति दी जानी चाहिए या नहीं"।

उपरोक्त जानकारी 18 जनवरी तक की है।

प्रश्न 149. क्या बच्चों को मास्क लगाना चाहिए?

उत्तर 149. विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोनावायरस से संक्रमित व्यक्ति द्वारा छींकने या खाँसने पर हवा में फैले द्रव्यकणों के सीधे संपर्क में आने से बचने के लिए मास्क बहुत प्रभावी हैं, लेकिन 2 साल से कम आयु के बच्चों को मास्क पहनाना व्यवहारिक तौर पर संभव नहीं है।

4-5 साल के आयुवर्ग के बच्चों में मास्क पहनना संभव है। पर यह बच्चे पर भी निर्भर करता है और अभिभावकों को उन्हें ठीक से मास्क पहनना और उतारना सिखाना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि बहुत से बच्चे घरों के अंदर अपने माता-पिता से कोरोनावायरस से संक्रमित हुए हैं। बच्चों को संक्रमित होने से बचाने के लिए, यह अत्यंत ज़रूरी है कि माता-पिता खुद संक्रमित न होने के लिए संक्रमण-रोधी उपाय करें। अगर परिवार का कोई सदस्य संक्रमित हो जाता है तो यह आवश्यक है कि उस व्यक्ति से 2 मीटर से भी अधिक की दूरी रखी जाए।

विशेषज्ञों ने हाथ धोने और चीज़ों को संक्रमण-मुक्त करने की महत्ता पर भी ज़ोर दिया है क्योंकि बच्चे वायरस से संक्रमित खिलौने और किताबों से अपना मुँह, नाक या आँखें छूकर संक्रमित हो सकते हैं।

यह जानकारी 23 दिसम्बर तक की है।

प्रश्न 148. क्या माताओं को अपने शिशु को स्तनपान कराना रोक देना चाहिए?

उत्तर 148. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोई महिला कोरोनावायरस से संक्रमित हो गयी है तब भी उसे अपने शिशु को स्तनपान कराना नहीं छोड़ना चाहिए। उनके अनुसार माँ अपनी अवस्था और इच्छा के हिसाब से तय कर सकती है कि वह अपने शिशु को दूध पिलाना जारी रखना चाहती है या नहीं।

जब कोई माँ कोरोनावायरस से संक्रमित होती है, तब शिशु के संपर्क में आने से या खाँसने से शिशु के संक्रमित होने का ख़तरा रहता है। माँ के दूध में कोरोनावायरस का वंशाणु मिलने की भी एक ख़बर प्राप्त हुई थी। लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दूध में रोगजनक वायरस था या नहीं। माँ का दूध शिशु के लिए बहुत फ़ायदेमंद होता है और संक्रमण के भय से स्तनपान रोकना ठीक नहीं है।

संक्रमित माताएँ दो प्रकार से शिशु को अपना दूध पिला सकती हैं। एक है सीधे स्तनपान कराना और दूसरा है दूध बोतल में निकालकर उसे बच्चे को पिलाना।

शिशु को सीधे स्तनपान कराने से पहले माँ को अपने हाथ अच्छी तरह से धो लेने चाहिए, उन्हें कीटाणु-रहित करना चाहिए और मास्क पहन लेना चाहिए।

अगर बोतल में दूध निकालकर पिलाना है तो ऐसा करने से पहले माताओं को अपने हाथ अच्छी तरह से धोकर, हाथों को कीटाणु-रहित कर लेना चाहिए। साथ ही अपने स्तन तथा दूध निकालने वाले पंप को भी अच्छी तरह से साफ़ और कीटाणु-मुक्त कर लेना चाहिए। उसके बाद किसी ऐसे व्यक्ति को बोतल में दूध निकालकर शिशु को पिलाना चाहिए जो वायरस से संक्रमित न हो।

यह जानकारी 22 दिसम्बर तक की है।

प्रश्न 132. परिवार के किसी सदस्य के संक्रमित होने पर अपने घर में वायरस के प्रसार को कैसे रोका जा सकता है?

उत्तर 132. तोक्यो में 19 नवंबर को नये संक्रमण मामलों की दैनिक संख्या का आँकड़ा पहली बार 500 से अधिक जाने पर तोक्यो की गवर्नर कोइके यूरिको ने लोगों से घर पर अच्छी तरह से वायरस रोधी उपाय अख़्तियार करने का आग्रह किया था। अगस्त माह से वह कहती आयी हैं कि वायरस का मुख्य स्रोत घरों में है, और एक बार अगर वह घर में प्रवेश कर गया तो फिर उसके प्रसार को रोकना बहुत मुश्किल हो जाता है।

तोक्यो के एक जन स्वास्थ्य केंद्र के प्रमुख का कहना है कि कई मामलों में घर से बाहर जाने वाले वयस्क बाहर से वायरस घर ले आते हैं जिससे बच्चे और बुज़ुर्ग संक्रमित होते हैं।

संक्रमण रोकथाम विशेषज्ञों ने घर के किसी सदस्य में लक्षण उत्पन्न होने पर क्या करना चाहिए इस संबंध में कुछ सुझाव दिए हैं।

उनका कहना है कि रोगी व्यक्ति को, अगर हो सके तो, एक पृथक कमरे में रहना चाहिए तथा उसे और उसके देखभालकर्ता को मास्क ज़रूर पहनना चाहिए।

उनकी सलाह है कि सभी को अपने हाथ बार-बार धोने चाहिए और अलग-अलग थालियों में भोजन करना चाहिए।

उनका यह भी कहना है कि बार-बार छुई जाने वाली जगहों को संक्रमण मुक्त करना और कमरों को पर्याप्त हवादार करना आवश्यक है।

प्रश्न 120. गर्भवती महिलाओं को संक्रमण होने पर क्या ख़तरे हैं?

उत्तर 120. स्त्री और प्रसूता चिकित्सा विशेषज्ञों के जापान संघ द्वारा जून के अंत में किये गए एक अध्ययन में यह सामने आया कि गर्भावस्था के अंतिम चरण में चल रही महिलाओं में कोरोनावायरस संक्रमण होने पर गंभीर रूप से बीमार पड़ने का प्रतिशत अधिक था। चिकित्सकों का कहना है कि हालाँकि संक्रमित गर्भवती महिलाओं में हालत बिगड़ने का ख़तरा चिंताजनक तरीके से नहीं बढ़ता है, परंतु गर्भावस्था के अंतिम दौर से गुज़र रही महिलाओं को ज़्यादा सावधान रहने की आवश्यकता है।

संघ ने बुखार जैसे लक्षण विकसित होने वाले 58 महिलाओं का निरीक्षण किया। सीटी स्कैन से पता चला कि कुछ महिलाओं को निमोनिया हो गया था। उन्हें ज्ञात हुआ कि 29 सप्ताह से कम अवधि के गर्भ वाली 39 महिलाओं में केवल 4, अर्थात कुल 10% महिलाओं को ही निमोनिया हुआ था।

इसकी तुलना में 29 सप्ताह या उससे ज़्यादा अवधि की गर्भावस्था की 19 महिलाओं में से 10 को, यानि कुल 53% को निमोनिया हुआ था।

इसके अतिरिक्त 29 सप्ताह से कम अवधि की गर्भावस्था कि 3 महिलाओं को ऑक्सीजन थेरेपी दी गई, जो कुल का 8% था। वहीं गर्भावस्था की अधिक अवधि की 37% यानि 7 महिलाओं को ऑक्सीजन थेरेपी दी गई। इस आँकड़े से यह पता चलता है कि गर्भावस्था की अधिक अवधि में महिलाओं की हालत बिगड़ने का ख़तरा है।

कई गर्भवती महिलाएँ जो वायरस से संक्रमित हुईं, वे बिना किसी दीर्घावधि लक्षण के, रोग से उबर गयीं। संघ का कहना है कि एक विदेशी सैलानी की जापान आगमन के उपरांत कुछ ही दिनों में लक्षण नज़र आने के बाद मृत्यु हो गयी।

उसने बताया कि नवजात शिशुओं में संक्रमण की कोई रिपोर्ट नहीं मिली थीं।

शोवा विश्वविद्यालय के प्राध्यापक सेकिज़ावा अकिहितो इस सर्वेक्षण के प्रमुख थे। उन्होंने कहा कि कुछ ही गर्भवती महिलाएँ वायरस से संक्रमित हुईं, जो यह दर्शाता है कि कई अन्य रोकथाम उपाय लेने में सफल रहीं। वह कहते हैं कि नतीजे दर्शाते हैं कि गर्भवती महिलाओं को गंभीर रूप से बीमार पड़ने का अत्यधिक ख़तरा नहीं है, लेकिन उन्होंने जोड़ा कि गर्भवती महिलाओं को सावधान रहने की आवश्यकता है क्योंकि गर्भावस्था की अवधि पूरी होते समय गंभीर लक्षण विकसित होने की संभावना रहती है।

जापान स्त्री और प्रसूता संक्रामक रोग संस्था ने अपनी वेबसाइट पर गर्भवती और गर्भाधान के इच्छुक महिलाओं के लिए कोरोनावायरस संक्रमण से बचने के तरीके जारी किए हैं।

वेबसाइट के अनुसार, संक्रमण उपरांत रोग के विकसित होने में गर्भवती महिलाओं और जापान में नहीं रहने वाली महिलाओं के बीच में कोई अंतर नहीं है। हालाँकि, वेबसाइट पर यह उल्लेखित किया गया है कि गर्भवती महिलाओं में गंभीर लक्षण उत्पन्न होने और निमोनिया विकसित होने के मामले सामने आये हैं।

इस सर्वेक्षण के प्रमुख बिंदुओं को सार रूप में प्रस्तुत करने वाले निहोन विश्वविद्यालय के चिकित्सा विभाग के प्राध्यापक सातोशि हायाकावा का कहना है कि गर्भावस्था के अंतिम चरण में गर्भस्थ शिशु के बढ़ने के कारण गर्भवती महिला के फेफड़ों पर दबाव पड़ता है, और अगर उन्हें निमोनिया होता है तो उनकी हालत नाज़ुक हो सकती है। हायाकावा कहते हैं कि सर्वेक्षण के नतीजे उनकी आशंका को पुष्ट करते हैं। उन्होंने जोड़ा कि गर्भवती महिलाओं के गंभीर रूप से बीमार पड़ने के कुछ मामले जापान में सामने आये थे, परंतु अत्यधिक घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। पर साथ ही उन्होंने जोड़ा कि वायरस संक्रमण से बचने के लिए सावधानी में कोई कोताही नहीं बरतना चाहिए।

प्रश्न 118. कोविड-19 से आरंभिक तौर पर उबरने के बाद दीर्घकाल तक बने रहने वाले लक्षणों के संदर्भ में जापान में किस प्रकार का शोध हो रहा है?

