नाटो सदस्यता के बाद स्वीडन का बाल्टिक सागर में पहला सैन्याभ्यास

स्वीडन ने पिछले महीने नाटो में शामिल होने के बाद बाल्टिक सागर के सामरिक रूप से महत्त्वपूर्ण क्षेत्र में अपना पहला सैन्यभ्यास किया है।स्वीडन, उक्रेन पर जारी रूसी आक्रमण के मद्देनज़र अपनी सुरक्षा कड़ी कर रहा है।

यह अभ्यास गोटलैंड द्वीप पर आयोजित किया गया तथा सोमवार को इसका प्रदर्शन मीडिया के समक्ष किया गया।

60,000 से ज़्यादा की आबादी वाला यह द्वीप बाल्टिक सागर के बीच में स्थित है और सामरिक रूप से महत्त्वपूर्ण माना जाता है। 19वीं सदी की शुरुआत में इस पर रूसी साम्राज्य ने कब्ज़ा जमा लिया था।

यह द्वीप नाटो के लिए भी सामरिक रूप से महत्त्वपूर्ण है, जो तीन निकटवर्ती बाल्टिक देशों, एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया की रक्षा करना चाहता है। ये तीनों देश नाटो गठबंधन के सदस्य हैं, और वे रूस के प्रति सतर्कता बढ़ा रहे हैं।

इस अभ्यास का आयोजन, इस परिदृश्य के आधार पर किया गया था कि द्वीप पर रूसी सैनिक उतर चुके हैं। अभ्यास में स्वीडन के लगभग 200 सैनिकों ने भाग लिया। इस युद्धाभ्यास और गोलाबारी अभ्यास में शामिल टैंक, उक्रेन को दिये गए टैंकों के समान थे।

अभ्यास की कमान संभालने वाले लेफ़्टिनेंट कर्नल एंड्रियास लुंड ने कहा कि उनका मानना ​​है कि गोटलैंड पर ख़तरे का स्वरूप "बहुआयामी" है। उन्होंने कहा कि द्वीप के खिलाफ़ संभावित सैन्य अभियान ऐसा स्वरूप धारण कर सकता है, जिनके बारे में उनका पक्ष नहीं जानता।