हॉन्ग-कॉन्ग में प्रभावी हुआ नया सुरक्षा क़ानून

हॉन्ग-कॉन्ग में शनिवार को नया सुरक्षा क़ानून प्रभावी हो गया, जिसके साथ ही लोगों की आज़ादी पर और अधिक अंकुश लगने की चिंता बढ़ती जा रही है।

यह क़ानून जासूसी, बाहरी हस्तक्षेप, विद्रोह भड़काने के कृत्यों और गोपनीय जानकारी की चोरी पर रोक लगाता है। इस क़ानून का उल्लंघन करने वालों को आजीवन कारावास की सज़ा हो सकती है।

लेकिन आलोचकों के अनुसार इस क़ानून की परिभाषाएँ समग्र और अस्पष्ट हैं, इसलिए उन्हें चिंता है कि कारोबारी गतिविधियों और मीडिया रिपोर्टिंग को नियंत्रित करने के लिए इस क़ानून का इस्तेमाल मनमाने ढंग से किया जा सकता है।

इस नये क़ानून में सोशल मीडिया और प्रकाशन के भौतिक माध्यमों सहित विभिन्न मंचों पर चीन तथा हॉन्ग-कॉन्ग की सरकार के विरुद्ध उपद्रव भड़काने पर भी रोक लगायी गई है।

हॉन्ग-कॉन्ग की विधान परिषद् ने मंगलवार को इस क़ानून से संबद्ध विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया था, जिसके 3 दिन बाद मुख्य कार्यकारी जॉन ली ने हस्ताक्षर कर इसे क़ानून का रूप दे दिया। ग़ौरतलब है कि इस परिषद् में अधिकांश सदस्य चीन समर्थक हैं।

हॉन्ग-कॉन्ग के अधिकारियों ने 2020 में समूचे क्षेत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून लागू किया था, जिसके बाद अब यह नया क़ानून लाया गया है।