महामारी के बीच जापानी पाठकों के बीच लोकप्रिय होते मार्क्स

जापान में इन दिनों कार्ल मार्क्स की “कैपिटल” से सम्बन्धित किताबों की अच्छी बिक्री हो रही है। प्रकाशकों का कहना है कि कोरोनावायरस महामारी के बीच, लोग संभवतः आर्थिक विषमता और पर्यावरण विनाश जैसे सामाजिक मुद्दों के प्रति अधिक सजग हो रहे हैं।

जर्मनी के दर्शनशास्त्री और अर्थशास्त्री कार्ल मार्क्स ने सन् 1867 में “दास कैपिटल” किताब प्रकाशित की थी। उसमें पूँजीवाद की व्यवस्था का अध्ययन करते हुए उससे जुड़ी समस्याओं का विश्लेषण किया गया है। वैश्विक आर्थिक व्यवस्थाओं के विकास पर उसका बहुत अधिक प्रभाव रहा है।

हाल के महीनों में जापान में “कैपिटल” से सम्बन्धित किताबें लोकप्रिय हुई हैं। इनमें से एक किताब ओसाका सिटी विश्वविद्यालय के सह-प्राध्यापक साइतो कोहेइ ने पिछले सितम्बर प्रकाशित की थी।

इस पुस्तक में तर्क दिया गया है कि पर्यावरण पर दबाव डाल कर आर्थिक वृद्धि का अनुसरण करने वाले पूँजीवाद के लिए वैश्विक ताप वृद्धि या आर्थिक विषमता जैसे मुद्दे हल करना कठिन होगा। इस पुस्तक की 3,00,000 प्रतियाँ बिक चुकी हैं।

“कैपिटल” पर टीका-टिप्पणियों और आधुनिक समाज की श्रम व्यवस्थाओं पर विश्लेषणात्मक विवरण सहित अन्य सम्बन्धित पुस्तकें भी पाठकों को आकर्षित कर रही हैं।

तोक्यो स्थित एक प्रमुख पुस्तक विक्रेता के कर्मचारी ने बताया कि पहले से अधिक लोग विषमता और पर्यावरण अवनति को निकटस्थ समस्या मानते हुए विचार कर रहे हैं कि वर्तमान सामाजिक व्यवस्थाएँ ये समस्याएँ हल कर पायेंगी या नहीं।