जापान के सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व सुजनन कानून को बताया असंवैधानिक

जापान के सर्वोच्च न्यायालय ने देश के पूर्व सुजनन संरक्षण कानून को पहली बार असंवैधानिक कहा है। इस कानून के तहत विकलांग लोगों की प्रजनन क्षमता खत्म करने के लिए उनकी जबरन नसबंदी करवायी जाती थी।

जबरन नसबंदी के पीड़ितों ने पूरे जापान में मुकदमे दायर किये थे, जिसमें तर्क दिया गया था कि भेदभावपूर्ण व्यवहार असंवैधानिक था और उन्होंने सरकारी मुआवज़े की माँग की थी।

बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय की ग्रैंड बेंच ने साप्पोरो, सेंदाइ, तोक्यो और ओसाका के उच्च न्यायालयों के पाँच फैसलों पर अपना निर्णय दिया।

पीठासीन न्यायाधीश तोकुरा साबुरो ने निरस्त कानून को असंवैधानिक घोषित कर दिया तथा चार मामलों में मुआवज़ा देने का आदेश दिया।

सेंदाइ का मामला, जिसमें उच्च न्यायालय ने वादी के दावे को खारिज कर दिया था, उसे वापस निचली अदालत को भेज दिया गया।

सुजनन संरक्षण कानून 48 वर्षों तक प्रभावी रहा, जिसे 1996 में समाप्त कर दिया गया।

इस कानून ने डॉक्टरों को मानसिक या बौद्धिक रूप अक्षम लोगों की प्रजनन क्षमता खत्म करने की अनुमति दे रखी थी।

सरकार ने तर्क दिया था कि ऑपरेशन के बाद लम्बा समय बीत जाने के कारण मुआवज़ा देने की उसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं है।