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कोरोनावायरस प्रश्नोत्तरी

एनएचके के विशेषज्ञ नये कोरोनावायरस के संबंध में श्रोताओं से मिले प्रश्नों के उत्तर देंगे।

प्रश्न.1. कोरोनावायरस क्या है?
प्रश्न.2. मनुष्यों में संक्रमण कैसे होता है? संक्रमित होने से बचने के लिए हम क्या करें? 
प्रश्न.3. गर्भवती महिलाओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
प्रश्न.4. हम अपने कपड़ों को रोगाणुमुक्त कैसे करें?
प्रश्न.5. संक्रिमत होने पर कौन से लक्षण उत्पन्न होते हैं?
प्रश्न.6. संक्रमित होने पर गंभीर लक्षण उत्पन्न होने की संभावना किसमें है?
प्रश्न.7. क्या संक्रमण होने पर बच्चों में गंभीर लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं?
प्रश्न. 8. क्या जापान को कोरोनावायरस से होने वाले संक्रमण को रोकने की या उसके उपचार की प्रभावी पद्धति मिल गई है?
प्रश्न.10. संक्रमण खत्म होने की घोषणा किन परिस्थितियों पर पहुँचने के बाद की जा सकती है?
प्रश्न.11. क्या साबुन का रोग नाशक प्रभाव अल्कोहल के समान है?
प्रश्न.13. वर्ष 2003 की सार्स महामारी के दौरान ऐसे मामले भी सामने आये थे जिनके बारे में कहा गया था कि नाली में बहते गंदे पानी से भी वायरस फैल रहा है। कोरोनावायरस का नया प्रकार सार्स से मिलता-जुलता बताया जाता है। क्या कोरोनावायरस के साथ भी ऐसा ही संभव है?
प्रश्न.14. क्या कोरोनावायरस संक्रमण होने पर युवा भी गंभीर रूप से बीमार होते हैं?
प्रश्न.15. क्या चीन के शहर वुहान में, इटली में या अन्य यूरोपीय देशों में वायरस में उत्परिवर्तन हो रहा है?
प्रश्न.16. एवीगन दवा कितनी प्रभावी है?

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प्रश्न.1. कोरोनावायरस क्या है?

उत्तर.1. कोरोनावायरस एक ऐसा वायरस है जो मनुष्यों और पशुओं को संक्रमित करता है। सामान्यतः यह लोगों से लोगों में फैलता है और उनमें आम ज़ुकाम जैसे रोग के लक्षण उत्पन्न करता है – मसलन – खाँसी, बुखार, और नाक बहना। इस वायरस के कुछ विशेष प्रकार निमोनिया या अन्य गंभीर समस्याओं को भी उत्पन्न कर सकते हैं, जैसे कि वह किस्म जिससे मिडल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम, यानि मर्स, का प्रकोप हुआ था, जिसका पहला मामला वर्ष 2012 में सउदी अरब में मिला था। 

एक वैश्विक महामारी के रूप में जो कोरोनावायरस पूरी दुनिया को चपेट में ले रहा है, यह एक नये प्रकार का कोरोनावायरस है। इससे संक्रमित लोगों में बुखार, थकान, बलगम बनना, साँस लेने में तकलीफ़, गले में ख़राश और सिर दर्द के लक्षण उत्पन्न होते हैं। लगभग 80 प्रतिशत रोगी हल्के लक्षणों के बाद ठीक हो जाते हैं। क़रीब 20 प्रतिशत लोगों में निमोनिया या शरीर के कई अंग ख़राब होने जैसे गंभीर लक्षण उत्पन्न होते हैं। 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग जो उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कर्क रोग, श्वसन या हृदय की समस्याओं से ग्रस्त हैं उनमें इस संक्रमण से गंभीर लक्षण उत्पन्न होने या फिर मृत्यु होने का ख़तरा है। बच्चों में संक्रमण के कुछ ही मामले सामने आये हैं और उनमें भी संक्रमण के लक्षण अपेक्षाकृत हल्के रहे हैं।





प्रश्न.2. मनुष्यों में संक्रमण कैसे होता है? संक्रमित होने से बचने के लिए हम क्या करें? 

