सर्वेक्षण - दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन बना पसंदीदा महाशक्ति

सिंगापुर स्थित एक विचार मंच के सर्वेक्षण के अनुसार दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में अधिकांश लोगों ने अमरीका की अपेक्षा चीन को महाशक्ति के रूप में चयनित किया।

ऐसा पहली बार है जब सर्वेक्षण में चीन ने अमरीका को पीछे छोड़ दिया है।

यूसुफ़ इशाक संस्थान ने मंगलवार को अपने सर्वेक्षण के नतीजे जारी किये। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन, आसियान के 10 सदस्य देशों से लगभग 2,000 शोधकर्ताओं, सरकारी अधिकारियों और अन्य लोगों ने इसमें हिस्सा लिया।

उनसे पूछा गया कि यदि क्षेत्र को चीन और अमरीका के बीच किसी एक राष्ट्र के साथ गठबंधन करने के लिए बाध्य किया जाये तो वे दोनों में से किसे चुनेंगे। इस पर 49.5 प्रतिशत लोगों ने अमरीका को चुना, जबकि 50.5 प्रतिशत लोगों ने चीन को चुना।

पिछले वर्ष की तुलना में, चीन को चुनने वाले उत्तरदाताओं में 11.6 प्रतिशत अंकों की वृद्धि हुई।

मलेशिया, इंडोनेशिया और लाओस में चीन को प्राथमिकता देने वालों की संख्या में 20 अंकों से ज़्यादा की बढ़ोतरी देखी गयी। मलेशिया में 75.1 प्रतिशत के साथ चीन को चुनने वाले लोगों का अनुपात सर्वाधिक था। उसके बाद इंडोनेशिया में 73.2 प्रतिशत और लाओस में 70.6 प्रतिशत रहा।

विचार मंच ने कहा कि इन देशों को "चीन की बेल्ट एंड रोड पहल और मज़बूत व्यापार तथा निवेश संबंधों से काफ़ी फ़ायदा हुआ है।"

लेकिन सर्वेक्षण से यह भी पता चला कि फिलीपींस, वियतनाम और सिंगापुर में अमरीका को पसंद करने वालों का प्रतिशत अब भी अधिक है, जो दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ क्षेत्रीय विवादों को दर्शाता है।

इस बीच, जापान सबसे विश्वसनीय प्रमुख शक्ति बना रहा। 58.9 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने जापान में विश्वास व्यक्त किया, जो अमरीका, चीन, भारत और यूरोपीय संघ से अधिक है।