यूरोपीय संघ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भागीदारी करेगा मज़बूत

यूरोपीय संघ यानि ईयू के सदस्य देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्पष्ट रूप से चीन के बढ़ते प्रभाव के मद्देनज़र अपने सामरिक पक्ष, उपस्थिति और गतिविधियों को मज़बूत करने पर सहमति व्यक्त की है।

यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों द्वारा सोमवार को अंगीकृत दस्तावेज़ में कहा गया है, “हिंद-प्रशांत क्षेत्र की वर्तमान परिस्थितियों ने कड़ी भू-राजनैतिक प्रतिस्पर्धा को जन्म दिया है” जिसके परिणामस्वरूप व्यापार और सुरक्षा पर बढ़ते तनाव को बल मिला है। इसमें “मानवाधिकार उल्लंघनों” की बात भी कही गयी है।

दस्तावेज़ में कहा गया है कि ये घटनाक्रम क्षेत्रीय स्थिरता के लिए ख़तरा हैं और यूरोपीय संघ के हितों को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं।

इसमें चीन का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन क्षेत्र में बढ़ते उसके प्रभाव का स्पष्ट तौर पर संकेत दिया गया है।

दस्तावेज़ में कहा गया है कि ईयू साझा हितों वाले मुद्दों पर जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे समान विचारधारा वाले साझेदारों के साथ सहयोग मज़बूत करेगा।

यूरोपीय संघ आयोग और ईयू के विदेश नीति प्रमुख, जोसेप बोरेल को सितंबर तक विस्तृत हिंद-प्रशांत रणनीति तैयार करने के लिए कहा गया है।

हॉन्ग-कॉन्ग और शिन्च्याँग उइघुर स्वायत्त क्षेत्र में चीन के मानवाधिकार उल्लंघनों और दक्षिण चीन सागर में उसकी गतिविधियों के प्रति ईयू सावधान है।

परंतु ईयू और चीन, आर्थिक संबंधों को मज़बूत करने के लिए एक निवेश समझौता संपन्न करने पर मोटे तौर पर सहमत हो गये हैं। ईयू के सदस्य देश चीन से निपटने के तरीकों पर भी एकमत नहीं हैं।