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जापान की विशिष्टताएँ
संक्षेप में जानिए जापान की संस्कृति, भाषा, परम्परा, और शिष्टाचार के बारे में । हो सकता है कुछ ऐसा जानने को मिल जाए जो जानने की हमेशा से जिज्ञासा थी ।
पाठ 50सासेते इतादाकिमासु
जापान के लोगों की बातचीत में सासेते इतादाकिमासु अक्सर सुनने को मिलता है । इस वाक्यांश का इस्तेमाल करके आप दूसरे के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं...ये मानने वाले लोग बढ़ रहे हैं ।
जैसे मीटिंग की शुरूआत में सामने बैठे लोगों से कहते हैं सेत्सुमेइ सासेते इतादाकिमासु जिसका शाब्दिक अर्थ है "आप मुझे अपनी बात रखने का मौक़ा दे रहे हैं" लेकिन इसका भाव है "अब मैं अपनी बात आपके सामने रखूँगा" ।
एक और उदाहरण लेते हैं । कई दुकानों के दरवाज़ों पर लिखा रहता है जुउजि कारा एइग्योउ सासेते इतादाकिमासु जिसका शाब्दिक अर्थ है "आप हमें दस बजे दुकान खोलने का मौक़ा दे रहे हैं" लेकिन इसका भाव है "दुकान दस बजे खुलेगी" । दरअसल, यहाँ सासेते इतादाकिमासु का इस्तेमाल ग़लत है ।
लेकिन भाषा समय के साथ बदलती रहती है । इसलिए हो सकता है कि आने वाले समय में यही सही जापानी मानी जाए ।
पाठ 49ओफ़ुरो
जापान के ज़्यादातर घरों में ग़ुसलखाने में टब होते हैं । इनमें आप पैर फैला कर आराम से बैठ सकते हैं । टब में एक बार गर्म पानी भरा जाता है और परिवार के सभी सदस्य बारी-बारी से उसी का इस्तेमाल करते हैं इसलिए टब में बैठने से पहले नहाना ज़रूरी है ।
जापान की स्नान संस्कृति अनूठी है । तभी तो लोग "सेंतोउ" और "ओन्सेन" भी जाते हैं । जब लोग सिर्फ़ "ओन्सेन" का आनंद लेने के लिए ही दूसरे शहर जाते हैं, तो इसे "ओन्सेन रयोकोउ" यानी "ओन्सेन यात्रा" कहते हैं ।
जापान में कई स्थान केवल "ओन्सेन" यानी तप्तजल कुण्डों के लिए ही प्रसिद्ध हैं । यहाँ पर रहने, ठहरने, खाने-पीने की सारी सुविधाएँ होती हैं इसलिए इन्हें "ओन्सेन रयोकान" कहते हैं । तप्त जल कुण्ड में बैठकर क़ुदरत की छटा निहारनी हो तो "रोतेम्बुरो" में बैठते हैं जो खुले आकाश तले बने होते हैं । क्योंकि इनमें बैठकर स्वच्छंदता की अनुभूति होती है इसलिए ये बहुत ही लोकप्रिय हैं ।
पाठ 48खाने-पीने की मौसमी चीज़ें
जापान में चार मौसम देखे जा सकते हैं – वसंत, ग्रीष्म, शरद और शीत । आज आपको बताएँगे किस मौसम में किस खाने पीने की चीज़ का आनंद लिया जा सकता है ।
वसंत ॠतु की ख़ासियत हैं “ताके नो को” यानी “बाँस की कोंपलें” या “बैम्बू शूट” और “हात्सुगात्सुओ” यानी “मौसम की पहली कात्सुओ मछली” ।
गर्मियों में लोग “क्युउरि” यानी “खीरा” और सर्प मीन खूब खाते हैं । खीरा शरीर को ठंडा रखता है और ताज़गी का अहसास देता है ।
शरद ॠतु में इतनी तरह की चीज़ें मिलती है कि इसे “खाने-पीने” का मौसम कहा जाता है । शरद में “काकि” नाम का फल मिलता है । “साम्मा” इस मौसम की स्थानीय मछली है । और “किनोको” यानी “मशरूम” खूब मिलते हैं ।
और सर्दियों में खाई जाती है “दाइकोन” यानी “मूली” और “तारा” यानी “कॉड” मछली ।
मौसम में ये सब चीज़ें सस्ती मिलती हैं इसलिए लोग इन्हें खूब खाते हैं । ख़ासकर समुद्री खाद्य बड़े चाव से खाए जाते हैं ।
पाठ 47स्थानीय विशेष उत्पाद
जापानी द्वीप समूह उत्तर से दक्षिण की तरफ़ लम्बाई में फैला है । चार अलग-अलग मौसम हैं और हर एक की अलग प्राकृतिक छटा है । हर इलाक़े के अपने कृषि उत्पाद और विशेषताएँ हैं ।
फ़ुजि पर्वत की तलहटी में बसे शिज़ुओका प्रिफ़ैक्चर की विशेषता है, चाय । जापान में सबसे ज़्यादा चाय वहीं होती है । शिज़ुओका में समुद्र तट भी है जहाँ साकुरा श्रिम्प जैसे कई तरह के समुद्री खाद्य मिलते हैं ।
उत्तरी जापान के होक्काइदोउ में ज़मीन बहुत है । वहाँ आलू की खेती होती है और गायें पाली जाती हैं । इसलिए होक्काइदोउ आलू या दूध से बनी चीज़ों के लिए सुप्रसिद्ध है । वहाँ घने जंगल भी हैं, इसलिए वहाँ का लकड़ी का काम भी मशहूर है । वैसे तो आजकल कहीं भी हर इलाक़े की चीज़ें मिलने लगी हैं लेकिन असली मज़ा तो सही मौसम में उसी इलाक़े में जाकर खाने का है ।
पाठ 46फ़ुजि पर्वत
फ़ुजि सान की चढ़ाई करने के सबसे अच्छे महीने हैं जुलाई और अगस्त । इन दो महीनों में 3 लाख से भी ज़्यादा लोग फ़ुजि सान की चोटी तक पहुँचने की कोशिश करते हैं । इनमें लगभग 30 प्रतिशत लोग विदेशी होते हैं । वैसे तो जुलाई और अगस्त में गर्मी होती है, लेकिन जैसे-जैसे 3776 मीटर ऊँची चोटी के क़रीब पहुँचते जाते हैं, तापमान गिरता चला जाता है और मौसम पल-पल बदलता है । इसलिए बारिश और ठंड से बचाव की पूरी तैयारी होनी चाहिए और साथ ही रखना चाहिए ढेर सारा खाना-पीना । ऊँचाई की वजह से बहुत लोगों की तबीयत ख़राब हो जाती है...इस बात का भी ध्यान रखें ।
आज तो बच्चे-बूढ़े, पुरुष-महिलाएँ, सभी फ़ुजि सान की चढ़ाई करने जाते हैं लेकिन क़रीब डेढ़ सौ साल पहले महिलाओं को फ़ुजि सान पर चढ़ने की अनुमति नहीं थी । लेकिन उससे पहले तो महिलाएँ भी पुरुषों के साथ चढ़ाई किया करती थीं । फ़ुजि सान का शिखर प्राचीन काल से ही लोगों के दिलों को अपनी ओर खींचता जो आया है ।
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