उत्तर.2. विशेषज्ञों का मानना है कि नये कोरोनावायरस का संक्रमण द्रव्यकणों या संक्रमित सतहों के माध्यम से होता है, जैसे की आम ज़ुकाम और मौसमी फ़्लू में होता है। इसका अर्थ यह है कि वायरस का संक्रमण द्रव्यकणों के माध्यम से तब फैलता है जब कोई संक्रमित व्यक्ति खाँसता या छींकता है। दरवाज़ों के संक्रमित हत्थों या रेलगाड़ियों में पकड़ने वाली छड़ों और पट्टों से भी लोगों में संक्रमण फैल सकता है तब जब उन्होंने जिस हाथ से संक्रमित छड़ या पट्टा पकड़ा हो, अगर उससे ही अपने मुँह या नाक को छुएँ। माना जा रहा है कि कोरोनावायरस की संक्रामकता मौसमी फ़्लू के समान ही है।

कोरोनावायरस संक्रमण से बचने के मूलभूत उपाय भी मौसमी फ़्लू के बचाव उपायों के समान हैं – जैसे – हाथ धोना और ज़ुकाम होने पर सामान्य सभ्यता का पालन करना।

हाथ धोते समय, सभी से यह आग्रह है कि साबुन का उपयोग करें तथा कलाई तक हाथ के हर हिस्से को बहते पानी में कम से कम 20 सेकंड तक धोएँ। अथवा अल्कोहल-आधारित हस्त प्रक्षालक यानि हाथ के सैनिटाइज़र का प्रयोग भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ज़ुकाम की सामान्य सभ्यता संक्रमण फैलने से रोकने में महत्त्वपूर्ण है। लोगों से अपेक्षा की जाती है और उनके लिए यह सलाह है कि खाँसते-छींकते समय वे टिशु पेपर या बाँह से अपनी नाक और मुँह ढाँकें ताकि अन्य लोगों को तक संक्रामक छींटे या द्रव्यकण न जाएँ। अन्य प्रभावी उपायों में भीड़ वाली जगहों पर जाने से बचना और घर पर रहते समय कमरे में हवा की आवाजाही बनाए रखने हेतु खिड़िकियाँ या रोशनदान खुले रखना शामिल है।

जापान में प्रत्येक रेल कंपनी को निर्णय लेना है कि वे भरे हुए रेल डिब्बों की खिड़कियाँ खोलेंगे या नहीं। विशेषज्ञों के अनुसार रेल के डिब्बे एक सीमा तक पहले से ही हवादार होते हैं क्योंकि यात्रियों के उतरने के लिए बार-बार स्टेशनों पर उनके दरवाज़े खुलते हैं।





प्रश्न.3. गर्भवती महिलाओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

उत्तर.3. कोरोनावायरस प्रकोप के मद्देनज़र प्रसूता एवं स्त्री रोग में संक्रामक रोगों के लिए जापान की संस्था ने गर्भवती महिलाओं और गर्भाधान की इच्छुक महिलाओं को सलाह देता एक दस्तावेज़ जारी किया है।

संस्था का कहना है कि अब तक कोरोनावायरस के कारण गर्भवती महिलाओं में गंभीर लक्षणों या गर्भस्थ शिशु को वायरस द्वारा अपेक्षाकृत अधिक नुकसान पहुँचने की अब तक कोई सूचना नहीं है।

लेकिन संस्था ने चेताया कि आम तौर पर गर्भवती महिलाएँ अगर निमोनिया की चपेट में आती हैं तो गंभीर रूप से बीमार हो सकती हैं।

संस्था गर्भवती महिलाओं को सलाह देती है कि बहते पानी और साबुन से अच्छे से हाथ धोंए, विशेषतः भोजन से पहले और बाहर से आने के बाद, तथा अल्कोहल-युक्त रोगाणुनाशक का प्रयोग करें।

इनके अलावा अनुशंसित बचाव उपायों में बुखार और खाँसी-ज़ुकाम वाले लोगों के संपर्क में आने से बचना, रक्षात्मक नक़ाब पहनना, तथा हाथ से अपनी नाक और मुँह छूने से बचना शामिल हैं।

निहोन विश्वविद्यालय के आयुर्विज्ञान विभाग के प्राध्यापक सातोशि हायाकावा ने यह दिशानिर्देश बनाये हैं। उनका कहना है कि गर्भवती महिलाओं की चिंता को वह समझते हैं। लेकिन उनका आग्रह है कि महिलाओं को विश्वस्त और सटीक जानकारी पर ही अमल करना चाहिए क्योंकि संक्रामक रोग के प्रकोप के दौरान हर प्रकार की ग़लत जानकारी प्रसारित होती हैं।





प्रश्न.4. हम अपने कपड़ों को रोगाणुमुक्त कैसे करें?