उत्तर 118. जापान और समूचे विश्व में ऐसे कई मामले सामने आये हैं जहाँ पर कोरोनावायरस न होने की पुष्टि और अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद रोगियों में कई महीनों तक बुखार और थकान बनी रही, साथ ही शारीरिक क्षमता में कमी और श्वसन समस्याएँ बरक़रार रहने के कारण उनका दैनिक जीवन प्रभावित हुआ है।

जापानी रेस्पिरेट्री सोसाइटी यानि जापानी श्वसन मंडली ने कोरोनावायरस रोगियों के फेफड़ों की कार्य क्षमता क्षीण होने को मुख्य रूप से केंद्र में रखते हुए, सितंबर माह से शोध करना आरंभ किया है। यह संस्था समूचे जापान में चिकित्सा संस्थानों में काम कर रहे चिकित्सकों से ऐसे मामलों की जानकारी देने की माँग कर रही है।

मंडली के अध्यक्ष योकोयामा अकिहितो ने बताया कि ऐसे कई मामले विदेशों में सामने आये हैं जब कोरोनावायरस न होने की पुष्टि के बावजूद रोगियों के फेफड़ों की कार्य क्षमता पूरी तरह से ठीक नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जापान में भी ऐसे कई मामलों की ख़बर है। लेकिन उन्होंने कहा कि अभी इस बात की पूर्ण जानकारी नहीं है कि कितने प्रतिशत संक्रमित रोगियों में ठीक होने के बाद ये लक्षण रहते हैं। परंतु मंडली आँकड़े संकलित कर रही है ताकि उनका अध्ययन कर भविष्य के मामलों में नतीजों का उपयोग किया जा सके।

प्रश्न 117. क्या यह सच है कि कुछ लोग कोविड-19 से आरंभिक स्वास्थ्य लाभ पाने के बाद भी दीर्घकालिक लक्षणों से प्रभावित रहते हैं?

उत्तर 117. वैश्विक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के राष्ट्रीय केंद्र में अनुसंधानकर्ताओं के एक दल ने अस्पताल से छुट्टी मिले कोरोनावायरस से उबरे रोगियों का सर्वेक्षण किया। उन्हें पता चला कि कुछ लोगों को बाल झड़ने की समस्या हुई। कुछ लोगों को 4 महीने बाद भी साँस लेने में तकलीफ़ थी, और गंध तथा स्वाद नहीं आ रहा था। दल का कहना है कि वह लंबे समय तक रहने वाले लक्षणों के जोख़िम स्पष्ट करने के लिए अपना अनुसंधान जारी रखेंगे।

बाल झड़ने की समस्या इबोला और डेंगू से उबरे रोगियों में भी देखी गयी है। डॉ. मोरिओका शिनइचिरो अनुसंधान दल की एक सदस्य हैं। उनका कहना है कि बाल झड़ने की समस्या का संबंध लंबे चलने वाले उपचार के कारण होने वाले मानसिक तनाव से भी हो सकता है।

प्रश्न 82. कोई व्यक्ति संक्रमित कैसे हो सकता है?

उत्तर 82. श्वसन द्रव्यकणों के अलावा वायरस का संक्रमण परोक्ष रूप से हुए संपर्क से भी हो सकता है।

परोक्ष रूप से संक्रमण तब हो सकता है जब कोई व्यक्ति किसी संक्रमित व्यक्ति द्वारा छुई गयी चीज़ का स्पर्श करता है। लोग आमतौर पर अपने खुद के चेहरे, नाक और मुँह का स्पर्श रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कई बार करते हैं। अगर वे यह स्पर्श संक्रमित हाथों से करते हैं तो उनमें वायरस संक्रमण हो सकता है। आँखें मलने के द्वारा भी संक्रमण हो सकता है।

सूक्ष्म द्रव्यकण भी वायरस को फैलाने में सक्षम माने जाते हैं। सामान्य द्रव्यकणों से ये छोटे होते हैं, और बंद या कम हवादार जगहों में फैले रहते हैं। ऐसे सूक्ष्म द्रव्यकणों के माध्यम से संक्रमण रोकने के लिए लोगों को, बंद और कम हवादार जगहें, भीड़ वाले इलाके और कम दूरी से नज़दीकी संवाद से बचने की सलाह दी जाती है। कहा जाता है कि सामान्यतया द्रव्यकण 2 मीटर का फ़ासला तय करने से पहले गिर जाते हैं, अतः दूसरों से कम से कम इतना फ़ासला रखना सुरक्षित माना जाता है।

नया कोरोनावायरस कैसे फैलता है इस बारे में हर चीज़ ज्ञात नहीं है। लेकिन फ़िलहाल लागू उपाय यह मानते हुए लिये गए हैं कि द्रव्यकणों और संपर्क से पूरी तरह बचने पर संक्रमण से बचा जा सकता है।

समूचे जापान में संक्रमण के ख़तरे को कम करने के लिए अधिकारी हर व्यक्ति से मास्क पहनने, द्रव्यकणों को फैलने से रोकने, और दूसरों से कम से कम 2 मीटर का फ़ासला रखने का आह्वान कर रहे हैं। लोगों को हाथ धोने के लिए सलाह दी जाती है ताकि अगर उनके हाथ संक्रमित हों तो वे अनजाने में अपने मुँह, नाक या आँखें स्पर्श न कर लें।

प्रश्न 76. कमरों को ठीक तरीके से हवादार कैसे रखें?

उत्तर 76. खिड़की और दरवाज़े निर्माता वायकेके एपी ने नये कोरोनावायरस के संदर्भ में खिड़की वाले कमरों को ठीक तरीके से हवादार रखने के तरीकों की एक अनुशंसित सूची अपनी वेबसाइट पर जारी की है।

कंपनी का सुझाव है कि “एक के बजाय दो खिड़कियाँ खोली जाएँ” और “एक दूसरे के विपरीत विकर्ण कोण पर स्थित खिड़कियों को खोला जाए”।

केवल एक ही खिड़की वाले घर के लिए कंपनी का सुझाव है कि कमरों के दरवाज़े खोलकर हवा का एक मार्ग बनाया जाए, और हवा के संचार के लिए पंखों का इस्तेमाल किया जाए।

स्लाइड होने वाली खिड़कियों के संदर्भ में कंपनी का सुझाव है कि दोनों खिड़कियों को बीच में रखें ताकि दोनों ओर से खिड़की खुली रहे।

प्रश्न 75. वातानुकूलक का उपयोग करते समय कमरों को पर्याप्त रूप से हवादार कैसे रखें?

उत्तर 75. प्रमुख वातानुकूलक निर्माता दाइकिन इंडस्ट्रीज़ का कहना है कि अधिकांश वातानुकूलक केवल कमरे की हवा को ही अनुकूल बनाते हैं और कमरे में हवा का संचार नहीं करते। अतः वह लोगों से आह्वान करती है कि जब वातानुकूलक चल रहे हों तब वे अपनी खिड़कियों को कुछ देर के लिए खोल लें ताकि ताज़ी हवा अंदर आए।

ऐसा करने पर कुछ लोगों को लग सकता है कि वह बिजली बर्बाद कर रहे हैं। लेकिन इसके लिए एक अधिकारी ने बिजली बचाने की युक्ति दी है। वातानुकूलक जब आरंभ होते हैं तो बड़ी मात्रा में बिजली का उपयोग करते हैं, अतः खिड़कियाँ खोलते समय वातानुकूलक बंद करना उचित नहीं है।

गर्म तापमान में, बाहर से आने वाली गर्म हवा कमरे के तापमान को बढ़ा सकती है जिससे ऊर्जा की खपत भी बढ़ सकती है, अतः खिड़की खोलने से पहले अपने वातानुकूलक को कुछ बढ़े हुए तापमान पर रखना श्रेयस्कर है।

प्रश्न 52. क्या मच्छर कोरोनावायरस को फैला सकते हैं?

उत्तर 52. विश्व स्वास्थ्य संगठन की वेबसाइट पर स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है कि “नया कोरोनावायरस मच्छरों के काटने से नहीं फैलता है”। उसमें आगे समझाते हुए कहा गया है कि अभी तक ऐसी कोई सूचना या साक्ष्य नहीं मिले हैं जो यह इंगित करें कि वायरस संक्रमण मच्छरों द्वारा फैल सकता है।

संगठन का कहना है कि “नया कोरोनावायरस श्वसन तंत्र को प्रभावित करने वाला वायरस है जो मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति द्वारा खाँसने या छींकने, अथवा नाक या लार से निकलने वाले द्रव्य कणों के द्वारा फैलता है”।

संगठन सलाह देता है कि “स्वयं की रक्षा के लिए बार-बार अल्कोहल-युक्त हस्त प्रक्षालक द्वारा अपने हाथ साफ़ करें या साबुन और पानी से उन्हें धोएँ। साथ ही ऐसे किसी भी व्यक्ति के निकट संपर्क में न आएँ जो खाँस या छींक रहा हो”।

उपरोक्त जानकारी 30 जून तक की है।

प्रश्न 51. क्या टूथब्रश से दाँत माँजना कोरोनावायरस को फैलने से रोकने में प्रभावी है?

उत्तर 51. तोक्यो चिकित्सा एवं दंत विश्वविद्यालय के शिक्षक तोनामि केनइचि का कहना है कि आम ज़ुकाम में वायरस फैलने से रोकने में लार द्वारा वायरस को समेटने में बड़ी भूमिका मानी जाती है।

लेकिन जब लोग ब्रश द्वारा अपने दाँत नहीं माँजते हैं तो मुँह में उपस्थित बैक्टीरिया में वृद्धि होती है। बैक्टीरिया ऐसे एंज़ाइमों को छोड़ता है जो लोगों में आसानी से संक्रमण के अनुकूल परिस्थितियाँ बनाते हैं।

अतः यह माना जाता है कि मुँह में उपस्थित बैक्टीरिया को ब्रश कर के हटाने पर संक्रमण से बचाव में मदद मिलती है।

तोनामि कहते हैं कि हालाँकि यह स्पष्ट नहीं है कि टूथब्रश द्वारा दाँत साफ़ करने पर कोरोनावायरस संक्रमण से बचाव में मदद मिलेगी, परंतु ऐसी उम्मीद है कि यह एक सामान्य बचाव उपाय होगा।

उपरोक्त जानकारी 29 जून तक की है।

प्रश्न 48. किन परिस्थितियों में नया कोरोनावायरस प्रजनन कर बढ़ता है? क्या यह सिर्फ हमारे शरीर के अंदर ही बहुगुणित होता है?

उत्तर 48. सेंट मारिआना विश्वविद्यालय के चिकित्सा विभाग में प्राध्यापक कुनिशिमा हिरोयुकि संक्रामक रोग विशेषज्ञ हैं। उनका कहना है कि वायरस और बैक्टीरिया कुछ ऐसे सूक्ष्म जीवाणु हैं जो रोग उत्पन्न करते हैं।

बैक्टीरिया एकल कोशिका से निर्मित जीवन का आरंभिक प्रकार है जो स्वयं प्रजनन में सक्षम है।

वायरस बैक्टीरिया से भी लघुतर होते हैं। वे वंशाणु, या न्यूक्लिक अम्ल, और एक सुरक्षात्मक परत के बने होते हैं, लेकिन कोशिका नहीं होते। वह केवल किसी इंसान या प्राणी की जीवित कोशिकाओं को ही संक्रमित कर प्रजनन कर सकते हैं।

इसका अर्थ यह हुआ कि नया कोरोनावायरस दीवारों या अन्य निर्जीव सतहों पर प्रजनन नहीं कर सकता है। लेकिन हमें मालूम है कि वायरस की संक्रामकता ऐसी सतहों पर कुछ देर के लिए बनी रह सकती है।

प्राध्यापक कुनिशिमा का कहना है कि बाहर रहते समय इस प्रकार की संक्रमित सतहों को छूने की संभावना रहती है जिनमें दरवाज़े के हत्थे, और पकड़ने के अन्य हत्थे शामिल हैं। उनका कहना है कि संक्रमण से बचने के लिए खाना खाने से पहले, या घर या दफ्तर पहुँचने पर अपने हाथ धोने चाहिए या अल्कोहल-युक्त निस्संक्रामक का प्रयोग करना चाहिए।

उपरोक्त जानकारी 24 जून तक की है।

प्रश्न 42. मानव त्वचा पर वायरस को क्या होता है? क्या वायरस किसी व्यक्ति में बिना लक्षण उत्पन्न किए रह सकता है?

