ईयू के किसान उक्रेन से आयात को लेकर क्षुब्ध

यूरोपीय संघ यानि ईयू की कृषि नीतियों के प्रति हताशा बढ़ने के कारण यूरोपीय किसानों का विरोध बढ़ता जा रहा है। उनके ग़ुस्से के पीछे की एक वजह रूस से लड़ रहे उक्रेन के लिए ईयू का समर्थन है।

ईयू ने युद्धग्रस्त उक्रेन के समर्थन के लिए उसके कृषि उत्पादों पर शुल्क लगाना बंद कर दिया है। अपेक्षाकृत सस्ते कृषि आयात के कारण कई यूरोपीय किसानों को व्यवसाय में बने रहने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

उत्तरी फ़्राँस में एक मुर्गीपालन केंद्र प्रति दिन लगभग 10,000 अंडे बेचता है। लेकिन केंद्र के मालिक ओलिवियर सेनेचल का कहना है कि उनके व्यवसाय को अब भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

युद्ध शुरू होने के बाद से बिजली की क़ीमतें लगभग 50 प्रतिशत बढ़ गयी हैं, और अनाज की बढ़ती क़ीमतों ने मुर्गियों के चारे की लागत 30 प्रतिशत तक बढ़ा दी है।

सेनेचल का कहना है कि उनकी आय आधी हो गयी है। उन्होंने बताया कि उक्रेनी अंडों के आयात पर ईयू की शुल्क-मुक्त नीति अनुचित है क्योंकि इससे उनके उत्पादों को नुक़सान होता है। उनका कहना है कि किसान उक्रेन का समर्थन करने के ख़िलाफ़ नहीं हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें बहुत भारी क़ीमत चुकानी पड़ रही है। उन्होंने जोड़ा कि उनकी आजीविका ख़तरे में पड़ गयी है।

यूरोपीय किसानों की मदद के लिए ईयू पर दबाव बढ़ रहा है और वह उक्रेन से चीनी, अंडे और पोल्ट्री का आयात एक निश्चित स्तर से अधिक होने पर उस पर शुल्क बहाल करने की योजना बना रहा है। लेकिन प्रमुख कृषि संगठनों का कहना है कि ये उपाय पर्याप्त नहीं हैं।

वे बताते हैं कि इन उपायों में गेहूँ जैसी वस्तुएँ शामिल नहीं हैं तथा किसानों की अन्य चिंताओं पर भी ग़ौर नहीं किया गया है। संगठनों का कहना है कि वे विरोध जारी रखेंगे।