उत्तर.4. हमने पता किया कि क्या कपड़े धोने से वायरस निकल जाएगा या हमें अल्कोहल-युक्त रोगाणुनाशक का उपयोग कपड़ों पर करना होगा।

जापान संक्रमण बचाव व नियंत्रण संस्था की एरिसा सुगावारा कहती हैं कि कपड़ों पर अल्कोहल-युक्त रोगाणुनाशक का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने समझाया कि अधिकतर वायरस कपड़े धोने की आम प्रक्रिया में धुल जाते हैं परंतु नये कोरोनावायरस के संबंध में अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है।

जिन वस्तुओं के संक्रमित होने का अधिक ख़तरा हो सकता है, जैसे कि रुमाल जिसका उपयोग खाँसते या छींकते समय मुँह ढकने के लिए किया गया हो, उन्हें आप 15 से 20 मिनट तक उबलते पानी में भिगो कर रख सकते हैं।





प्रश्न.5. संक्रिमत होने पर कौन से लक्षण उत्पन्न होते हैं?

उत्तर.5. इस संबंध में विश्व स्वास्थ्य संगठन व अन्य विशेषज्ञों के एक संयुक्त दल ने रिपोर्ट प्रकाशित की है। 20 फ़रवरी तक चीन में संक्रमित 55,924 लोगों के लक्षणों का दल ने विस्तृत विश्लेषण किया था।

रिपोर्ट के अनुसार 87.9 प्रतिशत रोगियों में बुखार देखा गया था, 67.7 प्रतिशत में खाँसी, 38.1 प्रतिशत रोगियों ने थकान की शिकायत की थी और 33.4 प्रतिशत को बलगम थी। अन्य लक्षणों में साँस-फूलना, गले में ख़राश व सर दर्द जैसे लक्षण शामिल थे।

संक्रमित लोगों में संक्रमण के औसतन 5 से 6 दिनों के भीतर लक्षण उत्पन्न हुए।

लगभग 80 प्रतिशत संक्रमित लोगों में हल्के लक्षण देखे गए थे। कुछ को निमोनिया नहीं हुआ। संक्रमित हुए सभी लोगों में से 13.8 प्रतिशत गंभीर रूप से बीमार हुए व उन्हें साँस लेने में तकलीफ़ थी।

60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुज़ुर्ग जिन्हें उच्च रक्तचाप, मधुमेह, दीर्घ कालिक श्वसन रोग, हृदय रोग व कर्क रोग की समस्या है उनमें लक्षणों के गंभीर या घातक होने की अधिक संभावना है। बच्चों में संक्रमण या गंभीर रूप से बीमार होने के कुछ ही मामले देखे गए। कुल संक्रमित लोगों में 18 वर्षीय या उससे कम उम्र के केवल 2.4 प्रतिशत लोग थे।

यह आँकड़ा 19 मार्च तक का है।





प्रश्न.6. संक्रमित होने पर गंभीर लक्षण उत्पन्न होने की संभावना किसमें है?

उत्तर.6. विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि वायरस संक्रमण के कारण जिनकी मृत्यु हुई है उनमें से बहुत से लोग ऐसे थे जिनकी उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय की समस्याओं की वजह से कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता थी।

कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता के लोगों को निश्चित तौर पर विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है, न केवल नये कोरोनावायरस के लिए बल्कि मौसमी फ़्लू जैसे आम संक्रमणों के प्रति भी।

इनमें ऐसे लोग शामिल हैं जिन्हें उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय विकार हैं, तथा वे जो गठिया जैसे रोगों के लिए प्रतिरक्षा-दमनकारी दवा ले रहे हैं, एवं बुज़ुर्ग लोग।