उत्तर. 42. सेंट मैरीआना विश्वविद्यालय चिकित्सा विभाग के प्राध्यापक कुनिशिमा हिरोयुकि संक्रामक रोग विशेषज्ञ हैं। वह कहते हैं कि जब तक वायरस एक जीवित प्राणी की कोशिकाओं में प्रवेश कर उन्हें संक्रमित नहीं करता तब तक वह बहुगुणित होकर बढ़ नहीं सकता है।

नया कोरोनावायरस लोगों की नासिका की झिल्ली या मुख के द्वारा प्रवेश कर उनके गले, फेफड़े और अन्य स्थानों पर बहुगुणित होकर संक्रमित करता है। अगर वायरस केवल किसी के हाथ या पैरों की सतह पर ही है तो वह बहुगुणित नहीं हो सकता है।

लेकिन अगर किसी के हाथों पर वायरस है और वह अपनी आँख नाक या मुँह स्पर्श करता है तब वह व्यक्ति संक्रमित हो सकता है। किसी व्यक्ति की त्वचा पर उपस्थित वायरस को साबुन के द्वारा धोकर हटाया जा सकता है, अतः लोगों को अपना चेहरा छूने से पहले अपने हाथ साबुन से अच्छी तरह धोने चाहिए या अल्कोहल जैसे निस्संक्रामक का उपयोग कर उन्हें साफ़ कर लेना चाहिए।

चिकनपॉक्स यानि छोटी माता के कारक हर्पीज़ जैसे कुछ वायरस, व्यक्ति के रोग से उबरने के बाद भी उसके शरीर में रह जाते हैं। लेकिन आमतौर पर, कोरोनावायरस अलग है। अतः अगर कोई व्यक्ति संक्रमित होता है और उसमें लक्षण उभरते हैं, तो अंततः उस व्यक्ति का रोग प्रतिकारक तंत्र हरकत में आकर शरीर में वायरस को खत्म कर देता है।

उपरोक्त जानकारी 15 जून तक की है।

प्रश्न. 35. नया कोरोनावायरस कितने तापमान तक जीवित रह सकता है, और खाना पकाने की प्रक्रिया में क्या वायरस मर सकता है?

उत्तर. 35. विशेषज्ञों का कहना है कि नया कोरोनावायरस 37 डिग्री सेल्सियस तापमान पर 1 दिन तक जीवित रह सकता है, परंतु आधे घंटे तक 56 डिग्री सेल्सियस के तापमान में वायरस नष्ट हो जाता है‌।

विशेषज्ञों को ज्ञात हुआ कि 70 डिग्री सेल्सियस ताप पर 5 मिनट में वायरस का लोप हो जाता है।

जापान संक्रमण रोकथाम एवं नियंत्रण संस्था की सुगावारा एरिसा कहती हैं कि गर्म किये या बिना गर्म किये भोजन के संक्रमित होने से संबंधित किसी भी मामले की पुष्टि नहीं हुई है, और पर्याप्त तापमान पर खाना पकाने में वायरस समाप्त हो जाता है।

उपरोक्त जानकारी 1 जून तक की है।

प्रश्न.34. उस समय क्या किया जाए जब मकान का किराया भरना भी मुश्किल हो?

उत्तर.34. ऐसे लोग जिनकी महामारी के कारण नौकरी चली गयी है, या जिनकी आमदनी में कटौती हुई है, वे अपने मकान का किराया भरने के लिए सहायता राशि हेतु आवेदन कर सकते हैं।

पात्रता का निर्णय पारिवारिक आय और बचत के आकलन पर आधारित होगा।

सहायता राशि किराया भरने में मदद हेतु उपलब्ध करवाई जा रही है, जिसमें गृह ऋण शामिल नहीं है।

शर्तें पूरी होने पर यह वित्तीय सहायता 3 महीने के किराये का भुगतान करती है, तथा अधिकतम 9 महीने तक इसका लाभ लिया जा सकता है। इस राशि का वापस भुगतान नहीं करना है।

आवेदन करने से पहले नगरपालिका के स्वयं सहायता केंद्र से दूरभाष पर परामर्श लेना आवश्यक है। परामर्श केवल जापानी भाषा में उपलब्ध है।

कॉल सेंटर सेवा (केवल जापानी भाषा में) प्रतिदिन सुबह 9:00 बजे से रात 9:00 बजे तक उपलब्ध है। दूरभाष क्रमांक है – 0120-23-5572

यह जानकारी 25 मई तक की है।

अधिक जानकारी के लिए कृपया निम्नलिखित वेबसाइट पर जाएँ –
*आप एनएचके वर्ल्ड-जापान की वेबसाइट से बाहर चले जाएँगे।
अंग्रेज़ी -
https://www.mhlw.go.jp/content/000630855.pdf

कोरियाई -
https://www.mhlw.go.jp/content/000630856.pdf

चीनी -
https://www.mhlw.go.jp/content/000630857.pdf

वियतनामी -
https://www.mhlw.go.jp/content/000630861.pdf

पुर्तगाली -
https://www.mhlw.go.jp/content/000630862.pdf

स्पेनी -
https://www.mhlw.go.jp/content/000633665.pdf

प्रश्न.33. जापान में कोरोनावायरस आर्थिक सहायता योजनाओं के लिए आवेदन कैसे किया जा सकता है?

उत्तर.33. जापान के प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर की समाज कल्याण परिषद् ने ऐसे परिवारों के लिए कल्याण कोष ऋण प्रणाली स्थापित की है, जो कामकाज रुक जाने की वजह से जीवनयापन हेतु संघर्ष कर रहे हैं। यह एक प्रकार की ऋण योजना है जिसका बाद में भुगतान करना आवश्यक है।

“आपातकालिक लघु राशि कोष” मूलतः उन परिवारों के लिए है, जो काम में आयी अस्थायी रुकावट के कारण आय में कमी का सामना कर रहे हैं। इस योजना के तहत 2,00,000 येन उपलब्ध होंगे।

“आम सहायता निधि” मूलतः ऐसे परिवारों के लिए है, जिनके सदस्य या तो अब बेरोज़गार हो गये हैं, या उनकी आय कम हो चुकी है। इस योजना के तहत 2 या उससे अधिक सदस्यों के परिवार के लिए अधिकतम ऋण राशि एक माह में 2,00,000 येन है। एकल सदस्य के घर के लिए अधिकतम सीमा महीने में 1,50,000 येन की है।

सैद्धांतिक तौर पर ऋण अवधि 3 महीने की है।

इसके लिए कॉल सेंटर सेवा (केवल जापानी भाषा में) प्रतिदिन सुबह 9:00 से रात 9:00 बजे तक उपलब्ध है। दूरभाष क्रमांक है - 0120-46-1999

उपरोक्त आँकड़ा 22 मई तक का है।

अधिक जानकारी के लिए कृपया नीचे दी गयी वेबसाइट देखें -

सामान्य जापानी - https://www.mhlw.go.jp/content/000621849.pdf

अंग्रेज़ी -

https://www.mhlw.go.jp/content/000621221.pdf

कोरियाई -

https://www.mhlw.go.jp/content/000621222.pdf

सरलीकृत चीनी -

https://www.mhlw.go.jp/content/000621223.pdf 

वियतनामी -

https://www.mhlw.go.jp/content/000621224.pdf

पुर्तगाली -

https://www.mhlw.go.jp/content/000621225.pdf

स्पेनी -

https://www.mhlw.go.jp/content/000621226.pdf

प्रश्न.32. पालतू पशुओं में कोरोनावायरस का संक्रमण के बारे में…?

उत्तर.32. पालतू बिल्लियों में कोरोनावायरस संक्रमण फैलने की रिपोर्ट आने के बाद लोग इस संबंध में जानकारी माँग रहे हैं। तोक्यो विश्वविद्यालय के आयुर्विज्ञान संस्थान के प्राध्यापक कावाओका योशिहिरो एवं विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय के अन्य लोगों ने तीन बिल्लियों को कोरोनावायरस से संक्रमित कर प्रत्येक को स्वस्थ बिल्ली के साथ रखा।

वैज्ञानिकों ने बताया कि बिल्लियों में वायरस के कोई लक्षण तो नजर नहीं आये, लेकिन नाक से लिये गए नमूनों की जाँच में सभी बिल्लियों में वायरस की पुष्टि हुई। तीन में से दो बिल्लियाँ लगातार 6 दिन तक कोरोनावायरस जाँच में संक्रमित मिलीं।

अनुसंधान दल का कहना है कि तीन संक्रमित बिल्लियों को 3 स्वस्थ बिल्लियों के साथ रखा गया, और 3 से 6 दिन के उपरांत कोरोनावायरस की जाँच में स्वस्थ बिल्लियाँ संक्रमित निकलीं, जो संक्रमण के फैलने को इंगित करता है।

दल का कहना है कि यह परिणाम दर्शाते हैं कि कोरोनावायरस श्वसन अंगों में बहुत ही जल्द पनप कर, बिल्लियों के बीच में आसानी से फैल सकता है।

अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि बिल्लियों में संक्रमण के लक्षण नजर नहीं आते हैं और बिना मालिक की जानकारी के वे वायरस का प्रसार भी कर सकती हैं, अतः उनका सुझाव है कि बिल्लियों के मालिकों को अपने पालतू पशुओं को घर के भीतर ही रखना चाहिए।

उपरोक्त आँकड़ा 21 मई तक का है।

प्रश्न 31. स्वाद नहीं आ रहा यह पता चलने पर क्या किया जाए?

उत्तर 31. जापान के सेंट लूक्स अंतरराष्ट्रीय अस्पताल में संक्रामक रोग विशेषज्ञ साकामोतो फ़ुमिइ नये कोरोनावायरस से संबंधित इस प्रश्न का उत्तर दे रही हैं। वह कहती हैं कि कोरोनावायरस रोगियों के करीब 30% मामलों में यह पाया गया है कि उनमें खाने की ख़ुशबू और स्वाद की पहचान करने की क्षमता खत्म हो जाती है। अगर स्वाद और घ्राण शक्ति क्षीण होने के लक्षण उभरें, तो यह संभव है कि व्यक्ति वायरस से संक्रमित हुआ है। परंतु यही लक्षण किसी अन्य संक्रामक रोग से ग्रसित होने पर भी उभर सकते हैं। अगर ये लक्षण बरकरार रहते हैं, और साथ ही बुखार और साँस लेने में तकलीफ़ होती है तो चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।

प्रश्न.30. महामारी के दौरान बच्चों का उनके मित्रों के साथ घर से बाहर समय बिताना कितना ख़तरनाक है?

