बिकिनी एटॉल पर परमाणु परीक्षण के 70 वर्ष

तोक्यो में शनिवार को एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने परमाणु विस्फोटों, परीक्षणों और दुर्घटनाओं से होने वाले नुक़सान पर चर्चा की। ग़ौरतलब है कि अमरीका ने 70 वर्ष पहले प्रशांत महासागर स्थित बिकिनी एटॉल द्वीप पर हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया था।

अमरीका ने 1954 में मार्शल द्वीपसमूह के एटॉल द्वीप पर यह परीक्षण किया था। उस समय टूना मछली पकड़ने गयी जापानी नौका, दाइगो फ़ुकुर्यू मारु के चालक दल के 23 सदस्य और अन्य लोग इस परीक्षण से उत्पन्न विकिरण की चपेट में आ गये थे।

अणु बमों की विभीषिका झेल चुके लोगों और विशेषज्ञों ने शनिवार को हुई संगोष्ठी में प्रस्तुतियाँ दीं। इस संगोष्ठी का आयोजन, जापान के एक निजी संगठन, न्यूक्लियर-फ़्री वर्ल्ड फ़ाउंडेशन ने किया।

मेइसेइ विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर ताकेमिने सेइइचिरो, मार्शल द्वीपसमूह पर अनुसंधान करते हैं। अपने व्याख्यान में उन्होंने कहा कि परमाणु परीक्षण न केवल मनुष्यों पर बल्कि आसपास के क्षेत्रों पर भी बुरा असर डालते हैं। ताकेमिने ने यह भी कहा कि परमाणु परीक्षणों से सभ्यता भी लुप्त हो जाती है।