विशेषज्ञ अब तक यह पता नहीं लगा सके हैं कि संक्रमण लक्षणों की गंभीरता का रोगियों की दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्या की गंभीरता से क्या संबंध है।

गर्भवती महिलाओं के संबंध में ऐसे कोई आँकड़े उपलब्ध नहीं है जो यह इंगित करते हों कि गर्भवती महिलाओं को कोरोनावायरस संक्रमण का अधिक ख़तरा है। लेकिन आम तौर पर गर्भवती महिलाएँ अगर निमोनिया की चपेट में आती हैं तो गंभीर रूप से बीमार हो सकती हैं।

कोरोनावायरस शिशुओं में कैसे लक्षण उत्पन्न करता है इसका भी कोई आँकड़ा उपलब्ध नहीं है। लेकिन क्योंकि शिशु हाथ धोने और भीड़ वाले स्थानों से बचने का निर्णय स्वयं नहीं ले सकते हैं, अतः उनके पालकों से आग्रह किया जाता है कि वे अपने बच्चों की सुरक्षा करने के हर संभव उपाय अपनाएँ।





प्रश्न.7. क्या संक्रमण होने पर बच्चों में गंभीर लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं?

उत्तर.7. चीन के रोग नियंत्रण व बचाव केंद्र के विशेषज्ञ दल द्वारा 11 फ़रवरी तक चीन में संक्रमित 44,672 लोगों के विश्लेषण में यह पाया गया कि 9 वर्ष या उससे कम उम्र के किसी भी बच्चे की संक्रमण से मृत्यु नहीं हुई। किशोरावस्था के संक्रमित लोगों में सिर्फ एक रोगी की मृत्यु की ख़बर है।

वुहान विश्वविद्यालय तथा अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं के एक समूह ने बताया कि 6 फ़रवरी तक 1 से 11 महीने की उम्र के 9 शिशुओं में कोरोनावायरस संक्रमण की पुष्टि हुई थी। उनमें से कोई भी गंभीर रूप से बीमार नहीं हुआ।

आइचि चिकित्सा विश्वविद्यालय के प्राध्यापक त्सुनेओ मोरिशिमा शिशु-संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ हैं। मोरिशिमा ने कहा कि नया वायरस मौजूदा कोरोनावायरस के प्रकारों से कुछ हद तक मिलता-जुलता है, और बच्चों को आमतौर पर सर्दी-ज़ुकाम हो जाने के कारण उनमें नये कोरोनावायरस के प्रति भी एक सीमा तक प्रतिरोधक क्षमता हो सकती है।

हालाँकि प्राध्यापक ने जोड़ा कि हमें सावधान रहना चाहिए क्योंकि यह संक्रमण विद्यालयों तथा बाल-मंदिरों में तेज़ी से फैल सकता है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चे अपने हाथ अच्छे से धोएँ तथा उनके कक्ष पर्याप्त हवादार हों।

उपरोक्त आँकड़ा 24 मार्च तक का है।





प्रश्न. 8. क्या जापान को कोरोनावायरस से होने वाले संक्रमण को रोकने की या उसके उपचार की प्रभावी पद्धति मिल गई है?

उत्तर.8. दुर्भाग्य वश, अब तक ऐसी कोई दवा नहीं है जो कोरोनावायरस के खिलाफ स्पष्ट तौर पर प्रभावी सिद्ध हुई हो, जैसे कि इन्फ़्लूएंज़ा के उपचार के लिए प्रयुक्त होने वाली टेमीफ़्लू और ज़ोफ़्लूज़ा। दूसरे देशों की तरह ही जापान में भी चिकित्सक लक्षणों के उपचार पर ध्यान दे रहे हैं, जैसे कि रोगियों को ऑक्सीजन सहायता पर रखना और पानी की कमी होने पर आई.वी. ड्रिप चढ़ाना।

हालाँकि, वायरस लक्षित किसी प्रभावी दवा का विकास होना अभी बाकी है, लेकिन जापान तथा विश्व भर के चिकित्सक उन उपलब्ध दवाओं का प्रयोग कर रहे हैं जिनसे अन्य लक्षण ठीक होते हैं, क्योंकि यह दवाएँ कोरोनावायरस पर भी काम कर सकती हैं।

