व्यंजन चखने के कार्यक्रम में परोसी गयी जापानी ईल मछली

जापान की मत्स्य एजेंसी ने अंडों से पैदा जापानी ईल मछली का स्वाद चखने का दुर्लभ अवसर प्रदान किया है।

जापानी ईल को लुप्तप्राय प्रजाति घोषित किया गया है क्योंकि इसकी आबादी तेज़ी से घटी है। इसका संरक्षण एक मुद्दा बन गया है।

ईल के संरक्षण के प्रयास में जापान सरकार के एक शोध संस्थान ने 14 वर्ष पहले दुनिया में पहली बार ईल मछली पालन का पूर्ण चक्र सफलतापूर्वक पूरा किया था।

संस्थान के शोधकर्ताओं ने अंडों को कृत्रिम रूप से सेते हुए ईल के बच्चों को बड़ा किया और बाद में इन्हीं के अंडों से एक बार फिर ईल के बच्चे पैदा किये गए।

इस नयी विधि से पाली गयी ग्लास ईल मछलियों से भरा पानी का टैंक दिखाते हुए शोधकर्ताओं ने अपने हालिया अध्ययन के नतीजों के बारे में बताया।

प्राकृतिक माहौल में ग्लास ईल से पैदा मछलियों और प्रयोगशाला में अंडों से पैदा मछलियों को भून कर कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को परोसा गया। इनमें कृषि, वानिकी और मत्स्य मंत्री साकामोतो तेत्सुशि भी शामिल रहे।

साकामोतो ने कहा कि अंडों से तैयार ईल मछली का गोश्त, प्राकृतिक माहौल में पली ईल मछली जितना ही मुलायम और ज़ायकेदार है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर ईल मछली महँगी होती है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि मछली पालन की इस नयी विधि से इसके दाम कम किये जा सकेंगे।