म्यांमार वार्ता में आसियान दूत की मध्यस्थता

म्यांमार में फ़रवरी में हुए सैन्य तख़्तापलट के बाद उत्पन्न संकट के शांतिपूर्ण हल के लिए दक्षिणपूर्व एशियाई राष्ट्र संगठन यानि आसियान समूह के नेताओं ने एक विशेष दूत को म्यांमार भेजने पर सहमति जतायी है।

आसियान नेताओं ने शनिवार को जकार्ता में एक बैठक की। तख़्तापलट का नेतृत्व करने वाले म्यांमार सेना के वरिष्ठ जनरल मिन आँग लाइंग ने भी इस बैठक में भाग लिया।

आसियान के वर्तमान अध्यक्ष द्वारा जारी एक वक्तव्य में नेताओं ने म्यांमार की स्थिति पर गंभार चिंता प्रकट की है। वक्तव्य में शांतिपूर्ण समाधान के लिए नेताओं द्वारा सहमत पाँच बिंदु शामिल हैं।

उनमें तुरंत हिंसा रोकने तथा सभी पक्षों से आत्म-संयम बरतने का आग्रह करना, वार्ता सुगम बनाने के लिए आसियान अध्यक्ष देश का एक दूत वहाँ भेजना तथा दूत का म्यांमार में सभी पक्षों से मुलाक़ात करना शामिल है।

इन पाँच बिंदुओं में म्यांमार की लोकतंत्र समर्थक नेता आँग सान सू ची तथा अन्य राजनैतिक नेताओं की रिहाई का कोई ज़िक्र नहीं है।

सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूँग ने बताया कि मिन आँग लाइंग ने बैठक में कहा कि वह आसियान प्रतिनिधि दल के दौरे या मानवीय सहायता के विरुद्ध नहीं हैं।

आसियान इस संकट का हल निकालने के लिए पहल करना चाहता है लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है उसे म्यांमार की सेना से सहयोग मिलना कठिन होगा।

म्यांमार में लोकतंत्र समर्थक बलों द्वार स्थापित राष्ट्रीय एकता सरकार के प्रवक्ता, डॉक्टर सासा ने एक वक्तव्य जारी किया है।

वक्तव्य में कहा गया है, "हम आसियान से उसके निर्णयों पर ठोस क़दम उठाने और हमारे लोगों तथा क्षेत्र में लोकतंत्र और स्वतंत्रता की बहाली की आशा करते हैं।"