ऐसी ही एक दवा है एविगन। यह फ़्लू रोधी दवा है, जिसे 6 वर्ष पहले एक जापानी दवा कंपनी ने बनाया था। चीन के अधिकारियों का कहना है कि यह दवा कोरोनावायरस के रोगियों के उपचार में प्रभावी रही है।

जापान के वैश्विक स्वास्थ्य तथा औषधि राष्ट्रीय केंद्र ने बताया कि कोरोनावायरस के एक मरीज़ को एक एंटीवायरल दवा दी गयी थी जिसका उपयोग एड्स के लक्षण उभरने से रोकने में होता है। अधिकारियों के अनुसार रोगी के बुखार में कमी आयी तथा थकान और साँस फूलने की समस्या में राहत मिली।

विभिन्न देशों में प्रभावी चिकित्सा की खोज जारी है। अमरीकी रोग नियंत्रण तथा बचाव केंद्रों के शोधकर्ताओं समेत एक समूह ने ख़बर दी है कि कोरोनावायरस के कारण एक व्यक्ति को निमोनिया हो जाने पर उसे एक ऐसी एंटीवायरल दवा दी गयी जिसका विकास इबोला के उपचार के लिए किया जा रहा है। शोधकर्ताओं ने कहा कि उस व्यक्ति के लक्षणों में सुधार आना अगले ही दिन से शुरू हो गया। उसका बुखार भी उतर गया और उसे ऑक्सीजन सहायता की भी आवश्यकता नहीं रही। थाइलैंड के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि फ़्लू और एड्स की दवा के एक मिश्रण से एक रोगी की हालत में सुधार हुआ और वह बाद में कोरोनावायरस संक्रमण से मुक्त हो गया।

परंतु, सारे मामलों में, विशेषज्ञों का कहना है कि दवाओं का सुरक्षित और प्रभावी होना सुनिश्चित करने के लिए और अधिक नैदानिक अध्ययनों की आवश्यकता है।

यह आँकड़ा 25 मार्च तक का है।




प्रश्न.10. संक्रमण खत्म होने की घोषणा किन परिस्थितियों पर पहुँचने के बाद की जा सकती है?

उत्तर.10. जापान सामुदायिक स्वास्थ्य देखभाल संगठन के अध्यक्ष तथा नये कोरोनावायरस पर सरकार की विशेषज्ञ समिति के उप प्रमुख ओमि शिगेरु संक्रामक रोगों के ख़िलाफ़ उपायों की विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुहिम का नेतृत्व कर चुके हैं। उनका कहना है कि संक्रमण की समाप्ति का अर्थ है कि संक्रमण शृंखला रुक चुकी है और अब कोई भी व्यक्ति संक्रमित नहीं है।

स्वास्थ्य अधिकारी संक्रमण समाप्ति की घोषणा तब कर सकते हैं जब विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार एक निश्चित समयावधि में किसी भी नये संक्रमण की पुष्टि न हुई हो।

उदाहरण के तौर पर, वर्ष 2003 में सार्स महामारी मुख्य रूप से चीन और अन्य एशियाई देशों में फैली थी। पहले रोगी की पुष्टि होने के 8 महीनों पश्चात विश्व स्वास्थ्य संगठन ने महामारी की समाप्ति की घोषणा की थी।

पर दूसरी ओर, लोगों से घर से बाहर जाने से बचने का आग्रह करने जैसे कुछ कदमों को उठाते हुए, किसी विशिष्ट क्षेत्र या देश में एक निश्चित समयावधि के लिए संक्रमण के फैलाव पर नियंत्रण किया जा सकता है।

लेकिन बाहरी इलाकों से वायरस के वापस क्षेत्र में आने पर संक्रमण फिर से फैल सकता है। जैसे कि मौसमी फ़्लू शीत ऋतु में फैलता है और फिर अस्थायी तौर पर उसका प्रकोप रुक जाता है, लेकिन इसकी समाप्ति होना बाकी है।

दवा और टीके संक्रमण को फैलने और गंभीर रूप लेने से रोकने में कारगर हैं, परंतु ओमि कहते हैं कि टीके तथा दवाओं की उपलब्धता, और संक्रमण की समाप्ति होना, दो अलग-अलग मुद्दे हैं।

ओमि का कहना है कि संक्रमण की पूर्ण समाप्ति के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु स्वास्थ्य अधिकारी वायरस के फैलाव को रोकने के प्रयास तत्परता से करते रहेंगे।

उपरोक्त आँकड़े 27 मार्च तक के हैं।





प्रश्न.11. क्या साबुन का रोग नाशक प्रभाव अल्कोहल के समान है?

