सुरक्षा परिषद् के सदस्यों ने मानवाधिकार मुद्दे पर की उ.कोरिया की आलोचना

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के सदस्यों ने उत्तर कोरिया में मानवाधिकार उल्लंघन की निंदा की है, लेकिन रूस का दावा है कि इसके लिए अमरीका और उसके सहयोगी ज़िम्मेदार हैं।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् ने जापान, अमरीका और दक्षिण कोरिया सहित सदस्य देशों के अनुरोध पर बुधवार को उत्तर कोरियाई मानवाधिकारों पर एक खुली बैठक आयोजित की।

संयुक्त राष्ट्र में दक्षिण कोरिया के राजदूत ह्वांग जून-कूक, जो इस महीने परिषद् के अध्यक्ष हैं, ने उत्तर कोरिया पर "परमाणु हथियारों के विकास में लिप्त होकर अपने भौतिक और मानव संसाधनों को बर्बाद करने" का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया "अपने लोगों की आजीविका की परवाह किये बिना" ऐसा कर रहा है।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष उत्तर कोरिया के मिसाइल विकास और परीक्षणों की कुल लागत उसकी पूरी आबादी के लिए एक वर्ष के भोजन की लागत से भी अधिक थी।

जापान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत यामाज़ाकि काज़ुयुकि ने उत्तर कोरिया द्वारा जापानी नागरिकों के अपहरण का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा, "इस स्थिति की गंभीरता से इन्कार नहीं किया जा सकता। मैं अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सभी अपहृत लोगों की तत्काल वापसी सुनिश्चित करने के लिए एकजुट होकर प्रयास करने का आह्वान करता हूँ।"

बैठक से पहले, कुल 57 देशों और यूरोपीय संघ ने संयुक्त वक्तव्य जारी कर उत्तर कोरिया के मानवाधिकार उल्लंघन की आलोचना की।

इस बीच, संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत वासीली नेबेंज़िया ने अपना दावा दुहराया कि संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों ने उत्तर कोरिया में मानवाधिकार स्थिति को और ख़राब कर दिया है। रूस, प्योंगयांग के साथ संबंध मज़बूत कर रहा है।