सोउल घोषणा-पत्र के साथ पी4जी पर्यावरण शिखर सम्मेलन सम्पन्न

दक्षिण कोरिया की मेज़बानी में आयोजित एक ऑनलाइन सम्मेलन में वैश्विक नेताओं ने जलवायु परिवर्तन को एक तात्कालिक ख़तरा बताते हुए अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने का आह्वान किया है।

हरित विकास एवं वैश्विक लक्ष्य हेतु साझेदारी 2030 यानि पी4जी नामक यह दो दिवसीय सम्मेलन सोमवार को सम्पन्न हुआ। खाद्य, जल और ऊर्जा जैसे विषयों पर चर्चा करने के लिए 60 से अधिक देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने इस सम्मेलन में भाग लिया।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मुन जे-इन ने सम्मेलन के अंतिम दिन एक बहस में कहा कि जलवायु परिवर्तन की कोई सीमा नहीं है। मुन ने विकसित और विकासशील देशों की विभिन्न परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उनके बीच एकजुटता की आवश्यकता पर बल दिया।

शिखर सम्मेलन के अंत में अपनाये गए सोउल घोषणा-पत्र में जलवायु संकट को "एक तात्कालिक वैश्विक ख़तरे" की संज्ञा दी गयी, जो अर्थव्यवस्था, समाज और सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।

घोषणा-पत्र में, ऊर्जा उत्पादन में सौर और पवन जैसे अक्षय ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मज़बूत करने का संकल्प व्यक्त किया गया है।

इसमें कोरोनावायरस वैश्विक महामारी के बाद अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण के लिए "हरित बहाली," या पर्यावरण प्रौद्योगिकी में निवेश के महत्त्व पर भी ज़ोर दिया गया है।

वर्ष 2018 में कोपेनहेगन के बाद पी4जी अपनी तरह का दूसरा शिखर सम्मेलन है।