उत्तर.11. तोक्यो स्थित सेंट लूक अंतररराष्ट्रीय अस्पताल की साकामोतो फ़ुमि संक्रमण नियंत्रण विशेषज्ञ हैं। उनका कहना है कि साबुन एक निश्चित सीमा तक प्रभावी है।

वह बताती हैं कि ऐसा इसलिए है क्योंकि साबुन में सतहाग्रही तत्व अर्थात सर्फेक्टेंट होते हैं, जो कोरोनावायरस के लिपिड आवरण को नष्ट कर देते हैं। इसका अर्थ यह है कि वायरस एक सीमा तक नष्ट किया जा सकता है।

साकामोतो कहती हैं की अल्कोहल भी प्रभावी है, किंतु अगर आपके हाथ मैले हैं, तो ऐसी स्थिति में रोगाणु नाशक का रोगाणुओं तक पहुँचना मुश्किल हो सकता है।

अतः साकामोतो लोगों से आग्रह कर रही हैं कि लोग साबुन से अपने हाथ नियमित रूप से धोएँ।




प्रश्न.13. वर्ष 2003 की सार्स महामारी के दौरान ऐसे मामले भी सामने आये थे जिनके बारे में कहा गया था कि नाली में बहते गंदे पानी से भी वायरस फैल रहा है। कोरोनावायरस का नया प्रकार सार्स से मिलता-जुलता बताया जाता है। क्या कोरोनावायरस के साथ भी ऐसा ही संभव है?

उत्तर.13. नया वायरस और सार्स वायरस दोनों एक ही कोरोनावायरस परिवार से आते हैं। सार्स का कारक कोरोनावायरस केवल गले और फेफड़े ही नहीं, बल्कि आँतों में भी फैलता था। जब वर्ष 2003 में विश्व के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों में सार्स का वायरस फैलने लगा था, तब हॉन्गकॉन्ग की एक रिहायशी इमारत में सामूहिक रूप से संक्रमण फैलने की ख़बर मिली थी। ऐसा संदेह था कि सामूहिक रूप से संक्रमण का कारण एक पुराने टूटे हुए नाली के पाइप से रिसते वायरस द्रव्यकण हैं।

तोहोकु चिकित्सा तथा औषधि विश्वविद्यालय के प्राध्यापक काकु मित्सुओ संक्रमण बचाव उपायों के विशेषज्ञ हैं। वह कहते हैं कि ऐसे देश जहाँ पर स्वच्छता का स्तर अपेक्षाकृत बेहतर है, वहाँ पर नाली के पाइप से वायरस फैलने का ख़तरा कम है। लेकिन उन्होंने कहा कि यह संभव है कि वायरस शौचालय की सीट तथा आसपास की जगहों पर रह जाए जिसे छूने पर व्यक्ति संक्रमित हो सकता है। प्राध्यापक कहते हैं कि लोगों को शौच का ढक्कन बंद करके फ़्लश करना चाहिए, तथा शौचालय के इस्तेमाल के बाद अच्छे से हाथ धोना चाहिए। वह कहते हैं कि लोगों को अपने दैनिक जीवन में स्वच्छता बरकरार रखने की आदत डालनी चाहिए, जिनमें दरवाजे के हत्थे, नल और टोंटी, तथा धुलाई की जगहों को नियमित रूप से अच्छी तरह से रोगाणुमुक्त करना शामिल है।

उपरोक्त आँकड़ा 1 अप्रैल तक का है।





प्रश्न.14. क्या कोरोनावायरस संक्रमण होने पर युवा भी गंभीर रूप से बीमार होते हैं?