उत्तर.30. जापान के सेंट लूक्स अंतरराष्ट्रीय अस्पताल में संक्रामक रोग विशेषज्ञ साकामोतो फ़ुमिइ इस प्रश्न का उत्तर दे रही हैं। लंबे समय से चल रहे राष्ट्रव्यापी विद्यालयीन अवकाश के दौरान कुछ प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों ने बच्चों के खेलने के लिए अपने खेल मैदानों को खोल दिया है। लंबे समय से घर में रहने के कारण होने वाले तनाव को कम करने के लिए बहुत से अभिभावक अपने बच्चों को उनके दोस्तों के साथ बाहर खेलने जाने की अनुमति देने के इच्छुक हैं, पर इस बात से चिंतित हैं कि बाहर जाने पर संक्रमण का ख़तरा हो सकता है।

साकामोतो कहती हैं कि अभिभावक अगर अपने बच्चे से मिलने वाले बच्चों की संख्या को यथासंभव कम रखते हुए बाहर खेलने के उनके समय में भी कटौती कर दें, तथा घर लौटने पर बच्चों के हाथ अच्छे से धुलवाने जैसे कुछ महत्त्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान देंगे तो बच्चों को बाहर खेलने देने में कोई मुख्य समस्या नहीं है।

उपरोक्त डाटा 13 मई तक का है।

प्रश्न.29. जापान सरकार ने कोरोनावायरस जाँच के मानदंडों में क्या परिवर्तन किया है और क्यों?

उत्तर.29. जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों की कोरोनावायरस जाँच किये जाने के मानदंडों में संशोधन किया है।

पुराने मानदंडों के अनुसार केवल वे लोग जिनमें 37.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक का बुखार 4 दिन से बना हुआ हो, उन्हें ही स्वास्थ्य देखभाल केंद्र जाने के लिए अनुशंसित किया गया था।

लेकिन नये मानदंड किसी विशिष्ट तापमान की अनिवार्यता नहीं रखते हैं। बल्कि नये मानदंडों के अनुसार, वे लोग जिन्हें “श्वास लेने में तकलीफ़, गंभीर थकान, या उच्च ज्वर हो” तथा जिनमें “4 दिन या उससे अधिक समय से खाँसी, बुखार या सर्दी के अन्य हल्के लक्षण हों”, उन्हें चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।

विशेषज्ञ इस बात पर चिंतित थे कि पुराने मानदंड बहुत ज्यादा कठोर थे और उनकी वजह से कम लोगों की जाँच हो पा रही थी।

स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि प्रतिदिन 17,000 से अधिक परीक्षण करने की उसकी क्षमता है। परंतु प्रतिदिन होने वाली वास्तविक जाँच संख्या लगभग 9,000 है, जो बहुत कम है।

सेन्दाइ चिकित्सा केंद्र में विषाणु अनुसंधान केंद्र के निदेशक निशिमुरा हिदेकाज़ु का कहना है कि नये मानदंड मददगार होंगे। उन्होंने कहा, “नये मानदंड चिकित्सकों को ऐसे रोगियों को नज़रअंदाज़ करने से रोकेंगे जिन्हें गंभीर निमोनिया तो नहीं है, पर उसमें परिणत हो सकता है”।

निशिमुरा ने जोड़ा, “इस बात का ख़तरा है कि मुख्यतः तोक्यो जैसे शहरी क्षेत्रों में, जहाँ संक्रमित लोगों की संख्या ज़्यादा है, वहाँ पर्याप्त जाँच नहीं हो सकेगी। परंतु इसका अर्थ यह है कि किन रोगियों को जाँच की सर्वाधिक आवश्यकता है, इसका सटीक निर्णय करना अब पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है।

उपरोक्त आँकड़ा 12 मई तक का है।

प्रश्न.28. क्या बाहर टहलने या दौड़ लगाने में ख़तरा है?

उत्तर.28. जापान के सेंट लूक्स अंतरराष्ट्रीय अस्पताल में संक्रामक रोग विशेषज्ञ साकामोतो फ़ुमिइ नये कोरोनावायरस से संबंधित इस प्रश्न का उत्तर दे रही हैं। जापान के प्रधानमंत्री आबे शिन्ज़ो ने एक समाचार सम्मेलन में आपातकाल लागू करते समय जनता से आग्रह किया था कि अनावश्यक और व्यर्थ यात्राओं से बचा जाए। आबे ने साथ ही यह भी कहा था कि टहलने जाना या बाहर दौड़ लगाने में कोई समस्या नहीं है। हालाँकि यह हमें विरोधाभासी लग सकता है लेकिन साकामोतो का कहना है कि हमें आपातकाल की घोषणा का मुख्य उद्देश्य नहीं भूलना चाहिए, जो लोगों द्वारा एक उचित सामाजिक दूरी बनाए रखना है। अगर आप किसी से बात करते हुए दौड़ रहे हैं, तो द्रव्यकण एक दूसरे तक पहुँच सकते हैं, जिन से बचना आवश्यक है। लेकिन जब कोई भी और न हो, ऐसे में अकेले बाहर दौड़ लगाने में कोई समस्या नहीं है क्योंकि संक्रमण का कोई बड़ा ख़तरा इससे उत्पन्न नहीं होता है।

प्रश्न.27. सुपर बाज़ार में खरीदारी करते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

उत्तर.27. जापान के सेंट लूक्स अंतररराष्ट्रीय अस्पताल में संक्रामक रोग विशेषज्ञ साकामोतो फ़ुमिइ नये कोरोनावायरस से संबंधित इस प्रश्न का उत्तर दे रही हैं। वह कहती हैं कि सुपर बाज़ार में प्रवेश करने से पहले हमें अपने हाथ, उंगलियों के पोर और कलाइयों को दुकान के बाहर रखे निस्संक्रामक घोल से अवश्य स्वच्छ करना चाहिए। इसके साथ ही उनका सुझाव है कि हमें यह प्रयास करना चाहिए कि हम सुपर बाज़ार उस समय जाएँ जब वहाँ पर भीड़ कम हो।

प्रश्न.25. गोल्फ़ के मैदान में क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

उत्तर.25. जापान के सेंट लूक्स अंतरराष्ट्रीय अस्पताल में संक्रामक रोग विशेषज्ञ साकामोतो फ़ुमिइ इस प्रश्न का उत्तर दे रही हैं। उनका कहना है कि कुछ लोगों को यह लग सकता है कि गोल्फ़ खेलने में संक्रमण का कोई ख़तरा नहीं है, क्योंकि यह एक मैदानी खेल है। लेकिन अगर ज़्यादा लोगों के साथ खेला जाए तो इसमें भी संक्रमण का ख़तरा काफ़ी ज़्यादा है। गोल्फ़ का मैदान अपने आप में भले ही खुला और बड़ा होता है, परंतु लॉकर रूम तथा भोजन कक्ष में बड़े समूह में जाने से ख़तरा भी बड़ा हो जाता है। इसके अतिरिक्त हमें इस बात से भी सावधान रहना चाहिए कि हम ऐसी वस्तुओं या स्थानों को छूने के पश्चात आकस्मिक रूप से अपने चेहरे को छूने से बचें, जिसे कई लोगों तथा अज्ञात लोगों द्वारा स्पर्श किया जाता हो।

प्रश्न.24. ऐसी स्थिति में क्या किया जाए जब एक साझा आवास में रहने वाले लोगों के बीच में किसी को संक्रमण हो जाए?

उत्तर.24. इस प्रश्न का उत्तर सेंट लूक्स अंतरराष्ट्रीय अस्पताल में संक्रामक रोग विशेषज्ञ साकामोतो फ़ुमिइ दे रहीं हैं। साझा आवास में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के पास निजी शयनकक्ष होता है, परंतु रसोईघर और शौचालय साझा किया जाता है। साकामोतो कहती हैं कि बार-बार छूई जाने वाली चीज़ों को रोगाणु मुक्त करना महत्त्वपूर्ण है। जैसे कि पानी के नल और बिजली के बटन। रोगाणु मुक्त करने के लिए जल मिश्रित डिटर्जेंट का अथवा अगर उपलब्ध हो तो, अल्कोहल युक्त रोगाणु नाशक का प्रयोग किया जाना चाहिए।

यह जानकारी एनएचके वर्ल्ड-जापान की वेबसाइट और एनएचके की सोशल मीडिया साइट पर भी उपलब्ध है।

प्रश्न.22. क्या निस्तारण योग्य यानि डिस्पोज़ेबल मास्क और धो कर बार-बार उपयोग किए जा सकने वाले कपड़े के मास्क प्रभावशाली हैं?

उत्तर.22. जापान के सेंट लूक्स अंतरराष्ट्रीय अस्पताल में संक्रामक रोग विशेषज्ञ साकामोतो फ़ुमि नये कोरोनावायरस संबंधी इस प्रश्न का उत्तर दे रही हैं। वह कहती हैं कि चेहरे के नकाब यानि मास्क की वायरस के विरुद्ध प्रभावशीलता जाँचने के लिए विभिन्न परीक्षण किये गए। नतीजों में सामने आया कि दोनों ही प्रकार के मास्क, खाँसते और छींकते समय निकलते द्रव्यकणों को फैलने से रोकने में कुछ हद तक प्रभावी हैं। लेकिन उन्होंने जोड़ा कि दोनों ही प्रकार के नकाब 100% प्रभावशाली नहीं हैं, तथा कुछ मात्रा में द्रव्यकणों का बाहर फैलना संभव है। अतः अगर आपको खाँसी या छींक की समस्या है तो बाहर जाने से बचना ही सुरक्षा का बेहतर विकल्प है।

प्रश्न.23. एलिवेटर यानि लिफ़्ट का उपयोग करते समय किन बातों का ध्यान रखा जाए?

उत्तर.23. जापान के सेंट लूक्स अंतररराष्ट्रीय अस्पताल में संक्रामक रोग विशेषज्ञ साकामोतो फ़ुमिइ नये कोरोनावायरस से संबंधित इस प्रश्न का उत्तर दे रही हैं। साकामोतो कहती हैं कि संक्रमण से बचने के लिए हम उन एलिवेटर या लिफ़्ट में जाने से बचें जिनमें बहुत सारे लोग हैं। साथ ही एलिवेटर का उपयोग करते समय दूसरे लोगों से बात न करें। ऐसा इसलिए क्योंकि किसी इमारत के 10वीं या 20वीं मंज़िल पर जाने के लिए हम सीढ़ियों का उपयोग नहीं कर सकते हैं। अतः इन उपायों को अपनाने पर संक्रमण का ख़तरा कम किया जा सकता है। इसके अलावा साकामोतो का कहना है कि इस बात का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है कि जिस हाथ से आपने एलिवेटर के बटन दबाएँ हैं, उससे अपने चेहरे को बिल्कुल भी न छुएँ। एलिवेटर से निकलने के बाद साबुन और पानी से जल्द से जल्द हाथ धोना आवश्यक है।

प्रश्न.21. कोरोनावायरस के ऐसे रोगियों के संदर्भ में जिनमें जाँच में वायरस संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है, पर संक्रमण के कोई भी लक्षण नजर नहीं आते हैं।

उत्तर.21. जापान में सेंट लूक्स अंतरराष्ट्रीय अस्पताल की संक्रामक रोग विशेषज्ञ साकामोतो फ़ुमि बता रही हैं कि कुछ रोगियों में बिना कोई लक्षण उत्पन्न हुए संक्रमण से उबरने की रोग प्रतिकारक क्षमता होती है। चीन के एक अनुसंधान दल ने ख़बर दी है कि सर्वेक्षण किये गए रोगियों में से आधे रोगियों में, या तो संक्रमण का कोई लक्षण उत्पन्न नहीं हुआ, या फिर बहुत ही हल्के लक्षण उभरे। लेकिन साकामोतो कहती हैं कि हमें रोगियों को कम से कम एक हफ़्ते तक निगरानी में रखना होगा क्योंकि कुछ संक्रमित रोगी धीरे-धीरे गंभीर रूप से बीमार पड़ जाते हैं।

प्रश्न.20. क्या सैनिटाइज़र की अनुपलब्धता में अधिक अल्कोहल युक्त पेय का उपयोग किया जा सकता है?