उत्तर.14. पहले विशेषज्ञ यह कह रहे थे कि बुज़ुर्ग और ऐसे लोग जो स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त हैं, उनमें कोरोनावायरस से संक्रमित होने पर गंभीर लक्षण विकसित हो सकते हैं। लेकिन पिछले माह मीडिया ने ख़बर दी कि ब्रिटेन में 21 वर्षीय एक युवती और फ़्राँस में एक 16 वर्षीय कन्या की संक्रमण से मृत्यु हो गयी। दोनों में ही स्वास्थ्य संबंधी कोई भी पूर्व समस्या नहीं थी। हालिया मामले यह दर्शाते हैं कि युवा भी गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं।

जापान में भी गंभीर रूप से बीमार हुए अपेक्षाकृत युवा लोगों के मामले सामने आए हैं। वैश्विक स्वास्थ्य तथा औषधि के राष्ट्रीय केंद्र के सातोशि कुत्सुना बताते हैं कि जिन 30 से ज्यादा लोगों का उन्होंने उपचार किया है उनमें से 40 की उम्र पार कर चुके एक व्यक्ति में गंभीर लक्षण विकसित हुए थे। उस व्यक्ति में स्वास्थ्य संबंधी कोई पूर्व समस्या नहीं थी।

कुत्सुना ने बताया कि उस व्यक्ति को पहले के कुछ दिनों में सिर्फ बुखार और खाँसी-जुकाम की समस्या थी, लेकिन 1 सप्ताह के बाद उसे गंभीर रूप से निमोनिया हो गया और बिगड़ती श्वास स्थिति के कारण उसे कृत्रिम श्वसन यंत्र पर रखने की आवश्यकता पड़ी। उन्होंने बताया कि बाद में वह व्यक्ति ठीक हो गया।

कुत्सुना कहते हैं कि युवाओं को ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि वह ठीक हैं क्योंकि युवा भी बहुत गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि ऐसे कई मामले हैं जिनमें 50 से कम उम्र के लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा है। अमरीकी रोग नियंत्रण तथा बचाव केंद्रों ने ख़बर दी है कि 20 से 44 आयुवर्ग के संक्रमित लोगों में से 2 से 4 प्रतिशत लोग सघन चिकित्सा कक्ष में भर्ती हैं।

यह आँकड़ा 2 अप्रैल तक का है।





प्रश्न.15. क्या चीन के शहर वुहान में, इटली में या अन्य यूरोपीय देशों में वायरस में उत्परिवर्तन हो रहा है?

उत्तर.15. मार्च महीने की शुरुआत में एक चीनी अनुसंधान दल ने पूरे विश्व के 100 से भी ज़्यादा कोरोनावायरस रोगियों से लिये गए कोरोनावायरस के गुणसूत्रों, यानि जीन्स का विश्लेषण किया था। अनुसंधान दल ने पाया की गुणसूत्रों में मिली भिन्नता दो प्रकार के कोरोनावायरस की विशेषता थीं। एल-प्रकार का कोरोनावायरस और एस-प्रकार का कोरोनावायरस।

अनुसंधान दल को पता चला कि एस-प्रकार के कोरोनावायरस की गुणसूत्र संरचना चमगादड़ों में पाए जाने वाले कोरोनावायरस से मिलती जुलती है। दूसरी ओर, एल-प्रकार का कोरोनावायरस यूरोपीय देशों के संक्रमित रोगियों में मुख्य रूप से पाया गया, और माना जा रहा है कि यह एस-प्रकार के कोरोनावायरस की तुलना में वायरस का नया रूप है।

रित्सुमेइकान विश्वविद्यालय के आयुर्विज्ञान विभाग महाविद्यालय के प्राध्यापक इतो मासाहिरो कोरोनावायरस के गुणधर्मों का अध्ययन कर रहे हैं। वह कहते हैं कि कोरोनावायरस में बहुत ही सरलता से उत्परिवर्तन होता है, और माना जा रहा है कि बार-बार वायरस के फैलने से, और ज़्यादा लोगों के संक्रमित होने से इसके अनुवांशिक ढाँचे में और परिवर्तन आएँगे।

वायरस द्वारा और आसानी से संक्रामक होने के लिए अपने अनुवांशिक ढाँचे को परिवर्तित करने की संभावना पर प्राध्यापक इतो का कहना है कि वायरस अभी भी उस स्तर पर है जहाँ उसके अनुवांशिक ढाँचे में अधिक बदलाव नहीं आया है। भले ही एल-प्रकार और एस-प्रकार के कोरोनावायरस के गुणसूत्रों में भिन्नता हो, लेकिन अभी अपर्याप्त जानकारी के कारण यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि कौन से प्रकार से ज्यादा गंभीर लक्षण उत्पन्न होते हैं। इतो कहते हैं कि हालाँकि रोग की गंभीरता और मृत्यु दर हर देश में अलग-अलग हैं, लेकिन इस अंतर का कारण लोग खुद ही माने जा रहे हैं, जिसमें देश की बुज़ुर्ग जनसंख्या का अनुपात, संस्कृति और खाद्य शैली जैसे कारक शामिल हैं।

यह आँकड़ा 3 अप्रैल तक का है।





प्रश्न.16. एवीगन दवा कितनी प्रभावी है?

उत्तर.16. फ़्लू रोधी दवा एवीगन, जिसे फ़ावीपिराविर के नाम से भी जाना जाता है, का विकास एक जापानी दवा कंपनी ने 6 वर्ष पूर्व किया था। प्रयोगशाला में पशुओं पर परीक्षण उपरांत इस दवा के साइड इफ़ेक्ट सामने आने के कारण, गर्भवती महिलाओं जैसे कुछ विशिष्ट वर्गों के लिए, जापान सरकार ने इस दवा के उपयोग को अनुमति नहीं दी है। अब एवीगन दवा का उपयोग नये कोरोनावायरस से संक्रमित रोगियों के केवल उन मामलों में किया जाएगा जिनकी अनुमति सरकार से प्राप्त होगी।

वर्तमान में ऐसी अन्य कोई ज्ञात दवा नहीं है जो नये कोरोनावायरस से संक्रमित मरीज़ों का उपचार प्रभावी तरीके से कर सके, परंतु एवीगन को नये कोरोनावायरस के ख़िलाफ़ प्रभावी माना जा रहा है, जो इन्फ़्लूएंज़ा वायरस के समान ही विभाजित होकर बढ़ता है। इस दवा के प्रभावों पर विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान किये जा रहे हैं।

चीन सरकार ने दो चिकित्सा संस्थानों में किये गए नैदानिक अनुसंधान के परिणाम घोषित किए हैं। इनमें से एक गुआंगदोंग प्रांत के शेनझेन शहर में किया गया था जिसमें 80 मरीज़ शामिल थे। जिन रोगियों को एवीगन दवा नहीं दी गयी उनके परिणाम कोरोनावायरस पॉज़िटिव से कोरोनावायरस नेगेटिव में परिणत होने की मध्यस्थ अवधि 11 दिन थी। जिन रोगियों को दवा दी गयी उनके परिणामों की मध्यस्थ अवधि 4 दिन थी। रोगियों के एक्स-रे परिणाम बताते हैं कि एवीगन दवा नहीं दिए जाने वाले 62% रोगियों के फेफड़ों की स्थिति में सुधार हुआ, जबकि दवा प्राप्त करने वाले 91% रोगियों की स्थिति बेहतर हुई।

चीन सरकार ने इन परिणामों के कारण घोषित किया कि एवीगन दवा नये कोरोनावायरस से संक्रमित रोगियों के उपचार के लिए उपयोग में लाई जाने वाली दवाओं में आधिकारिक रूप से शामिल की जाए।

जापान में, मार्च माह से, आइचि प्रिफ़ैक्चर के फ़ुजिता स्वास्थ्य विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में, बिना लक्षणों वाले या हल्के लक्षण वाले 80 रोगियों को लेकर नैदानिक अनुसंधान चल रहे हैं। शोधकर्ता तुलनात्मक अध्ययन कर रहे हैं कि यह दवा वायरस की मात्रा को कितना कम कर सकती है।

एवीगन का निर्माण करने वाली जापानी कंपनी ने घोषणा की है कि उसने सरकारी अनुमति प्राप्त करने के लिए नैदानिक परीक्षण आरंभ कर दिए हैं। अगर दवा की प्रभावशीलता और सुरक्षा सुनिश्चित होती है तो कंपनी सरकार से अनुमति प्राप्त करने का आवेदन देने की योजना रखती है।

उपरोक्त आँकड़ा 6 अप्रैल तक का है।