उत्तर.20. जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि कोरोनावायरस महामारी की वजह से आपूर्ति की कमी होने के कारण उच्च सांद्रता के एल्कोहलिक पेय पदार्थों के वैकल्पिक उपयोग को वह अनुमति प्रदान करेगा। यह निर्णय चिकित्सा संस्थानों तथा देखभाल केंद्रों द्वारा अल्कोहल आधारित सैनिटाइज़र प्राप्त करने के लिए संघर्षरत होने पर सरकार से अनुरोध के उत्तर में लिया गया है।

मंत्रालय ने इन प्रतिष्ठानों को अप्रैल में बताया था की मादक पदार्थ बनाने वाली कंपनियों द्वारा उच्च सांद्रता के अल्कोहल पेय पदार्थों का इस्तेमाल उचित सैनिटाइज़र की अनुपलब्धता में किया जा सकता है।

70 से 83 प्रतिशत अल्कोहल सांद्रता वाले पेय पदार्थों का इस्तेमाल इस हेतु किया जा सकता है। वोदका श्रेणी के कुछ पेय पदार्थ इस अहर्ता को पूरा करते हैं।

मंत्रालय के अधिकारियों ने यह उल्लेखित किया कि उक्त अल्कोहल सांद्रता से ऊँची सांद्रता रखने वाले मादक पदार्थों की रोगाणुनाशक क्षमता कम होती है, अतः उनका इस्तेमाल करते समय उसमें जल मिलाकर उसका उपयोग करना चाहिए।

मंत्रालय के अधिकारियों ने इस बात पर बल दिया कि यह मुख्यतः चिकित्सा संस्थानों द्वारा लिया जाने वाला एक विशेष उपाय है जो सैनिटाइज़र की अनुपलब्धता के चलते वैकल्पिक तौर पर लिया जाएगा। मंत्रालय ने कोरोनावायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जनता से घर पर सावधानीपूर्वक हाथ धोने के आग्रह को बरकरार रखा है।

उपरोक्त आँकड़े 27 अप्रैल तक के हैं।

प्रश्न.18. आपातकाल घोषित किये जाने पर हमारे जीवन में क्या अंतर पड़ते हैं?

इस प्रश्न के उत्तर का दूसरा भाग।

उत्तर.18. सर्वप्रथम, चेहरे के नकाब के संदर्भ में, जिनका जापान में मिलना लगातार कठिन होते जा रहा है –

कोरोनावायरस पर विशेष उपाय कानून के तहत, गवर्नर व्यापारियों से यह अनुरोध कर सकते हैं कि चेहरे के नकाब और अन्य आवश्यक वस्तुओं का विक्रय व्यापारियों द्वारा स्थानीय सरकारों को किया जाए। अगर व्यवसायी अनुरोध का अनुसरण करने से इनकार करते हैं तो गवर्नर उन वस्तुओं को ज़ब्त करने के लिए सक्षम हैं।

केंद्र सरकार ने चेहरे के नकाब क्रय कर होक्काइदो में लोगों तथा चिकित्सा संस्थानों में पहले ही वितरित कर दिए हैं। यह क्रय तथा वितरण वैश्विक तेल संकट से निपटने के लिए बने एक अन्य कानून, जनजीवन स्थिर करने के आपातकालीन उपाय अधिनियम 1973, के अंतर्गत किया गया है।

आपातकाल की घोषणा गवर्नरों को यह शक्ति भी देती है कि वे कुछ कानूनन बाध्यकारी कदम उठा सकें। गवर्नर अस्थाई चिकित्सा प्रतिष्ठानों के निर्माण के लिए भूमि तथा इमारतों का अधिग्रहण कर उनका उपयोग उनके मालिकों की सहमति के बिना कर सकते हैं। वे उद्योगों को चिकित्सा सामग्री आपूर्ति, खाद्य सामग्री तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं का भंडारण करने का आदेश भी दे सकते हैं।

आदेश का अनुपालन न करने की अवस्था में, या उद्योगों द्वारा वस्तुओं व उत्पादों को छुपाने या फेंकने की अवस्था में, उन्हें 6 माह कारावास या 3,00,000 येन, या करीब 2,800 डॉलर तक अर्थदंड की सज़ा हो सकती है। केवल यही दो उपाय हैं जिनका अनुपालन न करने पर दंड का प्रावधान है। जापान की आपातकाल घोषणा में कुछ ही बाध्यकारी कदम हैं, तथा यह आपातकाल विदेशों में लागू लॉकडाउन के जैसा नहीं है। परंतु आपातकाल की घोषणा से जनता तथा उद्योगों द्वारा वायरस प्रकोप को रोकने के प्रयासों में सहयोग करने की आशा है।

देश के चिकित्सा तंत्र पर पड़ने वाले प्रभाव के संदर्भ में –

चिकित्सा संस्थान उन प्रतिष्ठानों में शामिल नहीं हैं जिन्हें बंद करने का गवर्नर आग्रह कर सकते हैं। साथ ही, मूल आवश्यकताओं में से एक होने की वजह से, घर पर ही रहने के निवेदन किए जाने पर भी, चिकित्सीय प्रतिष्ठानों में जाने पर प्रतिबंध नहीं होगा। लेकिन स्थानीय सरकारें, प्रकोप के चरम पर पहुँचने के स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियाँ करेंगी, जैसे कि उन प्रतिष्ठानों को चिन्हित करना जो मुख्यतः कोरोनावायरस के रोगियों की भर्ती करेंगे और अन्य रोगियों को दूसरे प्रतिष्ठानों पर पहुँचाना। जापान का स्वास्थ्य मंत्रालय डॉक्टर से ऑनलाइन परामर्श लेने के लिए आवश्यकताओं में ढील देने की योजना भी बना रहा है। वर्तमान में, चिकित्सक से एक बार आमने-सामने मिलने के बाद ही ऑनलाइन परामर्श लेना आरंभ किया जा सकता है। परंतु मंत्रालय अब शुरू से ही से ही ऑनलाइन उपचार सुविधा की अनुमति प्रदान करेगा।

देखभाल सेवा पर पड़ने वाले प्रभाव के संदर्भ में –

आपातकाल लागू प्रिफ़ैक्चरों के गवर्नर लघु-अवधि तथा दिन में देखभाल सेवा प्रदान करने वाले सेवा केंद्रों के संचालन को कम करने और उन्हें बंद करने का आग्रह कर सकते हैं। जो स्वास्थ्य सेवा प्रदाता अपने प्रतिष्ठानों को बंद करेंगे उनसे वैकल्पिक माध्यमों द्वारा आवश्यक सेवाएँ प्रदान करने का आग्रह किया जाएगा, जिनमें कर्मियों को सेवा उपभोक्ता के घरों में भेजना शामिल है। आवासीय देखभाल प्रतिष्ठान तथा घर-पहुँच देखभाल सेवा को बंद करने का आग्रह गवर्नर नहीं कर सकते हैं। इन स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं से आग्रह किया गया है कि वह समस्त बचाव उपाय अपनाते हुए अपनी सेवाएँ जारी रखें।

बच्चों के लिए झूलाघर के संदर्भ में –

वायरस के प्रकोप को फैलने से रोकने के लिए अगर आवश्यकता पड़ती है, तो गवर्नर बाल देखभाल केंद्र अर्थात झूलाघरों का संचालन सीमित कर, उन्हें अस्थाई रूप से बंद कर सकते हैं।

गवर्नर के आग्रह के बिना भी, निर्धारित क्षेत्रों की प्रत्येक नगरपालिका इन प्रतिष्ठानों में कम बच्चे लेने की आवश्यकता पर निर्णय ले सकती हैं। घर से काम करने में सक्षम या अवकाश पर रह रहे माता-पिताओं से आग्रह किया जाएगा कि वे झूलाघरों के उपयोग से बचें। अगर कोई बच्चा या देखभाल सेवा प्रदाता संक्रमित होता है, अथवा क्षेत्र में संक्रमण के मामलों में उछाल आता है, तो नगरपालिकाओं के पास अस्थाई तौर पर झूलाघरों को बंद करने का विकल्प भी है। लेकिन स्वास्थ्य कर्मियों, तथा सामाजिक व्यवस्था बरकरार रखने के लिए आवश्यक सेवाओं को चलाने वाले कर्मियों सहित ऐसे एकल अभिभावक जो काम से छुट्टी नहीं ले सकते हैं, उनके बच्चों की देखभाल सेवा हेतु नगरपालिकाएँ वैकल्पिक तरीके ढूंढ़ेंगी।

श्रमिक मानक जाँच कार्यालय तथा रोज़गार केंद्रों के संदर्भ में –

सैद्धांतिक तौर पर, कार्मिक संबंधी मसलों का निराकरण करने वाले प्रतिष्ठान यथावत खुले रहेंगे। लेकिन रोजगार केंद्र संक्रमण की क्षेत्रवार स्थिति के आधार पर अपना संचालन कम कर सकते हैं।

जन परिवहन सेवा के संदर्भ में –

7 अप्रैल को प्रधानमंत्री आबे शिन्ज़ो द्वारा आपातकाल की घोषणा के पहले ही, परिवहन मंत्री आकाबा काज़ुयोशि ने पत्रकारों को बताया था कि अगर आपातकाल लागू भी होता है तो भी जन परिवहन तथा रसद सेवाएँ सुचारु व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक होने के कारण जारी रहेंगी।

उपरोक्त आँकड़े 8 अप्रैल तक के हैं। आपातकाल अवधि में जीवन संबद्ध प्रश्नों के उत्तर जारी रहेंगे।

प्रश्न.17. आपातकाल घोषित किये जाने पर हमारे जीवन में क्या अंतर पड़ेगा?

इस प्रश्न का उत्तर दो भागों में दिया जाएगा।

उत्तर.17. पहले, बाहर निकलने के संदर्भ में -

जिन निर्धारित प्रिफ़ैक्चरों में आपातकाल घोषित हुआ है उनके गवर्नर निवासियों से एक निश्चित अवधि के लिए यह आग्रह कर सकते हैं की अनावश्यक कार्यों के लिए निवासी घर से बाहर जाने से बचें। अस्पताल जाने, किराने की खरीदारी के लिए जाने, और कार्यालय जाने की इसमें छूट रहेगी। अनावश्यक बाहर न जाने का आग्रह, अनिवार्यतः बाध्य नहीं है, लेकिन नागरिकों से अपेक्षा की जाती है कि वह इसके अनुपालन में सहायता करेंगे और अपनी तरफ़ से इसके पालन का पूरा प्रयास करेंगे।

विद्यालयों के संदर्भ में –

गवर्नर विद्यालयों को बंद करने का आग्रह कर सकते हैं या आदेश भी दे सकते हैं। यह पिछले महीने पारित हुए विशेष कानून पर आधारित है। गवर्नरों के पास यह अधिकार है कि वह प्रिफ़ैक्चरों के उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को बंद कर सकते हैं। वह निजी विद्यालयों तथा नगरपालिकाओं के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों से भी बंद होने का आग्रह कर सकते हैं। आग्रह की अवहेलना करने पर गवर्नर विद्यालयों को बंद करने का आदेश भी जारी कर सकते हैं, परंतु कोई दंड नहीं लगा सकते हैं।

प्रतिष्ठानों और दुकानों के संदर्भ में –

कानून गवर्नरों को यह शक्ति देता है कि वह संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए प्रतिष्ठानों के उपयोग पर सीमा लगाने का आग्रह कर सकें। 1000 वर्ग मीटर से बड़े क्षेत्रफल वाले बड़े-स्तर के प्रतिष्ठानों का संचालन सीमित या प्रतिबंधित करने का भी आग्रह गवर्नर कर सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर इससे छोटे स्तर के प्रतिष्ठानों को भी समान आदेश दिए जा सकते हैं।

इस वर्ग में आने वाले प्रतिष्ठान निम्नलिखित हैं –

नाट्यशालाएँ तथा सिनेमा हॉल, आयोजन स्थल, डिपार्टमेंट स्टोर, सुपरबाज़ार, होटल और सराय, व्यायामशालाएँ तथा स्विमिंग पूल, संग्रहालय, पुस्तकालय, नाइट क्लब, वाहन चालन प्रशिक्षण विद्यालय, और कोचिंग संस्थान। सुपरबाज़ारों को दैनिक आवश्यकता की आपूर्ति करने वाले प्रखंडों का संचालन जारी रखने की अनुमति रहेगी जिसमें भोजन, दवा, और स्वच्छता उत्पाद शामिल हैं। अगर कुछ प्रतिष्ठान आग्रह का अनुपालन नहीं करते हैं तो गवर्नर अनुपालन करने का आदेश दे सकते हैं।

वह उन प्रतिष्ठानों के नाम प्रकाशित करा सकते हैं जिन्हें यह आदेश दिया गया है।

आयोजनों तथा मेलों के संदर्भ में –

नये कानून के अंतर्गत, गवर्नर आयोजकों से आग्रह कर सकते हैं कि आयोजन न किये जाएँ। अगर कोई आयोजक आग्रह का अनुपालन नहीं करता है तो गवर्नर अनुपालन करने का आदेश भी जारी कर सकते हैं। आदेश प्राप्त आयोजकों के नाम प्रिफ़ैक्चर की वेबसाइट और अन्य मीडिया पर जारी किए जा सकते हैं।

आवश्यक सेवाओं के संदर्भ में –

सरकार द्वारा आपातकाल की घोषणा से आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी। बिजली, गैस, तथा जल सेवाओं से स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी कदम उठाने का आग्रह किया गया है।

परिवहन, दूरभाष, इंटरनेट तथा डाक सेवा संचालकों से भी कार्य यथावत जारी रखने का आग्रह किया गया है।

कानून जन परिवहन पर अंकुश नहीं लगाता है। प्रधानमंत्री तथा गवर्नर न्यूनतम आवश्यकता पूर्ति हेतु परिवहन व्यवस्था को चालू रखने के लिए आवश्यक कदम उठा सकते हैं।

उपरोक्त आँकड़ा 7 अप्रैल तक का है। आपातकाल के दौरान जीवन संबंधी प्रश्न का उत्तर आगे दिया जाएगा।

प्रश्न.16. एवीगन दवा कितनी प्रभावी है?

उत्तर.16. फ़्लू रोधी दवा एवीगन, जिसे फ़ावीपिराविर के नाम से भी जाना जाता है, का विकास एक जापानी दवा कंपनी ने 6 वर्ष पूर्व किया था। प्रयोगशाला में पशुओं पर परीक्षण उपरांत इस दवा के साइड इफ़ेक्ट सामने आने के कारण, गर्भवती महिलाओं जैसे कुछ विशिष्ट वर्गों के लिए, जापान सरकार ने इस दवा के उपयोग को अनुमति नहीं दी है। अब एवीगन दवा का उपयोग नये कोरोनावायरस से संक्रमित रोगियों के केवल उन मामलों में किया जाएगा जिनकी अनुमति सरकार से प्राप्त होगी।

वर्तमान में ऐसी अन्य कोई ज्ञात दवा नहीं है जो नये कोरोनावायरस से संक्रमित मरीज़ों का उपचार प्रभावी तरीके से कर सके, परंतु एवीगन को नये कोरोनावायरस के ख़िलाफ़ प्रभावी माना जा रहा है, जो इन्फ़्लूएंज़ा वायरस के समान ही विभाजित होकर बढ़ता है। इस दवा के प्रभावों पर विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान किये जा रहे हैं।

चीन सरकार ने दो चिकित्सा संस्थानों में किये गए नैदानिक अनुसंधान के परिणाम घोषित किए हैं। इनमें से एक गुआंगदोंग प्रांत के शेनझेन शहर में किया गया था जिसमें 80 मरीज़ शामिल थे। जिन रोगियों को एवीगन दवा नहीं दी गयी उनके परिणाम कोरोनावायरस पॉज़िटिव से कोरोनावायरस नेगेटिव में परिणत होने की मध्यस्थ अवधि 11 दिन थी। जिन रोगियों को दवा दी गयी उनके परिणामों की मध्यस्थ अवधि 4 दिन थी। रोगियों के एक्स-रे परिणाम बताते हैं कि एवीगन दवा नहीं दिए जाने वाले 62% रोगियों के फेफड़ों की स्थिति में सुधार हुआ, जबकि दवा प्राप्त करने वाले 91% रोगियों की स्थिति बेहतर हुई।

चीन सरकार ने इन परिणामों के कारण घोषित किया कि एवीगन दवा नये कोरोनावायरस से संक्रमित रोगियों के उपचार के लिए उपयोग में लाई जाने वाली दवाओं में आधिकारिक रूप से शामिल की जाए।

जापान में, मार्च माह से, आइचि प्रिफ़ैक्चर के फ़ुजिता स्वास्थ्य विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में, बिना लक्षणों वाले या हल्के लक्षण वाले 80 रोगियों को लेकर नैदानिक अनुसंधान चल रहे हैं। शोधकर्ता तुलनात्मक अध्ययन कर रहे हैं कि यह दवा वायरस की मात्रा को कितना कम कर सकती है।

एवीगन का निर्माण करने वाली जापानी कंपनी ने घोषणा की है कि उसने सरकारी अनुमति प्राप्त करने के लिए नैदानिक परीक्षण आरंभ कर दिए हैं। अगर दवा की प्रभावशीलता और सुरक्षा सुनिश्चित होती है तो कंपनी सरकार से अनुमति प्राप्त करने का आवेदन देने की योजना रखती है।

उपरोक्त आँकड़ा 6 अप्रैल तक का है।

प्रश्न.15. क्या चीन के शहर वुहान में, इटली में या अन्य यूरोपीय देशों में वायरस में उत्परिवर्तन हो रहा है?

उत्तर.15. मार्च महीने की शुरुआत में एक चीनी अनुसंधान दल ने पूरे विश्व के 100 से भी ज़्यादा कोरोनावायरस रोगियों से लिये गए कोरोनावायरस के गुणसूत्रों, यानि जीन्स का विश्लेषण किया था। अनुसंधान दल ने पाया की गुणसूत्रों में मिली भिन्नता दो प्रकार के कोरोनावायरस की विशेषता थीं। एल-प्रकार का कोरोनावायरस और एस-प्रकार का कोरोनावायरस।

अनुसंधान दल को पता चला कि एस-प्रकार के कोरोनावायरस की गुणसूत्र संरचना चमगादड़ों में पाए जाने वाले कोरोनावायरस से मिलती जुलती है। दूसरी ओर, एल-प्रकार का कोरोनावायरस यूरोपीय देशों के संक्रमित रोगियों में मुख्य रूप से पाया गया, और माना जा रहा है कि यह एस-प्रकार के कोरोनावायरस की तुलना में वायरस का नया रूप है।

रित्सुमेइकान विश्वविद्यालय के आयुर्विज्ञान विभाग महाविद्यालय के प्राध्यापक इतो मासाहिरो कोरोनावायरस के गुणधर्मों का अध्ययन कर रहे हैं। वह कहते हैं कि कोरोनावायरस में बहुत ही सरलता से उत्परिवर्तन होता है, और माना जा रहा है कि बार-बार वायरस के फैलने से, और ज़्यादा लोगों के संक्रमित होने से इसके अनुवांशिक ढाँचे में और परिवर्तन आएँगे।

वायरस द्वारा और आसानी से संक्रामक होने के लिए अपने अनुवांशिक ढाँचे को परिवर्तित करने की संभावना पर प्राध्यापक इतो का कहना है कि वायरस अभी भी उस स्तर पर है जहाँ उसके अनुवांशिक ढाँचे में अधिक बदलाव नहीं आया है। भले ही एल-प्रकार और एस-प्रकार के कोरोनावायरस के गुणसूत्रों में भिन्नता हो, लेकिन अभी अपर्याप्त जानकारी के कारण यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि कौन से प्रकार से ज्यादा गंभीर लक्षण उत्पन्न होते हैं। इतो कहते हैं कि हालाँकि रोग की गंभीरता और मृत्यु दर हर देश में अलग-अलग हैं, लेकिन इस अंतर का कारण लोग खुद ही माने जा रहे हैं, जिसमें देश की बुज़ुर्ग जनसंख्या का अनुपात, संस्कृति और खाद्य शैली जैसे कारक शामिल हैं।

यह आँकड़ा 3 अप्रैल तक का है।

प्रश्न.14. क्या कोरोनावायरस संक्रमण होने पर युवा भी गंभीर रूप से बीमार होते हैं?

उत्तर.14. पहले विशेषज्ञ यह कह रहे थे कि बुज़ुर्ग और ऐसे लोग जो स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त हैं, उनमें कोरोनावायरस से संक्रमित होने पर गंभीर लक्षण विकसित हो सकते हैं। लेकिन पिछले माह मीडिया ने ख़बर दी कि ब्रिटेन में 21 वर्षीय एक युवती और फ़्राँस में एक 16 वर्षीय कन्या की संक्रमण से मृत्यु हो गयी। दोनों में ही स्वास्थ्य संबंधी कोई भी पूर्व समस्या नहीं थी। हालिया मामले यह दर्शाते हैं कि युवा भी गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं।

जापान में भी गंभीर रूप से बीमार हुए अपेक्षाकृत युवा लोगों के मामले सामने आए हैं। वैश्विक स्वास्थ्य तथा औषधि के राष्ट्रीय केंद्र के सातोशि कुत्सुना बताते हैं कि जिन 30 से ज्यादा लोगों का उन्होंने उपचार किया है उनमें से 40 की उम्र पार कर चुके एक व्यक्ति में गंभीर लक्षण विकसित हुए थे। उस व्यक्ति में स्वास्थ्य संबंधी कोई पूर्व समस्या नहीं थी।

कुत्सुना ने बताया कि उस व्यक्ति को पहले के कुछ दिनों में सिर्फ बुखार और खाँसी-जुकाम की समस्या थी, लेकिन 1 सप्ताह के बाद उसे गंभीर रूप से निमोनिया हो गया और बिगड़ती श्वास स्थिति के कारण उसे कृत्रिम श्वसन यंत्र पर रखने की आवश्यकता पड़ी। उन्होंने बताया कि बाद में वह व्यक्ति ठीक हो गया।

कुत्सुना कहते हैं कि युवाओं को ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि वह ठीक हैं क्योंकि युवा भी बहुत गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि ऐसे कई मामले हैं जिनमें 50 से कम उम्र के लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा है। अमरीकी रोग नियंत्रण तथा बचाव केंद्रों ने ख़बर दी है कि 20 से 44 आयुवर्ग के संक्रमित लोगों में से 2 से 4 प्रतिशत लोग सघन चिकित्सा कक्ष में भर्ती हैं।

यह आँकड़ा 2 अप्रैल तक का है।

प्रश्न.13. वर्ष 2003 की सार्स महामारी के दौरान ऐसे मामले भी सामने आये थे जिनके बारे में कहा गया था कि नाली में बहते गंदे पानी से भी वायरस फैल रहा है। कोरोनावायरस का नया प्रकार सार्स से मिलता-जुलता बताया जाता है। क्या कोरोनावायरस के साथ भी ऐसा ही संभव है?

उत्तर.13. नया वायरस और सार्स वायरस दोनों एक ही कोरोनावायरस परिवार से आते हैं। सार्स का कारक कोरोनावायरस केवल गले और फेफड़े ही नहीं, बल्कि आँतों में भी फैलता था। जब वर्ष 2003 में विश्व के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों में सार्स का वायरस फैलने लगा था, तब हॉन्गकॉन्ग की एक रिहायशी इमारत में सामूहिक रूप से संक्रमण फैलने की ख़बर मिली थी। ऐसा संदेह था कि सामूहिक रूप से संक्रमण का कारण एक पुराने टूटे हुए नाली के पाइप से रिसते वायरस द्रव्यकण हैं।

तोहोकु चिकित्सा तथा औषधि विश्वविद्यालय के प्राध्यापक काकु मित्सुओ संक्रमण बचाव उपायों के विशेषज्ञ हैं। वह कहते हैं कि ऐसे देश जहाँ पर स्वच्छता का स्तर अपेक्षाकृत बेहतर है, वहाँ पर नाली के पाइप से वायरस फैलने का ख़तरा कम है। लेकिन उन्होंने कहा कि यह संभव है कि वायरस शौचालय की सीट तथा आसपास की जगहों पर रह जाए जिसे छूने पर व्यक्ति संक्रमित हो सकता है। प्राध्यापक कहते हैं कि लोगों को शौच का ढक्कन बंद करके फ़्लश करना चाहिए, तथा शौचालय के इस्तेमाल के बाद अच्छे से हाथ धोना चाहिए। वह कहते हैं कि लोगों को अपने दैनिक जीवन में स्वच्छता बरकरार रखने की आदत डालनी चाहिए, जिनमें दरवाजे के हत्थे, नल और टोंटी, तथा धुलाई की जगहों को नियमित रूप से अच्छी तरह से रोगाणुमुक्त करना शामिल है।

उपरोक्त आँकड़ा 1 अप्रैल तक का है।

प्रश्न.11. क्या साबुन का रोग नाशक प्रभाव अल्कोहल के समान है?

उत्तर.11. तोक्यो स्थित सेंट लूक अंतररराष्ट्रीय अस्पताल की साकामोतो फ़ुमि संक्रमण नियंत्रण विशेषज्ञ हैं। उनका कहना है कि साबुन एक निश्चित सीमा तक प्रभावी है।

वह बताती हैं कि ऐसा इसलिए है क्योंकि साबुन में सतहाग्रही तत्व अर्थात सर्फेक्टेंट होते हैं, जो कोरोनावायरस के लिपिड आवरण को नष्ट कर देते हैं। इसका अर्थ यह है कि वायरस एक सीमा तक नष्ट किया जा सकता है।

साकामोतो कहती हैं की अल्कोहल भी प्रभावी है, किंतु अगर आपके हाथ मैले हैं, तो ऐसी स्थिति में रोगाणु नाशक का रोगाणुओं तक पहुँचना मुश्किल हो सकता है।

अतः साकामोतो लोगों से आग्रह कर रही हैं कि लोग साबुन से अपने हाथ नियमित रूप से धोएँ।

प्रश्न.10. संक्रमण खत्म होने की घोषणा किन परिस्थितियों पर पहुँचने के बाद की जा सकती है?

उत्तर.10. जापान सामुदायिक स्वास्थ्य देखभाल संगठन के अध्यक्ष तथा नये कोरोनावायरस पर सरकार की विशेषज्ञ समिति के उप प्रमुख ओमि शिगेरु संक्रामक रोगों के ख़िलाफ़ उपायों की विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुहिम का नेतृत्व कर चुके हैं। उनका कहना है कि संक्रमण की समाप्ति का अर्थ है कि संक्रमण शृंखला रुक चुकी है और अब कोई भी व्यक्ति संक्रमित नहीं है।

स्वास्थ्य अधिकारी संक्रमण समाप्ति की घोषणा तब कर सकते हैं जब विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार एक निश्चित समयावधि में किसी भी नये संक्रमण की पुष्टि न हुई हो।

उदाहरण के तौर पर, वर्ष 2003 में सार्स महामारी मुख्य रूप से चीन और अन्य एशियाई देशों में फैली थी। पहले रोगी की पुष्टि होने के 8 महीनों पश्चात विश्व स्वास्थ्य संगठन ने महामारी की समाप्ति की घोषणा की थी।

पर दूसरी ओर, लोगों से घर से बाहर जाने से बचने का आग्रह करने जैसे कुछ कदमों को उठाते हुए, किसी विशिष्ट क्षेत्र या देश में एक निश्चित समयावधि के लिए संक्रमण के फैलाव पर नियंत्रण किया जा सकता है।

लेकिन बाहरी इलाकों से वायरस के वापस क्षेत्र में आने पर संक्रमण फिर से फैल सकता है। जैसे कि मौसमी फ़्लू शीत ऋतु में फैलता है और फिर अस्थायी तौर पर उसका प्रकोप रुक जाता है, लेकिन इसकी समाप्ति होना बाकी है।

दवा और टीके संक्रमण को फैलने और गंभीर रूप लेने से रोकने में कारगर हैं, परंतु ओमि कहते हैं कि टीके तथा दवाओं की उपलब्धता, और संक्रमण की समाप्ति होना, दो अलग-अलग मुद्दे हैं।

ओमि का कहना है कि संक्रमण की पूर्ण समाप्ति के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु स्वास्थ्य अधिकारी वायरस के फैलाव को रोकने के प्रयास तत्परता से करते रहेंगे।

उपरोक्त आँकड़े 27 मार्च तक के हैं।

प्रश्न. 8. क्या जापान को कोरोनावायरस से होने वाले संक्रमण को रोकने की या उसके उपचार की प्रभावी पद्धति मिल गई है?

उत्तर.8. दुर्भाग्य वश, अब तक ऐसी कोई दवा नहीं है जो कोरोनावायरस के खिलाफ स्पष्ट तौर पर प्रभावी सिद्ध हुई हो, जैसे कि इन्फ़्लूएंज़ा के उपचार के लिए प्रयुक्त होने वाली टेमीफ़्लू और ज़ोफ़्लूज़ा। दूसरे देशों की तरह ही जापान में भी चिकित्सक लक्षणों के उपचार पर ध्यान दे रहे हैं, जैसे कि रोगियों को ऑक्सीजन सहायता पर रखना और पानी की कमी होने पर आई.वी. ड्रिप चढ़ाना।

हालाँकि, वायरस लक्षित किसी प्रभावी दवा का विकास होना अभी बाकी है, लेकिन जापान तथा विश्व भर के चिकित्सक उन उपलब्ध दवाओं का प्रयोग कर रहे हैं जिनसे अन्य लक्षण ठीक होते हैं, क्योंकि यह दवाएँ कोरोनावायरस पर भी काम कर सकती हैं।

ऐसी ही एक दवा है एविगन। यह फ़्लू रोधी दवा है, जिसे 6 वर्ष पहले एक जापानी दवा कंपनी ने बनाया था। चीन के अधिकारियों का कहना है कि यह दवा कोरोनावायरस के रोगियों के उपचार में प्रभावी रही है।

जापान के वैश्विक स्वास्थ्य तथा औषधि राष्ट्रीय केंद्र ने बताया कि कोरोनावायरस के एक मरीज़ को एक एंटीवायरल दवा दी गयी थी जिसका उपयोग एड्स के लक्षण उभरने से रोकने में होता है। अधिकारियों के अनुसार रोगी के बुखार में कमी आयी तथा थकान और साँस फूलने की समस्या में राहत मिली।

विभिन्न देशों में प्रभावी चिकित्सा की खोज जारी है। अमरीकी रोग नियंत्रण तथा बचाव केंद्रों के शोधकर्ताओं समेत एक समूह ने ख़बर दी है कि कोरोनावायरस के कारण एक व्यक्ति को निमोनिया हो जाने पर उसे एक ऐसी एंटीवायरल दवा दी गयी जिसका विकास इबोला के उपचार के लिए किया जा रहा है। शोधकर्ताओं ने कहा कि उस व्यक्ति के लक्षणों में सुधार आना अगले ही दिन से शुरू हो गया। उसका बुखार भी उतर गया और उसे ऑक्सीजन सहायता की भी आवश्यकता नहीं रही। थाइलैंड के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि फ़्लू और एड्स की दवा के एक मिश्रण से एक रोगी की हालत में सुधार हुआ और वह बाद में कोरोनावायरस संक्रमण से मुक्त हो गया।

परंतु, सारे मामलों में, विशेषज्ञों का कहना है कि दवाओं का सुरक्षित और प्रभावी होना सुनिश्चित करने के लिए और अधिक नैदानिक अध्ययनों की आवश्यकता है।

यह आँकड़ा 25 मार्च तक का है।

प्रश्न.7. क्या संक्रमण होने पर बच्चों में गंभीर लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं?

उत्तर.7. चीन के रोग नियंत्रण व बचाव केंद्र के विशेषज्ञ दल द्वारा 11 फ़रवरी तक चीन में संक्रमित 44,672 लोगों के विश्लेषण में यह पाया गया कि 9 वर्ष या उससे कम उम्र के किसी भी बच्चे की संक्रमण से मृत्यु नहीं हुई। किशोरावस्था के संक्रमित लोगों में सिर्फ एक रोगी की मृत्यु की ख़बर है।

वुहान विश्वविद्यालय तथा अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं के एक समूह ने बताया कि 6 फ़रवरी तक 1 से 11 महीने की उम्र के 9 शिशुओं में कोरोनावायरस संक्रमण की पुष्टि हुई थी। उनमें से कोई भी गंभीर रूप से बीमार नहीं हुआ।

आइचि चिकित्सा विश्वविद्यालय के प्राध्यापक त्सुनेओ मोरिशिमा शिशु-संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ हैं। मोरिशिमा ने कहा कि नया वायरस मौजूदा कोरोनावायरस के प्रकारों से कुछ हद तक मिलता-जुलता है, और बच्चों को आमतौर पर सर्दी-ज़ुकाम हो जाने के कारण उनमें नये कोरोनावायरस के प्रति भी एक सीमा तक प्रतिरोधक क्षमता हो सकती है।

हालाँकि प्राध्यापक ने जोड़ा कि हमें सावधान रहना चाहिए क्योंकि यह संक्रमण विद्यालयों तथा बाल-मंदिरों में तेज़ी से फैल सकता है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चे अपने हाथ अच्छे से धोएँ तथा उनके कक्ष पर्याप्त हवादार हों।

उपरोक्त आँकड़ा 24 मार्च तक का है।

प्रश्न.6. संक्रमित होने पर गंभीर लक्षण उत्पन्न होने की संभावना किसमें है?

उत्तर.6. विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि वायरस संक्रमण के कारण जिनकी मृत्यु हुई है उनमें से बहुत से लोग ऐसे थे जिनकी उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय की समस्याओं की वजह से कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता थी।

कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता के लोगों को निश्चित तौर पर विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है, न केवल नये कोरोनावायरस के लिए बल्कि मौसमी फ़्लू जैसे आम संक्रमणों के प्रति भी।

इनमें ऐसे लोग शामिल हैं जिन्हें उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय विकार हैं, तथा वे जो गठिया जैसे रोगों के लिए प्रतिरक्षा-दमनकारी दवा ले रहे हैं, एवं बुज़ुर्ग लोग।

विशेषज्ञ अब तक यह पता नहीं लगा सके हैं कि संक्रमण लक्षणों की गंभीरता का रोगियों की दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्या की गंभीरता से क्या संबंध है।

गर्भवती महिलाओं के संबंध में ऐसे कोई आँकड़े उपलब्ध नहीं है जो यह इंगित करते हों कि गर्भवती महिलाओं को कोरोनावायरस संक्रमण का अधिक ख़तरा है। लेकिन आम तौर पर गर्भवती महिलाएँ अगर निमोनिया की चपेट में आती हैं तो गंभीर रूप से बीमार हो सकती हैं।

कोरोनावायरस शिशुओं में कैसे लक्षण उत्पन्न करता है इसका भी कोई आँकड़ा उपलब्ध नहीं है। लेकिन क्योंकि शिशु हाथ धोने और भीड़ वाले स्थानों से बचने का निर्णय स्वयं नहीं ले सकते हैं, अतः उनके पालकों से आग्रह किया जाता है कि वे अपने बच्चों की सुरक्षा करने के हर संभव उपाय अपनाएँ।

प्रश्न.5. संक्रिमत होने पर कौन से लक्षण उत्पन्न होते हैं?

उत्तर.5. इस संबंध में विश्व स्वास्थ्य संगठन व अन्य विशेषज्ञों के एक संयुक्त दल ने रिपोर्ट प्रकाशित की है। 20 फ़रवरी तक चीन में संक्रमित 55,924 लोगों के लक्षणों का दल ने विस्तृत विश्लेषण किया था।

रिपोर्ट के अनुसार 87.9 प्रतिशत रोगियों में बुखार देखा गया था, 67.7 प्रतिशत में खाँसी, 38.1 प्रतिशत रोगियों ने थकान की शिकायत की थी और 33.4 प्रतिशत को बलगम थी। अन्य लक्षणों में साँस-फूलना, गले में ख़राश व सर दर्द जैसे लक्षण शामिल थे।

संक्रमित लोगों में संक्रमण के औसतन 5 से 6 दिनों के भीतर लक्षण उत्पन्न हुए।

लगभग 80 प्रतिशत संक्रमित लोगों में हल्के लक्षण देखे गए थे। कुछ को निमोनिया नहीं हुआ। संक्रमित हुए सभी लोगों में से 13.8 प्रतिशत गंभीर रूप से बीमार हुए व उन्हें साँस लेने में तकलीफ़ थी।

60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुज़ुर्ग जिन्हें उच्च रक्तचाप, मधुमेह, दीर्घ कालिक श्वसन रोग, हृदय रोग व कर्क रोग की समस्या है उनमें लक्षणों के गंभीर या घातक होने की अधिक संभावना है। बच्चों में संक्रमण या गंभीर रूप से बीमार होने के कुछ ही मामले देखे गए। कुल संक्रमित लोगों में 18 वर्षीय या उससे कम उम्र के केवल 2.4 प्रतिशत लोग थे।

यह आँकड़ा 19 मार्च तक का है।

प्रश्न.4. हम अपने कपड़ों को रोगाणुमुक्त कैसे करें?

उत्तर.4. हमने पता किया कि क्या कपड़े धोने से वायरस निकल जाएगा या हमें अल्कोहल-युक्त रोगाणुनाशक का उपयोग कपड़ों पर करना होगा।

जापान संक्रमण बचाव व नियंत्रण संस्था की एरिसा सुगावारा कहती हैं कि कपड़ों पर अल्कोहल-युक्त रोगाणुनाशक का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने समझाया कि अधिकतर वायरस कपड़े धोने की आम प्रक्रिया में धुल जाते हैं परंतु नये कोरोनावायरस के संबंध में अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है।

जिन वस्तुओं के संक्रमित होने का अधिक ख़तरा हो सकता है, जैसे कि रुमाल जिसका उपयोग खाँसते या छींकते समय मुँह ढकने के लिए किया गया हो, उन्हें आप 15 से 20 मिनट तक उबलते पानी में भिगो कर रख सकते हैं।

प्रश्न.3. गर्भवती महिलाओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

उत्तर.3. कोरोनावायरस प्रकोप के मद्देनज़र प्रसूता एवं स्त्री रोग में संक्रामक रोगों के लिए जापान की संस्था ने गर्भवती महिलाओं और गर्भाधान की इच्छुक महिलाओं को सलाह देता एक दस्तावेज़ जारी किया है।

संस्था का कहना है कि अब तक कोरोनावायरस के कारण गर्भवती महिलाओं में गंभीर लक्षणों या गर्भस्थ शिशु को वायरस द्वारा अपेक्षाकृत अधिक नुकसान पहुँचने की अब तक कोई सूचना नहीं है।

लेकिन संस्था ने चेताया कि आम तौर पर गर्भवती महिलाएँ अगर निमोनिया की चपेट में आती हैं तो गंभीर रूप से बीमार हो सकती हैं।

संस्था गर्भवती महिलाओं को सलाह देती है कि बहते पानी और साबुन से अच्छे से हाथ धोंए, विशेषतः भोजन से पहले और बाहर से आने के बाद, तथा अल्कोहल-युक्त रोगाणुनाशक का प्रयोग करें।

इनके अलावा अनुशंसित बचाव उपायों में बुखार और खाँसी-ज़ुकाम वाले लोगों के संपर्क में आने से बचना, रक्षात्मक नक़ाब पहनना, तथा हाथ से अपनी नाक और मुँह छूने से बचना शामिल हैं।

निहोन विश्वविद्यालय के आयुर्विज्ञान विभाग के प्राध्यापक सातोशि हायाकावा ने यह दिशानिर्देश बनाये हैं। उनका कहना है कि गर्भवती महिलाओं की चिंता को वह समझते हैं। लेकिन उनका आग्रह है कि महिलाओं को विश्वस्त और सटीक जानकारी पर ही अमल करना चाहिए क्योंकि संक्रामक रोग के प्रकोप के दौरान हर प्रकार की ग़लत जानकारी प्रसारित होती हैं।

प्रश्न.2. मनुष्यों में संक्रमण कैसे होता है? संक्रमित होने से बचने के लिए हम क्या करें?

उत्तर.2. विशेषज्ञों का मानना है कि नये कोरोनावायरस का संक्रमण द्रव्यकणों या संक्रमित सतहों के माध्यम से होता है, जैसे की आम ज़ुकाम और मौसमी फ़्लू में होता है। इसका अर्थ यह है कि वायरस का संक्रमण द्रव्यकणों के माध्यम से तब फैलता है जब कोई संक्रमित व्यक्ति खाँसता या छींकता है। दरवाज़ों के संक्रमित हत्थों या रेलगाड़ियों में पकड़ने वाली छड़ों और पट्टों से भी लोगों में संक्रमण फैल सकता है तब जब उन्होंने जिस हाथ से संक्रमित छड़ या पट्टा पकड़ा हो, अगर उससे ही अपने मुँह या नाक को छुएँ। माना जा रहा है कि कोरोनावायरस की संक्रामकता मौसमी फ़्लू के समान ही है।

कोरोनावायरस संक्रमण से बचने के मूलभूत उपाय भी मौसमी फ़्लू के बचाव उपायों के समान हैं – जैसे – हाथ धोना और ज़ुकाम होने पर सामान्य सभ्यता का पालन करना।

हाथ धोते समय, सभी से यह आग्रह है कि साबुन का उपयोग करें तथा कलाई तक हाथ के हर हिस्से को बहते पानी में कम से कम 20 सेकंड तक धोएँ। अथवा अल्कोहल-आधारित हस्त प्रक्षालक यानि हाथ के सैनिटाइज़र का प्रयोग भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ज़ुकाम की सामान्य सभ्यता संक्रमण फैलने से रोकने में महत्त्वपूर्ण है। लोगों से अपेक्षा की जाती है और उनके लिए यह सलाह है कि खाँसते-छींकते समय वे टिशु पेपर या बाँह से अपनी नाक और मुँह ढाँकें ताकि अन्य लोगों को तक संक्रामक छींटे या द्रव्यकण न जाएँ। अन्य प्रभावी उपायों में भीड़ वाली जगहों पर जाने से बचना और घर पर रहते समय कमरे में हवा की आवाजाही बनाए रखने हेतु खिड़िकियाँ या रोशनदान खुले रखना शामिल है।

जापान में प्रत्येक रेल कंपनी को निर्णय लेना है कि वे भरे हुए रेल डिब्बों की खिड़कियाँ खोलेंगे या नहीं। विशेषज्ञों के अनुसार रेल के डिब्बे एक सीमा तक पहले से ही हवादार होते हैं क्योंकि यात्रियों के उतरने के लिए बार-बार स्टेशनों पर उनके दरवाज़े खुलते हैं।

प्रश्न.1. कोरोनावायरस क्या है?

उत्तर.1. कोरोनावायरस एक ऐसा वायरस है जो मनुष्यों और पशुओं को संक्रमित करता है। सामान्यतः यह लोगों से लोगों में फैलता है और उनमें आम ज़ुकाम जैसे रोग के लक्षण उत्पन्न करता है – मसलन – खाँसी, बुखार, और नाक बहना। इस वायरस के कुछ विशेष प्रकार निमोनिया या अन्य गंभीर समस्याओं को भी उत्पन्न कर सकते हैं, जैसे कि वह किस्म जिससे मिडल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम, यानि मर्स, का प्रकोप हुआ था, जिसका पहला मामला वर्ष 2012 में सउदी अरब में मिला था।

एक वैश्विक महामारी के रूप में जो कोरोनावायरस पूरी दुनिया को चपेट में ले रहा है, यह एक नये प्रकार का कोरोनावायरस है। इससे संक्रमित लोगों में बुखार, थकान, बलगम बनना, साँस लेने में तकलीफ़, गले में ख़राश और सिर दर्द के लक्षण उत्पन्न होते हैं। लगभग 80 प्रतिशत रोगी हल्के लक्षणों के बाद ठीक हो जाते हैं। क़रीब 20 प्रतिशत लोगों में निमोनिया या शरीर के कई अंग ख़राब होने जैसे गंभीर लक्षण उत्पन्न होते हैं। 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग जो उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कर्क रोग, श्वसन या हृदय की समस्याओं से ग्रस्त हैं उनमें इस संक्रमण से गंभीर लक्षण उत्पन्न होने या फिर मृत्यु होने का ख़तरा है। बच्चों में संक्रमण के कुछ ही मामले सामने आये हैं और उनमें भी संक्रमण के लक्षण अपेक्षाकृत हल्के रहे हैं।
TOP